{"_id":"6a8201de12101d810c043a6a","slug":"at-the-age-of-22-the-gold-medalist-daughter-became-the-village-head-narnol-news-c-196-1-nnl1004-143937-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: 22 की उम्र में गोल्ड मेडलिस्ट बेटी बनी थीं गांव की मुखिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: 22 की उम्र में गोल्ड मेडलिस्ट बेटी बनी थीं गांव की मुखिया
विज्ञापन
फोटो 22 आरती यादव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंडी अटेली। ग्राम पंचायत सलीमपुर की सरपंच आरती यादव ने महज 22 साल की उम्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। गोल्ड मेडलिस्ट और यूजीसी नेट क्वालिफाइड आरती ने पहले शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हासिल की और फिर गांव की जिम्मेदारी संभालकर विकास की राह पर कदम बढ़ाया।
आरती का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। पहली चुनावी हार के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। जनता के बीच रहकर अनुभव लिया और अगली बार जीत दर्ज कर सलीमपुर की सरपंच बनीं। उनके नेतृत्व में पंचायत को हरियाणा पंचायत गौरव पुरस्कार-2026 मिला। महिला सशक्तीकरण और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें वीमन प्राइड अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाली आरती ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ऑनर्स किया। केंद्रीय विश्वविद्यालय से एमकॉम में सर्वोच्च अंक लेकर गोल्ड मेडल हासिल किया और बीएड भी किया। परिवार के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाया।
विज्ञापन
आरती कहती हैं कि सरपंच बनना उनके लिए सिर्फ पद नहीं, बल्कि गांव की सेवा की जिम्मेदारी है। उनका लक्ष्य हर परिवार और बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए काम करना है।
शिक्षा से पर्यावरण तक बदली गांव की तस्वीर
शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आरती ने निजी आय से विद्यार्थियों को ट्रैक सूट और किताबें बांटीं। महिला सशक्तिकरण के लिए सेनेटरी पैड वितरण अभियान चलाया। दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया। सफाई, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार कराया। इसके बाद उनकी गांव की पंचायत को हरियाणा पंचायत गौरव पुरस्कार मिला।
संसद टीवी पर साझा किया अनुभव
आरती को संसद टीवी पर आमंत्रित कर उनके नेतृत्व और विकास कार्यों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि 22 साल की उम्र में सरपंच बनकर कैसे शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के दम पर गांव को नई दिशा दी। आरती यादव ने कहा कि गांव की बेटी होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि हर परिवार तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे।
विज्ञापन
आरती का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। पहली चुनावी हार के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। जनता के बीच रहकर अनुभव लिया और अगली बार जीत दर्ज कर सलीमपुर की सरपंच बनीं। उनके नेतृत्व में पंचायत को हरियाणा पंचायत गौरव पुरस्कार-2026 मिला। महिला सशक्तीकरण और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें वीमन प्राइड अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाली आरती ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ऑनर्स किया। केंद्रीय विश्वविद्यालय से एमकॉम में सर्वोच्च अंक लेकर गोल्ड मेडल हासिल किया और बीएड भी किया। परिवार के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाया।
विज्ञापन
आरती कहती हैं कि सरपंच बनना उनके लिए सिर्फ पद नहीं, बल्कि गांव की सेवा की जिम्मेदारी है। उनका लक्ष्य हर परिवार और बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए काम करना है।
शिक्षा से पर्यावरण तक बदली गांव की तस्वीर
शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आरती ने निजी आय से विद्यार्थियों को ट्रैक सूट और किताबें बांटीं। महिला सशक्तिकरण के लिए सेनेटरी पैड वितरण अभियान चलाया। दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया। सफाई, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार कराया। इसके बाद उनकी गांव की पंचायत को हरियाणा पंचायत गौरव पुरस्कार मिला।
संसद टीवी पर साझा किया अनुभव
आरती को संसद टीवी पर आमंत्रित कर उनके नेतृत्व और विकास कार्यों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि 22 साल की उम्र में सरपंच बनकर कैसे शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के दम पर गांव को नई दिशा दी। आरती यादव ने कहा कि गांव की बेटी होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि हर परिवार तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे।