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डीए में भेदभाव पर HC सख्त: पंजाब सरकार से पूछा-नौकरशाहों और न्यायिक अधिकारियों को लाभ तो कर्मचारी वंचित क्यों

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 26 Mar 2026 02:22 AM IST
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सार

केंद्र सरकार साल में दो बार-1 जनवरी और 1 जुलाई से ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर डीए संशोधित करती है। परंपरागत रूप से पंजाब सरकार भी अपने कर्मचारियों को केंद्र के बराबर डीए देती रही है और राज्य के वेतन आयोगों ने भी इसी नीति का पालन किया है।

If bureaucrats and judicial officers get benefits then why are the employees deprived?
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता (डीए) देने में कथित भेदभाव के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के वित्त विभाग के प्रधान सचिव को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और स्पष्ट किया है कि आदेश की पालना न होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।
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न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता रमन बी. गर्ग को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।
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याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार साल में दो बार-1 जनवरी और 1 जुलाई से ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर डीए संशोधित करती है। परंपरागत रूप से पंजाब सरकार भी अपने कर्मचारियों को केंद्र के बराबर डीए देती रही है और राज्य के वेतन आयोगों ने भी इसी नीति का पालन किया है।

याचिका के अनुसार, 6वें पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर 2021 में नियम लागू किए गए थे और पांच किस्तों में डीए दिया भी गया। हालांकि 1 जनवरी 2023 से देय पांचवीं किस्त का भुगतान 1 नवंबर 2024 को किया गया।

2023 के बाद से नहीं मिली किस्तें 

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 1 जुलाई 2023 से देय डीए की अगली किस्तें अब तक जारी नहीं की गई हैं। इससे न केवल सेवारत कर्मचारियों बल्कि पेंशनरों को भी नुकसान हो रहा है।

एक वर्ग को लाभ, बाकी से भेदभाव 

अदालत को यह भी बताया गया कि राज्य में तैनात अखिल भारतीय सेवा (आईएएस, आईपीएस, आईएफएस) और न्यायिक अधिकारियों को केंद्र सरकार के पैटर्न पर समय-समय पर डीए का लाभ नियमित रूप से मिल रहा है जबकि अन्य कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। इसे याचिकाकर्ताओं ने भेदभाव बताया।

हाईकोर्ट ने मांगे ये जवाब 

हाईकोर्ट ने वित्त विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया है कि वे हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करें कि अखिल भारतीय सेवा और न्यायिक अधिकारियों को किस तारीख तक डीए दिया गया है? क्या इन अधिकारियों का वेतन भी राज्य के समेकित कोष से ही दिया जाता है? 1 जुलाई 2023 से 1 जुलाई 2025 तक का डीए राज्य कर्मचारियों को देय है या नहीं ?

अगली सुनवाई 1 अप्रैल को 

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल 2026 तय की है और कहा है कि तय समय तक हलफनामा दाखिल न होने पर संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देना होगा।
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