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Panchkula News: पोर्टल पर उपजाऊ जमीन दिख रही बंजर, धरने पर बैठे किसान
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कालका। मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर सैटेलाइट वेरिफिकेशन में गड़बड़ियों के कारण किसानों की उपजाऊ जमीन को बंजर और कल्लड़ दिखाने तथा जमीन का रकबा आधा दर्ज करने के आरोप लगे हैं।
इससे किसानों के फसल पंजीकरण और मंडियों में धान बेचने में परेशानी आ रही है। समस्या से नाराज किसानों ने भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के नेतृत्व में कालका एसडीएम कार्यालय के गेट के सामने करीब पांच घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि जब तक पोर्टल पर रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किया जाता, धरना समाप्त करने पर फैसला नहीं लिया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि पटवारी की रिपोर्ट होने के बावजूद अधिकारियों ने फसलों को ‘मिसमैच’ या गैर-कृषि श्रेणी में दिखाकर किसानों का रकबा घटा दिया। पोर्टल पर गड़बड़ी के कारण किसान अपनी पूरी उपज का पंजीकरण नहीं करवा पा रहे हैं। आढ़ती और राइस मिलर किसानों से 2400 रुपये वाली फसल 1800 से 2000 रुपये में खरीद रहे हैं।
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पिंजौर वार्ड एक से पंचायत समिति सदस्य रविकांत शर्मा ने बताया कि पंजीकरण होने के बावजूद किसानों की वेरिफिकेशन पेंडिंग दिखाई जा रही थी। गलत सत्यापन से उपजाऊ जमीन का रकबा शून्य तक दर्ज हो गया, जिससे मंडियों में फसल बेचने में दिक्कत आई। ब्लॉक प्रधान गुरजीत कैरों ने कहा कि 10 किल्ले जमीन वाले किसान का रकबा पोर्टल पर घटकर 5-6 किल्ले रह गया है। संवाद
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इससे किसानों के फसल पंजीकरण और मंडियों में धान बेचने में परेशानी आ रही है। समस्या से नाराज किसानों ने भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के नेतृत्व में कालका एसडीएम कार्यालय के गेट के सामने करीब पांच घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि जब तक पोर्टल पर रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किया जाता, धरना समाप्त करने पर फैसला नहीं लिया जाएगा।
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भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि पटवारी की रिपोर्ट होने के बावजूद अधिकारियों ने फसलों को ‘मिसमैच’ या गैर-कृषि श्रेणी में दिखाकर किसानों का रकबा घटा दिया। पोर्टल पर गड़बड़ी के कारण किसान अपनी पूरी उपज का पंजीकरण नहीं करवा पा रहे हैं। आढ़ती और राइस मिलर किसानों से 2400 रुपये वाली फसल 1800 से 2000 रुपये में खरीद रहे हैं।
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पिंजौर वार्ड एक से पंचायत समिति सदस्य रविकांत शर्मा ने बताया कि पंजीकरण होने के बावजूद किसानों की वेरिफिकेशन पेंडिंग दिखाई जा रही थी। गलत सत्यापन से उपजाऊ जमीन का रकबा शून्य तक दर्ज हो गया, जिससे मंडियों में फसल बेचने में दिक्कत आई। ब्लॉक प्रधान गुरजीत कैरों ने कहा कि 10 किल्ले जमीन वाले किसान का रकबा पोर्टल पर घटकर 5-6 किल्ले रह गया है। संवाद