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Mahendragarh-Narnaul News: टूटी उम्मीदों से निकली अफसर बिटिया की जीत
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फोटो 29ज्योति यादव।
- फोटो : ट्रामा सेंटर में सांप पकड़ता युक। संवाद
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मंडी अटेली। नौ साल अपने अंदर मेहनत की लौ को जलाए रख, ज्योति ने अपनी मंजिल पा ली है। कई असफलताओं और टूटते-छूटते सपनों के बीच भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षा पास कर गांव नावदी की बेटी ज्योति ने पंचायत राज अधिकारी का पद हासिल किया।
ज्योति का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता पशु चिकित्सक हैं और माता गृहिणी हैं। ज्योति ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की और आगे की शिक्षा कमला देवी महाविद्यालय डीखवाड़ से पूरी की। कॉलेज के समय ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देख लिया था।
स्नातक के बाद ज्योति ने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। इस दौरान कई बार उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा पास की, इंटरव्यू तक भी पहुंचीं लेकिन सफलता बार-बार थोड़ी दूरी पर रह गई। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम करते हुए लगातार तैयारी जारी रखी।
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इस पूरे सफर में उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया और पढ़ाई के लिए पूरा सहयोग किया। भाई-भाभी ने भी उनका हौसला बढ़ाया। ज्योति अपनी सफलता का श्रेय परिवार के विश्वास और समर्थन को देती हैं।
चयन की खबर मिलते ही गांव नावदी में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने उनका सम्मान किया। ज्योति ने कहा कि असफलता से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका कहना है कि बड़ा लक्ष्य होने पर संघर्ष भी बड़ा होता है, लेकिन निरंतर मेहनत से सफलता जरूर मिलती है।
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ज्योति का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता पशु चिकित्सक हैं और माता गृहिणी हैं। ज्योति ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की और आगे की शिक्षा कमला देवी महाविद्यालय डीखवाड़ से पूरी की। कॉलेज के समय ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देख लिया था।
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स्नातक के बाद ज्योति ने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। इस दौरान कई बार उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा पास की, इंटरव्यू तक भी पहुंचीं लेकिन सफलता बार-बार थोड़ी दूरी पर रह गई। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम करते हुए लगातार तैयारी जारी रखी।
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इस पूरे सफर में उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया और पढ़ाई के लिए पूरा सहयोग किया। भाई-भाभी ने भी उनका हौसला बढ़ाया। ज्योति अपनी सफलता का श्रेय परिवार के विश्वास और समर्थन को देती हैं।
चयन की खबर मिलते ही गांव नावदी में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने उनका सम्मान किया। ज्योति ने कहा कि असफलता से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका कहना है कि बड़ा लक्ष्य होने पर संघर्ष भी बड़ा होता है, लेकिन निरंतर मेहनत से सफलता जरूर मिलती है।