{"_id":"6a57f839b04ab6dbbd0b8612","slug":"shortage-of-doctors-and-essential-staff-at-the-phc-panipat-news-c-244-1-pnp1001-160662-2026-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: पीएचसी में डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: पीएचसी में डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की कमी
विज्ञापन
जिले सिंह
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीएचसी में डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
पट्टीकल्याणा (समालखा)। समालखा क्षेत्र के पट्टीकल्याणा गांव में बुधवार को अमर उजाला के चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति बताई। पीएचसी में डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की कमी बताई। कहा कि पिछले साल अक्तूबर में जिलाधिकारी के रात्रि ठहराव में उठाई गई समस्याओं का भी समाधान नहीं हो सका है।
चौपाल कार्यक्रम गांव के लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित हुआ। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर आशीष कुमार, स्वास्थ्य निरीक्षक सुनील कुमार और एमपीएचडब्ल्यू अनिल कुमार उपस्थित रहे। ग्राम पंचायत सरपंच मुकेश पहलवान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। चौपाल में गांव की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पीएचसी में डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की भारी कमी है। इस कारण छोटी बीमारियों के लिए भी मरीजों को शहर जाना पड़ता है। सरकारी स्कूलों की हालत भी खराब है। स्कूल का गिराया गया भवन आज तक नहीं बन पाया है।
बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी
ग्रामीणों ने वन विभाग को हर्बल पार्क के लिए दी गई 24 एकड़ जमीन को मुक्त कराने की मांग की। उन्होंने बताया कि गांव में सात साल से चौकीदार नहीं हैं। तीन चौकीदार की भर्ती के लिए प्रशासन को लिखा गया है। इसके लिए चार लोगों ने आवेदन किया है। स्वास्थ्य निरीक्षक सुनील कुमार ने बारिश के मौसम में आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि साफ पानी में डेंगू का लार्वा बढ़ रहा है। एमपीएचडब्ल्यू अनिल ने कूलर और फ्रिज की ट्रे में पानी जमा न होने देने को कहा। उन्होंने सप्ताह में एक बार सफाई को जरूरी बताया।
सरपंच और अधिकारियों का आश्वासन : ग्राम पंचायत सरपंच मुकेश पहलवान ने ग्रामीणों को सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गांव में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। प्रशासन को कई कामों के प्रस्ताव दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों के मूर्त रूप में आने के बाद गांव में विकास होगा। सरपंच ने चौकीदार भर्ती के लिए जल्द ही अधिकारियों से मिलने की बात कही। मेडिकल ऑफिसर आशीष कुमार ने पीएचसी में हर संभव दवा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और जागरूकता
चौपाल कार्यक्रम में करीब 25 ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की गई। उन्हें बेहतर स्वास्थ्य के बारे में जागरूक भी किया गया। मेडिकल ऑफिसर आशीष कुमार ने बताया कि एनसीडी कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के महिला और पुरुष की नियमित जांच की जा रही है। उन्होंने लोगों को हर महीने बीपी और शुगर की जांच कराने की सलाह दी। बच्चों का जन्म के बाद टीकाकरण कराना जरूरी है। किशोरियों का टीकाकरण अभियान भी चल रहा है। लोगों को भ्रांतियों को पीछे छोड़कर इसके लिए आगे आना चाहिए।
गांव की परेशानी ग्रामीणों की जुबानी
कोट्स फोटो
सुभाष ने बताया कि हमारे गांव को समालखा का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक गांव कहा जाता है, लेकिन विकास के मामले में यह बहुत पीछे है। विधायक और प्रशासन से हमारी मांग है कि गांव में सभी विकास कार्यों को बराबर तरीके से करवाया जाए। सबसे पहले गांव में पुलिस सुरक्षा बढ़ाई जाए और सार्वजनिक कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
कोट्स फोटो
