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Palwal News: एआरटी सेंटर न होने से एचआईवी मरीज परेशान, हर महीने 60 किमी दूर जाना मजबूरी
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जिले में 1700 से अधिक मरीज, फरीदाबाद-नूंह जाकर करा रहे इलाज
विपिन सैनी
पलवल।
जिले में एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर न होना एचआईवी मरीजों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। मरीजों को हर महीने दवा लेने के लिए फरीदाबाद या नूंह स्थित अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जिले में करीब 1700 से अधिक एचआईवी पॉजिटिव मरीज हैं। जिला नागरिक अस्पताल के आईसीटीसी सेंटर में केवल नि:शुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है, जबकि उपचार के लिए मरीजों को अन्य जिलों में रेफर किया जाता है। खासकर हसनपुर, होडल और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को 50 से 60 किलोमीटर दूर फरीदाबाद जाना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि कई बार भीड़ अधिक होने और समय सीमा (दोपहर 12 बजे तक दवा वितरण) के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।
मरीजों ने बताया कि एआरटी दवाएं नियमित रूप से लेनी होती हैं, लेकिन यात्रा और समय की बाधा के कारण उपचार प्रभावित होता है। साथ ही दवाओं के सेवन के बाद कमजोरी और सुस्ती जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।
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एचआईवी मरीजों की पेंशन 18 माह से बंद
जिले में एचआईवी संक्रमित मरीजों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन पिछले 18 महीनों से बंद है। पेंशन न मिलने के कारण मरीजों को दवाइयों, पौष्टिक आहार और दैनिक जरूरतों के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार की योजना के तहत पात्र मरीजों को प्रतिमाह 2250 रुपये की पेंशन दी जाती है, लेकिन बजट जारी न होने से भुगतान रुका हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में पिछले वर्षों में एचआईवी मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेंशन बंद होने से मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, जिससे वे सरकार से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
वर्जन
एआरटी सेंटर भारत सरकार की गाइडलाइन के तहत स्थापित होते हैं और क्षेत्रीय स्तर पर संचालित किए जाते हैं। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया गया है। जल्द ही जिले में एआरटी सेंटर बनने की उम्मीद है। -डॉ. संजीव, डिप्टी सीएमओ, एचआईवी, पलवल
विपिन सैनी
पलवल।
जिले में एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर न होना एचआईवी मरीजों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। मरीजों को हर महीने दवा लेने के लिए फरीदाबाद या नूंह स्थित अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जिले में करीब 1700 से अधिक एचआईवी पॉजिटिव मरीज हैं। जिला नागरिक अस्पताल के आईसीटीसी सेंटर में केवल नि:शुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है, जबकि उपचार के लिए मरीजों को अन्य जिलों में रेफर किया जाता है। खासकर हसनपुर, होडल और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को 50 से 60 किलोमीटर दूर फरीदाबाद जाना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि कई बार भीड़ अधिक होने और समय सीमा (दोपहर 12 बजे तक दवा वितरण) के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।
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मरीजों ने बताया कि एआरटी दवाएं नियमित रूप से लेनी होती हैं, लेकिन यात्रा और समय की बाधा के कारण उपचार प्रभावित होता है। साथ ही दवाओं के सेवन के बाद कमजोरी और सुस्ती जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।
एचआईवी मरीजों की पेंशन 18 माह से बंद
जिले में एचआईवी संक्रमित मरीजों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन पिछले 18 महीनों से बंद है। पेंशन न मिलने के कारण मरीजों को दवाइयों, पौष्टिक आहार और दैनिक जरूरतों के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार की योजना के तहत पात्र मरीजों को प्रतिमाह 2250 रुपये की पेंशन दी जाती है, लेकिन बजट जारी न होने से भुगतान रुका हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में पिछले वर्षों में एचआईवी मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेंशन बंद होने से मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, जिससे वे सरकार से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
वर्जन
एआरटी सेंटर भारत सरकार की गाइडलाइन के तहत स्थापित होते हैं और क्षेत्रीय स्तर पर संचालित किए जाते हैं। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया गया है। जल्द ही जिले में एआरटी सेंटर बनने की उम्मीद है। -डॉ. संजीव, डिप्टी सीएमओ, एचआईवी, पलवल