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Panipat News: फैक्टरी कर्मचारी की हत्या में पत्नी और उसके प्रेमी समेत 4 को उम्रकैद
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हत्या के दोषी। अभियोजन
- फोटो : samvad
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश की अदालत ने बुधवार को भरत नगर निवासी फैक्टरी कर्मचारी अशोक (32) की हत्या में पत्नी सोनू और उसके प्रेमी दीपक समेत चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
चारों पर 13-13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। पांच साल पहले 18 दिसंबर 2021 को बेल्ट से गला घोंटकर की गई इस वारदात में एक अन्य आरोपी और मृतक की भाभी ऊषा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है। इस मामले में अभियोजन की ओर से 28 गवाह पेश किए गए। इनमें सबसे अहम गवाही अशोक के भाई राजू की थी लेकिन वह कोर्ट में पलट गया।
ऐसे में सजा का मुख्य आधार मोबाइल फोन से हत्या के दौरान की गई रिकार्डिंग बनी। यह रिकार्डिंग दीपक ने प्रेमिका सोनू को उसके पति की हत्या हो जाने का यकीन दिलाने के लिए कराई थी। सोनू ने ही दीपक से कहा था कि वह उसके साथ शादी अशोक की हत्या हो जाने के बाद ही करेगी। हत्या घर के पास ही दिल्ली पेरलल नहर के किनारे की गई थी। शव को नहर में फेंक दिया गया था। शातिराना ढंग से की गई वारदात की किसी को कानो कान भनक तक नहीं लगी थी लेकिन पांच महीने बाद दीपक एक गलती कर बैठा जिसने रहस्य से पर्दा उठा दिया। वह 13 जनवरी 20222 को शराब के नशे में धुत होकर सोनू के पास पहुंचा।
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इस दौरान दोनों में झगड़ा हुआ तो दीपक ने चिल्लाकर हत्या की बात करने लगा। इसके तीन दिन बाद 16 जनवरी को सोनू ने खुद के फंसने के डर से पुराना औद्योगिक थाने में पति की हत्या की प्राथमिकी दर्ज करा दी। उसे लगा कि पति की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने से वह कानून के शिकंजे में आने से बच जाएगी। उसने यह भी बता दिया कि दीपक ने उसे हत्या के दौरान की रिकार्डिंग दिखाई थी।
जांच के दौरान ऊषा को हत्या की साजिश में शामिल बताया गया था। पुलिस ने पांचों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया लेकिन ऊषा के खिलाफ साजिश में शामिल होने का कोई साक्ष्य कोर्ट के सामने नहीं रखा गया।
दांत से हुई थी कर्मचारी के शव की पहचान
पुलिस को नहर से शव के अवशेष से मिले थे। इनसे पहचान करना मुश्किल था। ऐसे में डीएनए परीक्षण का फैसला लिया गया। अवशेष में दांत से डीएनए का नमूना लिया गया। इसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। राजू के डीएनए के साथ इसका मिलान हुआ। इस आधार पर शव अशोक का पाया गया। पुलिस ने हत्या, अपहरण और हत्या की साजिश की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। कोर्ट ने चारों दोषियों को तीनों जुर्म की धाराओं में सजा सुनाई है।
प्रेमिका से शादी के लिए घोंटा था दोस्त का गला
पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, अशोक और सोनू की शादी 2016 में हुई थी। अशोक और दीपक में गहरी दोस्ती थी। दोनों एक ही फैक्टरी में काम करते थे। दोनों का एक-दूसरे के घर आना-जाना था। इसी में दीपक और सोनू नजदीदियां बनीं। अशोक की गैर मौजूदगी में दोनों एक-दूसरे से मिलने लगे और शादी करने तक का इरादा कर लिया। शादी करने के लिए ही साजिश रचकर अशोक की जान ले ली। इस मामले में बरी की गई ऊषा सोनू की बहन है। दोनों बहनों की शादी एक ही घर में दो भाइयों यानी राजू और अशोक के साथ हुई थी।
पूछताछ में खुला राज
कोर्ट के 51 पेज के फैसले के अनुसार, पुलिस ने दीपक को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो राज खुल गया। जींद के सफीदो क्षेत्र के करसिंद गांव निवासी दीपक ने बताया कि उसने सोनू के कहने पर अपने दोस्त मतलोडा के जोशी गांव निवासी अजीत और सोमवीर के साथ मिलकर हत्या की थी। उसने और अजीत ने दीपक का गला घोंटा था। सोमवीर ने मोबाइल से रिकार्डिंग की थी। पुलिस ने सोमवीर के मोबाइल बरामद किया। इसमें रिकार्डिंग मिल गई। नहर से शव के अवशेष बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने दीपक, सोमवीर, अजीत और सोनू को गिरफ्तार कर लिया।
