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Panchkula News: जर्जर सड़कों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
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मानकों के अनुरूप नहीं हुआ निर्माण, पीएमडीए व नगर निगम को फटकार; 5 मई को अगली सुनवाई
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर की जर्जर सड़कों को लेकर मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग ने स्पष्ट कहा कि सड़कों का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हुआ और इसमें लापरवाही बरती गई।
सेक्टर-15 और औद्योगिक क्षेत्र फेज-2/4 की सड़कों को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई में शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में समतलीकरण, परतबंदी और आधुनिक मशीनरी जैसी जरूरी प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई। आरोप है कि अधिकारियों ने केवल रेत और पत्थर डालकर सड़क को अस्थायी रूप से उपयोग योग्य बना दिया, जिससे लोगों को धूल, असुविधा और दुर्घटना का खतरा झेलना पड़ रहा है।
नगर निगम की कार्रवाई पर भी सवाल
नगर निगम द्वारा ठेकेदार पर 5 प्रतिशत जुर्माना लगाने की जानकारी दी गई, लेकिन आयोग ने इसे अपर्याप्त करार देते हुए कहा कि इससे वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होती।
देरी पर जताई नाराजगी
औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों के उन्नयन के लिए 22.21 करोड़ रुपये की निविदा प्रक्रिया में 4-5 महीने और निर्माण में 12 महीने लगने के प्रस्ताव पर भी आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई। इसे जनता के प्रति असंवेदनशीलता बताते हुए अनावश्यक देरी अस्वीकार्य करार दी गई। आयोग ने कहा कि पंचकूला जैसे सुनियोजित शहर में ऐसी स्थिति प्रशासनिक विफलता और विभागों के बीच समन्वय की कमी को दर्शाती है, जो नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है।
जांच और सुधार के निर्देश
आयोग ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) को मामले की जांच कर निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं नगर निगम आयुक्त को बिना देरी मरम्मत कार्य पूरा कर सड़कों को यातायात योग्य बनाने के आदेश दिए गए हैं। पीएमडीए को भी निर्देशित किया गया है कि वह स्पष्ट रिपोर्ट दे कि सड़कें मानकों के अनुसार बनी हैं या केवल अस्थायी रूप से चालू रखी गई हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 मई 2026 को होगी।
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर की जर्जर सड़कों को लेकर मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग ने स्पष्ट कहा कि सड़कों का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हुआ और इसमें लापरवाही बरती गई।
सेक्टर-15 और औद्योगिक क्षेत्र फेज-2/4 की सड़कों को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई में शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में समतलीकरण, परतबंदी और आधुनिक मशीनरी जैसी जरूरी प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई। आरोप है कि अधिकारियों ने केवल रेत और पत्थर डालकर सड़क को अस्थायी रूप से उपयोग योग्य बना दिया, जिससे लोगों को धूल, असुविधा और दुर्घटना का खतरा झेलना पड़ रहा है।
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नगर निगम की कार्रवाई पर भी सवाल
नगर निगम द्वारा ठेकेदार पर 5 प्रतिशत जुर्माना लगाने की जानकारी दी गई, लेकिन आयोग ने इसे अपर्याप्त करार देते हुए कहा कि इससे वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होती।
देरी पर जताई नाराजगी
औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों के उन्नयन के लिए 22.21 करोड़ रुपये की निविदा प्रक्रिया में 4-5 महीने और निर्माण में 12 महीने लगने के प्रस्ताव पर भी आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई। इसे जनता के प्रति असंवेदनशीलता बताते हुए अनावश्यक देरी अस्वीकार्य करार दी गई। आयोग ने कहा कि पंचकूला जैसे सुनियोजित शहर में ऐसी स्थिति प्रशासनिक विफलता और विभागों के बीच समन्वय की कमी को दर्शाती है, जो नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है।
जांच और सुधार के निर्देश
आयोग ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) को मामले की जांच कर निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं नगर निगम आयुक्त को बिना देरी मरम्मत कार्य पूरा कर सड़कों को यातायात योग्य बनाने के आदेश दिए गए हैं। पीएमडीए को भी निर्देशित किया गया है कि वह स्पष्ट रिपोर्ट दे कि सड़कें मानकों के अनुसार बनी हैं या केवल अस्थायी रूप से चालू रखी गई हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 मई 2026 को होगी।