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Panchkula News: रेलवे दिखाता तत्परता तो पीएम करते वर्ल्ड क्लास स्टेशन का उद्घाटन
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पंचकूला। यदि रेलवे ने समय पर काम पूरा करने में तत्परता दिखाई होती तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चंडीगढ़ दौरे के दौरान वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन का भी उद्घाटन करते लेकिन जनवरी 2023 में शुरू हुआ स्टेशन पुनर्विकास कार्य तय समय से दो वर्ष से अधिक पीछे चल रहा है। अप्रैल 2024 तक पूरा होने वाला यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट आज भी अधूरा है। स्टेशन के दोनों एंट्री गेट, थ्रू रूफ, 1600 केवी बिजली व्यवस्था, पुराना फुटओवर ब्रिज (एफओबी) हटाने और इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) चार्जिंग स्टेशन सहित कई अहम कार्य अब भी पूरे नहीं हो सके हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार चलते रेलवे स्टेशन पर निर्माण, अनुभवहीन ठेकेदार और बार-बार बदले गए डिजाइन के कारण परियोजना लगातार पिछड़ती गई जिससे प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन का अवसर भी निकल गया।
देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देने की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास किया जा रहा है। यह परियोजना यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। हालांकि निर्माण कार्य का एक हिस्सा पूरा हो चुका है लेकिन स्टेशन अब भी पूरी तरह संचालन के लिए तैयार नहीं है।
बिजली क्षमता बढ़े बिना नहीं खुलेंगी आधुनिक सुविधाएं
फिलहाल स्टेशन को लगभग 300 केवी बिजली आपूर्ति मिल रही है जबकि पूरे स्टेशन को संचालित करने के लिए 1600 केवी क्षमता की आवश्यकता है। नई बिजली व्यवस्था शुरू होने के बाद ही स्टेशन की पहली और दूसरी मंजिल यात्रियों के लिए खोली जा सकेगी। इन्हीं मंजिलों पर फूड कोर्ट, आधुनिक वेटिंग लाउंज, व्यावसायिक क्षेत्र, बेहतर यात्री सुविधाएं और लिफ्ट-एस्केलेटर पूरी क्षमता से संचालित होंगे। अभी कम लोड के कारण कई बार लिफ्ट और एस्केलेटर प्रभावित हो जाते हैं।
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ईवी चार्जिंग स्टेशन भी अब तक शुरू नहीं
स्टेशन परिसर में आईजीबीसी (इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल) मानकों के अनुरूप आठ इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने हैं। चंडीगढ़ और पंचकूला, दोनों ओर चार-चार चार्जिंग पॉइंट प्रस्तावित हैं लेकिन निर्माण अधूरा होने के कारण यह सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी है। शुरू होने के बाद यात्री मामूली शुल्क देकर अपने वाहनों की चार्जिंग करा सकेंगे।
नया एफओबी तैयार, पुराना अब भी बाधा
अंबाला की ओर 12 मीटर चौड़ा नया फुटओवर ब्रिज तैयार हो चुका है और प्लेटफॉर्म नंबर-1 से 6 तक जोड़ दिया गया है। इसके बावजूद पुराना एफओबी अब तक नहीं हटाया गया। दूसरी ओर थ्रू रूफ का निर्माण अधूरा होने से बारिश के दौरान कंकोर्स एरिया में पानी भर जाता है, जिससे यात्रियों को परेशानी और फिसलने का खतरा बना रहता है।
इसलिए लगातार पिछड़ती रही परियोजना
रेलवे सूत्रों के अनुसार परियोजना में देरी की सबसे बड़ी वजह चलते स्टेशन पर निर्माण कार्य करना, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का सीमित अनुभव रखने वाले ठेकेदार को काम मिलना और निर्माण के दौरान बार-बार डिजाइन व कार्ययोजना में बदलाव रहा। कई स्थानों पर पहले फिनिशिंग का काम किया गया और बाद में पाइपलाइन व अन्य सेवाओं के लिए उसे दोबारा तोड़ना पड़ा। इससे समय और लागत दोनों बढ़े तथा परियोजना निर्धारित समय से काफी पीछे चली गई। अब रेलवे अधिकारियों को भी उम्मीद नहीं है कि परियोजना 2026 तक पूरी हो सकेगी। मौजूदा प्रगति को देखते हुए इसके 2027 के दौरान ही पूर्ण रूप से तैयार होने की संभावना जताई जा रही है।
फैक्ट फाइल
कार्य शुरू: जनवरी 2023
निर्धारित समयसीमा: अप्रैल 2024
वर्तमान स्थिति: कई प्रमुख कार्य अधूरे
संभावित पूर्णता: 2027 के दौरान