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पानीपत। अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश की अदालत ने बुधवार को भरत नगर निवासी फैक्टरी कर्मचारी अशोक (32) की हत्या में पत्नी सोनू और उसके प्रेमी दीपक समेत चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
चारों पर 13-13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। पांच साल पहले 18 दिसंबर 2021 को बेल्ट से गला घोंटकर की गई इस वारदात में एक अन्य आरोपी और मृतक की भाभी ऊषा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है। इस मामले में अभियोजन की ओर से 28 गवाह पेश किए गए। इनमें सबसे अहम गवाही अशोक के भाई राजू की थी लेकिन वह कोर्ट में पलट गया।
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ऐसे में सजा का मुख्य आधार मोबाइल फोन से हत्या के दौरान की गई रिकार्डिंग बनी। यह रिकार्डिंग दीपक ने प्रेमिका सोनू को उसके पति की हत्या हो जाने का यकीन दिलाने के लिए कराई थी। सोनू ने ही दीपक से कहा था कि वह उसके साथ शादी अशोक की हत्या हो जाने के बाद ही करेगी। हत्या घर के पास ही दिल्ली पेरलल नहर के किनारे की गई थी। शव को नहर में फेंक दिया गया था। शातिराना ढंग से की गई वारदात की किसी को कानो कान भनक तक नहीं लगी थी लेकिन पांच महीने बाद दीपक एक गलती कर बैठा जिसने रहस्य से पर्दा उठा दिया। वह 13 जनवरी 20222 को शराब के नशे में धुत होकर सोनू के पास पहुंचा।
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इस दौरान दोनों में झगड़ा हुआ तो दीपक ने चिल्लाकर हत्या की बात करने लगा। इसके तीन दिन बाद 16 जनवरी को सोनू ने खुद के फंसने के डर से पुराना औद्योगिक थाने में पति की हत्या की प्राथमिकी दर्ज करा दी। उसे लगा कि पति की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने से वह कानून के शिकंजे में आने से बच जाएगी। उसने यह भी बता दिया कि दीपक ने उसे हत्या के दौरान की रिकार्डिंग दिखाई थी।
जांच के दौरान ऊषा को हत्या की साजिश में शामिल बताया गया था। पुलिस ने पांचों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया लेकिन ऊषा के खिलाफ साजिश में शामिल होने का कोई साक्ष्य कोर्ट के सामने नहीं रखा गया।
दांत से हुई थी कर्मचारी के शव की पहचान
पुलिस को नहर से शव के अवशेष से मिले थे। इनसे पहचान करना मुश्किल था। ऐसे में डीएनए परीक्षण का फैसला लिया गया। अवशेष में दांत से डीएनए का नमूना लिया गया। इसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। राजू के डीएनए के साथ इसका मिलान हुआ। इस आधार पर शव अशोक का पाया गया। पुलिस ने हत्या, अपहरण और हत्या की साजिश की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। कोर्ट ने चारों दोषियों को तीनों जुर्म की धाराओं में सजा सुनाई है।
प्रेमिका से शादी के लिए घोंटा था दोस्त का गला
पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, अशोक और सोनू की शादी 2016 में हुई थी। अशोक और दीपक में गहरी दोस्ती थी। दोनों एक ही फैक्टरी में काम करते थे। दोनों का एक-दूसरे के घर आना-जाना था। इसी में दीपक और सोनू नजदीदियां बनीं। अशोक की गैर मौजूदगी में दोनों एक-दूसरे से मिलने लगे और शादी करने तक का इरादा कर लिया। शादी करने के लिए ही साजिश रचकर अशोक की जान ले ली। इस मामले में बरी की गई ऊषा सोनू की बहन है। दोनों बहनों की शादी एक ही घर में दो भाइयों यानी राजू और अशोक के साथ हुई थी।
पूछताछ में खुला राज
कोर्ट के 51 पेज के फैसले के अनुसार, पुलिस ने दीपक को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो राज खुल गया। जींद के सफीदो क्षेत्र के करसिंद गांव निवासी दीपक ने बताया कि उसने सोनू के कहने पर अपने दोस्त मतलोडा के जोशी गांव निवासी अजीत और सोमवीर के साथ मिलकर हत्या की थी। उसने और अजीत ने दीपक का गला घोंटा था। सोमवीर ने मोबाइल से रिकार्डिंग की थी। पुलिस ने सोमवीर के मोबाइल बरामद किया। इसमें रिकार्डिंग मिल गई। नहर से शव के अवशेष बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने दीपक, सोमवीर, अजीत और सोनू को गिरफ्तार कर लिया।

हत्या के दोषी। अभियोजन- फोटो : samvad