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Panchkula News: औद्योगिक क्षेत्र, एमडीसी और बुढ़नपुर में लगेंगे एसटीपी

Sat, 11 Jul 2026 02:26 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2026 02:26 AM IST
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STPs will be set up in the industrial area, MDC, and Budhanpur.
अगस्त से शुरू होगा निर्माण, सीवरेज के गंदे पानी के निस्तारण के लिए तैयार हुई डीपीआर
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सेक्टर-28 और 29 में करीब 55 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगे एसटीपी
एमडीसी-7 और बुढ़नपुर में भी प्लांट लगाने की तैयारी
एनजीटी मानकों के अनुरूप होगा सीवरेज जल का उपचार
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर के औद्योगिक क्षेत्रों और विकसित हो रहे आवासीय इलाकों में सीवरेज समस्या के समाधान के लिए बड़े स्तर पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे। पंचकूला औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 के सेक्टर-28 और सेक्टर-29 के साथ एमडीसी और बुढ़नपुर क्षेत्र में भी एसटीपी लगाने की योजना को गति दी गई है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है और अगस्त से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण (पीएमडीए) की बैठक में इस परियोजना की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार सेक्टर-28 में करीब 30 करोड़ रुपये और सेक्टर-29 में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से एसटीपी स्थापित किए जाएंगे। इन प्लांटों से औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट के निस्तारण में सुविधा होगी और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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एमडीसी और बुढ़नपुर भी योजना में शामिल
योजना के तहत एमडीसी सेक्टर-7 और बुढ़नपुर सेक्टर-16 में भी एसटीपी स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) और पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण के बीच भूमि उपलब्ध कराने को लेकर सहमति बन चुकी है। एमडीसी-7 में करीब डेढ़ एकड़ भूमि चिन्हित की गई है, जबकि बुढ़नपुर में भी भूमि चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
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एनजीटी मानकों के अनुरूप होगा प्रबंधन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के अनुसार बिना उपचारित सीवरेज जल को जलस्रोतों या खुले क्षेत्रों में छोड़ना प्रतिबंधित है। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर में आधुनिक एसटीपी स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि सीवरेज जल का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा सके।


एसटीपी से होंगे कई लाभ
एसटीपी स्थापित होने से नदियों और नालों में प्रदूषण कम होगा, जलस्रोतों का संरक्षण होगा और जलजनित बीमारियों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही उपचारित पानी का उपयोग बागवानी और औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा, जिससे पेयजल स्रोतों पर दबाव भी कम होगा।
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