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Panchkula News: बैंक के पूर्व मैनेजरों ने फर्जी कंपनियों से उड़ाई करोड़ों की रकम

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 02:14 AM IST
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Former Bank Managers Siphon Off Crores from Shell Companies
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर और रिलेशनशिप मैनेजर पर ईडी का शिकंजा
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सरकारी खातों से 645 करोड़ का खेल, ड्राइवर-पीए के नाम पर बनाए फर्जी नेटवर्क
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी विभागों से जुड़े 645.59 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 चंडीगढ़ के पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि और रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार ने फर्जी कंपनियों और खातों के जरिए सरकारी रकम का गबन किया। मामले में पंचकूला स्थित विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।

एफडीआर के नाम पर करोड़ों का घोटाला
जांच के अनुसार सरकारी विभागों की रकम को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) में जमा किया जाना था, लेकिन वास्तविक एफडीआर बनाई ही नहीं गईं। आरोप है कि विभागों को फर्जी एफडीआर दिखाकर करोड़ों रुपये अलग-अलग खातों और शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए गए। ईडी के मुताबिक रिभव ऋषि अप्रैल 2023 से अगस्त 2025 तक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा में ब्रांच मैनेजर रहा। इस दौरान उसने अपने ड्राइवर, निजी सहायक और रिश्तेदारों के नाम पर कई फर्जी कंपनियां बनाईं और उन्हीं खातों में सरकारी पैसा ट्रांसफर कराया।
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ड्राइवर और पीए के नाम पर खोलीं फर्में
जांच में सामने आया कि रिभव ऋषि ने अपने निजी सहायक भूपिंदर सिंह और ड्राइवर की पत्नी के नाम पर फर्में बनवाईं। इन खातों से जुड़े मोबाइल नंबर खुद रिभव ऋषि इस्तेमाल कर रहा था। ईडी के अनुसार इन फर्मों को सरकारी विभागों और पंचकूला व चंडीगढ़ के निजी स्कूलों से सीधे 471.69 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। पूछताछ में भूपिंदर सिंह ने बताया कि आरोपी ने अतिरिक्त पैसे का लालच देकर उसके नाम पर फर्म खुलवाई थी। उससे खाली चेक और आरटीजीएस फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाए जाते थे। बाद में उसके जरिए नकदी अलग-अलग लोगों तक पहुंचाई जाती थी।

ज्वेलर्स के खातों में भेजी गई रकम
ईडी जांच में यह भी सामने आया कि कैपको फिनटेक से बड़ी रकम विभिन्न ज्वेलर्स के खातों में ट्रांसफर की गई। बाद में इन ट्रांजैक्शनों के बदले नकदी हासिल कर चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में अलग-अलग लोगों तक पहुंचाई जाती थी। मामले में कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

ड्राइवर, मां और सीए के नाम पर भी बनाई कंपनियां
जांच एजेंसी के अनुसार रिभव ऋषि ने अपने ड्राइवर हेमराज के नाम पर भी एक फर्म बनाई थी। हेमराज ने बताया कि एलआईसी पॉलिसी खुलवाने के बहाने उससे दस्तावेज और खाली चेक लिए गए थे। इस फर्म को करीब 43.80 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा जुलाई 2024 में ‘एसआरआर प्लानिंग गुरुस’ नाम की कंपनी बनाई गई, जिसमें रिभव ऋषि की मां और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट निदेशक थे। इस कंपनी को करीब 55.33 करोड़ रुपये मिले। ईडी का दावा है कि इस ऑफिस का इस्तेमाल नकदी जमा करने और आगे पहुंचाने के लिए किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि रिभव ऋषि और उसकी पत्नी को विभिन्न शेल कंपनियों से करीब 34.22 करोड़ रुपये मिले।

अभय कुमार पर भी करोड़ों की हेराफेरी का आरोप

रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार पर भी सरकारी खातों से करोड़ों रुपये निकालने का आरोप है। जांच के मुताबिक उसने अपनी पत्नी स्वाति और साले अभिषेक सिंगला के नाम पर ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ नाम की फर्म बनाई थी। इस फर्म को करीब 203.50 करोड़ रुपये मिले, जिनमें हरियाणा की सरकारी संस्थाओं की रकम भी शामिल बताई गई है।
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