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शोध की गुणवत्ता सटीकता और अनुकूलनशीलता पर निर्भर : कुलपति
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फोटो संख्या: 55 हकेंवि में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थी। विज्ञप्ति
- फोटो : शहर के रामलीला मैदान स्थित सराफा शोरूम में ग्राहकों की लगी भीड़।
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) के समाजशास्त्र विभाग की ओर से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की ओर से दस दिवसीय शोध प्रविधि पाठ्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ किया गया। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि शोध की गुणवत्ता उसकी पद्धतिगत सटीकता और अनुकूलनशीलता पर निर्भर करती है।
प्रो. कुमार ने एसपीएसएस जैसे डेटा विश्लेषण उपकरणों और शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार व नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। देशभर से चयनित 38 प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम ने सामाजिक विज्ञान में उन्नत शोध पद्धतियों, शोध नैतिकता और विश्लेषणात्मक प्रक्रियाओं के गहन अध्ययन के लिए एक संगठित मंच प्रदान किया।
समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. टी. लॉन्गकोई खियामन्युंगन ने समकालीन सामाजिक यथार्थ की जटिलताओं को समझने में पद्धतिगत दृढ़ता और नैतिक उत्तरदायित्व पर बल दिया। सह-पाठ्यक्रम निदेशक तन्वी भाटी ने पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
पाठ्यक्रम में शोध अभिकल्पना, गुणात्मक व मात्रात्मक विधियां, मिश्रित शोध दृष्टिकोण, डेटा संकलन तकनीकें, सांख्यिकीय विश्लेषण, अकादमिक लेखन व प्रकाशन प्रक्रियाएं, शोध नैतिकता और प्रस्ताव लेखन जैसे विषय शामिल हैं। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को उच्चस्तरीय, प्रभावी और नैतिक रूप से उत्तरदायी शोध करने के लिए आवश्यक दक्षताओं से सुसज्जित करना है।
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प्रो. कुमार ने एसपीएसएस जैसे डेटा विश्लेषण उपकरणों और शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार व नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। देशभर से चयनित 38 प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
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कार्यक्रम ने सामाजिक विज्ञान में उन्नत शोध पद्धतियों, शोध नैतिकता और विश्लेषणात्मक प्रक्रियाओं के गहन अध्ययन के लिए एक संगठित मंच प्रदान किया।
समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. टी. लॉन्गकोई खियामन्युंगन ने समकालीन सामाजिक यथार्थ की जटिलताओं को समझने में पद्धतिगत दृढ़ता और नैतिक उत्तरदायित्व पर बल दिया। सह-पाठ्यक्रम निदेशक तन्वी भाटी ने पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
पाठ्यक्रम में शोध अभिकल्पना, गुणात्मक व मात्रात्मक विधियां, मिश्रित शोध दृष्टिकोण, डेटा संकलन तकनीकें, सांख्यिकीय विश्लेषण, अकादमिक लेखन व प्रकाशन प्रक्रियाएं, शोध नैतिकता और प्रस्ताव लेखन जैसे विषय शामिल हैं। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को उच्चस्तरीय, प्रभावी और नैतिक रूप से उत्तरदायी शोध करने के लिए आवश्यक दक्षताओं से सुसज्जित करना है।