मुख्य अधूरे कार्य: दोनों एंट्री गेट, थ्रू रूफ, 1600 केवी बिजली व्यवस्था, पुराना एफओबी हटाना, ईवी चार्जिंग स्टेशन और स्टेशन की ऊपरी मंजिलों का संचालन।
चंडीगढ़ वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन का निर्माण तेजी से चल रहा है। संबंधित एजेंसी को निर्धारित समय में शेष कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। हमारा प्रयास है कि परियोजना वर्ष 2026 के भीतर पूरी कर यात्रियों को समर्पित कर दी जाए।
— रवनीत सिंह बिट्टू, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री
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देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देने की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास किया जा रहा है। यह परियोजना यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। हालांकि निर्माण कार्य का एक हिस्सा पूरा हो चुका है लेकिन स्टेशन अब भी पूरी तरह संचालन के लिए तैयार नहीं है।
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बिजली क्षमता बढ़े बिना नहीं खुलेंगी आधुनिक सुविधाएं
फिलहाल स्टेशन को लगभग 300 केवी बिजली आपूर्ति मिल रही है जबकि पूरे स्टेशन को संचालित करने के लिए 1600 केवी क्षमता की आवश्यकता है। नई बिजली व्यवस्था शुरू होने के बाद ही स्टेशन की पहली और दूसरी मंजिल यात्रियों के लिए खोली जा सकेगी। इन्हीं मंजिलों पर फूड कोर्ट, आधुनिक वेटिंग लाउंज, व्यावसायिक क्षेत्र, बेहतर यात्री सुविधाएं और लिफ्ट-एस्केलेटर पूरी क्षमता से संचालित होंगे। अभी कम लोड के कारण कई बार लिफ्ट और एस्केलेटर प्रभावित हो जाते हैं।
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ईवी चार्जिंग स्टेशन भी अब तक शुरू नहीं
स्टेशन परिसर में आईजीबीसी (इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल) मानकों के अनुरूप आठ इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने हैं। चंडीगढ़ और पंचकूला, दोनों ओर चार-चार चार्जिंग पॉइंट प्रस्तावित हैं लेकिन निर्माण अधूरा होने के कारण यह सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी है। शुरू होने के बाद यात्री मामूली शुल्क देकर अपने वाहनों की चार्जिंग करा सकेंगे।
नया एफओबी तैयार, पुराना अब भी बाधा
अंबाला की ओर 12 मीटर चौड़ा नया फुटओवर ब्रिज तैयार हो चुका है और प्लेटफॉर्म नंबर-1 से 6 तक जोड़ दिया गया है। इसके बावजूद पुराना एफओबी अब तक नहीं हटाया गया। दूसरी ओर थ्रू रूफ का निर्माण अधूरा होने से बारिश के दौरान कंकोर्स एरिया में पानी भर जाता है, जिससे यात्रियों को परेशानी और फिसलने का खतरा बना रहता है।
इसलिए लगातार पिछड़ती रही परियोजना
रेलवे सूत्रों के अनुसार परियोजना में देरी की सबसे बड़ी वजह चलते स्टेशन पर निर्माण कार्य करना, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का सीमित अनुभव रखने वाले ठेकेदार को काम मिलना और निर्माण के दौरान बार-बार डिजाइन व कार्ययोजना में बदलाव रहा। कई स्थानों पर पहले फिनिशिंग का काम किया गया और बाद में पाइपलाइन व अन्य सेवाओं के लिए उसे दोबारा तोड़ना पड़ा। इससे समय और लागत दोनों बढ़े तथा परियोजना निर्धारित समय से काफी पीछे चली गई। अब रेलवे अधिकारियों को भी उम्मीद नहीं है कि परियोजना 2026 तक पूरी हो सकेगी। मौजूदा प्रगति को देखते हुए इसके 2027 के दौरान ही पूर्ण रूप से तैयार होने की संभावना जताई जा रही है।
फैक्ट फाइल
कार्य शुरू: जनवरी 2023
निर्धारित समयसीमा: अप्रैल 2024
वर्तमान स्थिति: कई प्रमुख कार्य अधूरे
संभावित पूर्णता: 2027 के दौरान
मुख्य अधूरे कार्य: दोनों एंट्री गेट, थ्रू रूफ, 1600 केवी बिजली व्यवस्था, पुराना एफओबी हटाना, ईवी चार्जिंग स्टेशन और स्टेशन की ऊपरी मंजिलों का संचालन।
चंडीगढ़ वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन का निर्माण तेजी से चल रहा है। संबंधित एजेंसी को निर्धारित समय में शेष कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। हमारा प्रयास है कि परियोजना वर्ष 2026 के भीतर पूरी कर यात्रियों को समर्पित कर दी जाए।
— रवनीत सिंह बिट्टू, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री