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Panchkula News: सेकेंड हैंड कार विवाद में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला, डीलर-कंपनी पर जुर्माना
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बिना वैध दस्तावेज बेची कार, 3 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश; मानसिक कष्ट व खर्च भी देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेकेंड हैंड कार खरीद से जुड़े एक मामले में उपभोक्ता फोरम पंचकूला ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डीलर और संबंधित कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है। फोरम ने 3 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने के साथ मानसिक कष्ट और मुकदमे का खर्च भी देने के आदेश दिए हैं।
मामला सेक्टर-10 निवासी सपना वासुदेवा का है, जिन्होंने वर्ष 2023 में 3 लाख रुपये में फोर्ड इकोस्पोर्ट कार खरीदी थी। यह वाहन महिंद्रा फर्स्ट चॉइस के अधिकृत डीलर, मनिमाजरा स्थित बीएफसी ऑटोमोटिव (क्वालिटी कार्स) से लिया गया था।
शिकायत के अनुसार खरीद के समय उन्हें मूल आरसी और बीमा दस्तावेज नहीं दिए गए, बल्कि फोटोकॉपी देकर जल्द ट्रांसफर का आश्वासन दिया गया। एक वर्ष बीतने के बावजूद न तो आरसी ट्रांसफर हुई और न ही बीमा अपडेट किया गया, जिससे वाहन का उपयोग नहीं हो सका।
कई बार संपर्क करने के बावजूद समाधान न मिलने पर मामला उपभोक्ता फोरम पहुंचा। सुनवाई के दौरान डीलर ने मूल मालिक की अनुपस्थिति का हवाला दिया, जबकि कंपनी ने खुद को जिम्मेदारी से अलग बताया।
फोरम ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि बिना वैध दस्तावेज वाहन बेचना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है। साथ ही स्पष्ट किया कि कंपनी अपने अधिकृत डीलर की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
फोरम ने आदेश दिया कि डीलर और कंपनी मिलकर 3 लाख रुपये पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित राशि लौटाएं। इसके अलावा 25 हजार रुपये मानसिक कष्ट और 5500 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने होंगे। साथ ही वाहन को शिकायतकर्ता के घर से उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेकेंड हैंड कार खरीद से जुड़े एक मामले में उपभोक्ता फोरम पंचकूला ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डीलर और संबंधित कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है। फोरम ने 3 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने के साथ मानसिक कष्ट और मुकदमे का खर्च भी देने के आदेश दिए हैं।
मामला सेक्टर-10 निवासी सपना वासुदेवा का है, जिन्होंने वर्ष 2023 में 3 लाख रुपये में फोर्ड इकोस्पोर्ट कार खरीदी थी। यह वाहन महिंद्रा फर्स्ट चॉइस के अधिकृत डीलर, मनिमाजरा स्थित बीएफसी ऑटोमोटिव (क्वालिटी कार्स) से लिया गया था।
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शिकायत के अनुसार खरीद के समय उन्हें मूल आरसी और बीमा दस्तावेज नहीं दिए गए, बल्कि फोटोकॉपी देकर जल्द ट्रांसफर का आश्वासन दिया गया। एक वर्ष बीतने के बावजूद न तो आरसी ट्रांसफर हुई और न ही बीमा अपडेट किया गया, जिससे वाहन का उपयोग नहीं हो सका।
कई बार संपर्क करने के बावजूद समाधान न मिलने पर मामला उपभोक्ता फोरम पहुंचा। सुनवाई के दौरान डीलर ने मूल मालिक की अनुपस्थिति का हवाला दिया, जबकि कंपनी ने खुद को जिम्मेदारी से अलग बताया।
फोरम ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि बिना वैध दस्तावेज वाहन बेचना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है। साथ ही स्पष्ट किया कि कंपनी अपने अधिकृत डीलर की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
फोरम ने आदेश दिया कि डीलर और कंपनी मिलकर 3 लाख रुपये पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित राशि लौटाएं। इसके अलावा 25 हजार रुपये मानसिक कष्ट और 5500 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने होंगे। साथ ही वाहन को शिकायतकर्ता के घर से उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।