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दूसरी अग्रिम जमानत के लिए परिस्थितियों में ठोस बदलाव जरूरी: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दूसरी अग्रिम जमानत याचिका को लेकर अहम व्यवस्था दी है। अदालत ने कहा कि पहली याचिका खारिज होने के बाद दूसरी याचिका दाखिल करना गलत नहीं है। हालांकि, राहत पाने के लिए आरोपी को परिस्थितियों में ठोस बदलाव दिखाना होगा।
केवल नया दस्तावेज सामने आने या पुराने तथ्य को नए तरीके से रखने से जमानत नहीं मिल सकती। न्यायमूर्ति सुमीत गोयल ने यह टिप्पणी अमृतसर ग्रामीण के एक मारपीट मामले में की। अदालत ने सकत्तर सिंह और अन्य की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला एफआईआर नंबर 33, दिनांक 1 मार्च 2026 से जुड़ा है। फैसला 10 अगस्त 2026 को सुनाया गया। शिकायतकर्ता दिलबाग सिंह ने 9 फरवरी 2026 को मारपीट का आरोप लगाया था।
मामले की पृष्ठभूमि :
दिलबाग सिंह ने आरोप लगाया था कि सकत्तर सिंह ने रेहड़ी से उसके स्कूटर को टक्कर मारने की कोशिश की। इसके बाद आरोपियों ने दुकान में घुसकर धमकाया और गाली-गलौज की। आरोपियों ने दिलबाग सिंह का पीछा करते हुए बाबा लंगा गुरुद्वारा साहिब तक मारपीट की। उसे डंडों और अन्य हथियारों से कई चोटें आईं और अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। आरोपियों ने खुद को झूठा फंसाने और शिकायत दर्ज कराने में 20 दिन की देरी की दलील दी, जिसे हाईकोर्ट ने नहीं माना।
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केवल नया दस्तावेज सामने आने या पुराने तथ्य को नए तरीके से रखने से जमानत नहीं मिल सकती। न्यायमूर्ति सुमीत गोयल ने यह टिप्पणी अमृतसर ग्रामीण के एक मारपीट मामले में की। अदालत ने सकत्तर सिंह और अन्य की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला एफआईआर नंबर 33, दिनांक 1 मार्च 2026 से जुड़ा है। फैसला 10 अगस्त 2026 को सुनाया गया। शिकायतकर्ता दिलबाग सिंह ने 9 फरवरी 2026 को मारपीट का आरोप लगाया था।
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मामले की पृष्ठभूमि :
दिलबाग सिंह ने आरोप लगाया था कि सकत्तर सिंह ने रेहड़ी से उसके स्कूटर को टक्कर मारने की कोशिश की। इसके बाद आरोपियों ने दुकान में घुसकर धमकाया और गाली-गलौज की। आरोपियों ने दिलबाग सिंह का पीछा करते हुए बाबा लंगा गुरुद्वारा साहिब तक मारपीट की। उसे डंडों और अन्य हथियारों से कई चोटें आईं और अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। आरोपियों ने खुद को झूठा फंसाने और शिकायत दर्ज कराने में 20 दिन की देरी की दलील दी, जिसे हाईकोर्ट ने नहीं माना।
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