जासूसी कांड: एनआईए की टीम ने दूसरे दिन भी चलाया पलवल-नूंह में सर्च अभियान; अब तक की जांच में सामने आई यह बात
शुक्रवार को एनआईए सहित केंद्रीय एजेंसियों ने पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क पर सर्च अभियान जारी रखा। पलवल और नूंह से आठ युवक हिरासत में हैं। प्रारंभिक जांच में एजेंट ने पहचान छिपाकर दोस्ती की थी।
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मेवात क्षेत्र में कथित पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क को लेकर शुक्रवार को भी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए), केंद्रीय खुफिया विभाग, जम्मू-कश्मीर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने सर्च अभियान जारी रखा। टीम ने विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों से पूछताछ की और कई अहम जानकारियां जुटाईं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि हिरासत में लिए गए युवक पिछले दो वर्षों से पाकिस्तानी एजेंट के सीधे संपर्क में नहीं थे।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां मामले की हर पहलू से गहन जांच कर रही हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध एजेंट ने बहीन और तावडू क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहकर अपना नेटवर्क तैयार किया। खुफिया विभाग सभी संदिग्धों के डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगालने में लगी हुई है। विभाग इन युवकों से यह जानकारी जुटाने में लगी है कि पाकिस्तानी एजेंट किन-किन लोगों से मिला था और किन-किन स्थानों का दौरा किया था।
गौरतलब है कि केंद्रीय खुफिया विभाग की रिपोर्ट के बाद पलवल और नूंह से करीब आठ युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पिछले पांच दिनों से केंद्रीय खुफिया विभाग, जम्मू-कश्मीर पुलिस और एसटीएफ की टीमें लगातार संदिग्धों से पूछताछ में जुटी हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में बहीन थाना क्षेत्र के पावसर गांव से तीन युवकों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें दो सगे भाई बताए जा रहे हैं। वही, तीसरा युवक कथित पाकिस्तानी जासूस का करीबी सहयोगी है।
इसी ने पाकिस्तानी जासूस को जम्मू-कश्मीर से मेवात क्षेत्र में लाया था। वहीं, नूंह जिले के पांच अन्य संदिग्ध युवकों से पूछताछ की जा रही है। यह पूछताछ जम्मू कश्मीर में गिरफ्तार एक युवक से मिली जानकारी के आधार पर की जा रही है। खुफिया विभाग की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी एजेंट ने खुद को श्रीनगर का निवासी बताया था। एजेंट ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर युवकों से दोस्ती की थी।
सूत्रों के अनुसार वह पहले बहीन थाना क्षेत्र के गांव पावसर में काफी समय तक रहा और बाद में नूंह जिले के तावडू इलाके में भी ठिकाना बनाए रखा। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि साल 2017 के दौरान कुछ युवक जम्मू-कश्मीर में संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में आए थे, जिनके पाकिस्तान लिंक होने की आशंका जताई जा रही है। इसी आधार पर एजेंसियां पुराने संपर्कों और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। फिलहाल पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां मामले की संवेदनशीलता के चलते आधिकारिक बयान देने से बच रही हैं। हालांकि आने वाले दिनों में इस जांच में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।