जिले सिंह ने बताया कि गांव में गंदगी और जलभराव सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। सड़कों पर गंदा पानी जमा होने के कारण मच्छरों का प्रकोप बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिससे मलेरिया और डेंगू फैलने का खतरा बना रहता है। इस गंदगी और मच्छरों से निजात पाने के लिए तुरंत उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
कोट्स फोटो
राकेश ने बताया कि गांव की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। यहां डॉक्टरों की बहुत कमी है। पीएचसी की व्यवस्था को तुरंत सुधारा जाना चाहिए और डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति होनी चाहिए ताकि ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। इस बारे में कई बार आवाज उठा चुके हैं।
कोट्स फोटो
जय किशन ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में जांच और दवा की भारी किल्लत है। गैर-संचारी रोगों जैसे शुगर और बीपी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सामान्य और दूसरी गंभीर बीमारियों की जांच की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। लोगों को छोटी-मोटी दवा तक नहीं मिल पाती। स्टाफ चिकित्सक के बिना दवा नहीं देते और चिकित्सक मिलते नहीं हैं।
कोट्स फोटो
टेकचंद ने बताया कि गांव में एक सरकारी स्कूल का भवन कंडम घोषित किया गया था। इस भवन को ढाई साल पहले गिरा दिया गया है। अब नया भवन नहीं बनाया जा रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को खुले में बैठकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश होने पर छुट्टी कर दी जाती है। इससे पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
कोट्स फोटो
सतपाल ने बताया कि गांव की करीब 14 एकड़ जमीन करीब 25 साल पहले वन विभाग को हर्बल पार्क बनाने के लिए दी थी। इसकी समय सीमा तीन-चार पहले खत्म हो गई है। अब यह जमीन खाली पड़ी है। इस जमीन पर स्टेडियम और पावर हाउस बनाया जा सकता है। इससे गांव और युवाओं को सुविधा मिलेगी।
कोट्स फोटो
विनोद ने बताया कि गांव में 11 गांवों का सीएचसी है। यहां कोई भी दवा समय पर नहीं मिल पाती है। ग्रामीणों को 10 से 20 रुपये की दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर पर जाना पड़ता है। सीएचसी में सामान्य दवा होनी चाहिए। ग्रामीणों को समालखा दवा लेने जाना पड़ता है। एंबुलेंस की भी व्यवस्था नहीं है। यह गंभीर स्थिति है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पट्टीकल्याणा (समालखा)। समालखा क्षेत्र के पट्टीकल्याणा गांव में बुधवार को अमर उजाला के चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति बताई। पीएचसी में डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की कमी बताई। कहा कि पिछले साल अक्तूबर में जिलाधिकारी के रात्रि ठहराव में उठाई गई समस्याओं का भी समाधान नहीं हो सका है।
चौपाल कार्यक्रम गांव के लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित हुआ। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर आशीष कुमार, स्वास्थ्य निरीक्षक सुनील कुमार और एमपीएचडब्ल्यू अनिल कुमार उपस्थित रहे। ग्राम पंचायत सरपंच मुकेश पहलवान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। चौपाल में गांव की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पीएचसी में डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की भारी कमी है। इस कारण छोटी बीमारियों के लिए भी मरीजों को शहर जाना पड़ता है। सरकारी स्कूलों की हालत भी खराब है। स्कूल का गिराया गया भवन आज तक नहीं बन पाया है।
विज्ञापन
बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी
ग्रामीणों ने वन विभाग को हर्बल पार्क के लिए दी गई 24 एकड़ जमीन को मुक्त कराने की मांग की। उन्होंने बताया कि गांव में सात साल से चौकीदार नहीं हैं। तीन चौकीदार की भर्ती के लिए प्रशासन को लिखा गया है। इसके लिए चार लोगों ने आवेदन किया है। स्वास्थ्य निरीक्षक सुनील कुमार ने बारिश के मौसम में आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि साफ पानी में डेंगू का लार्वा बढ़ रहा है। एमपीएचडब्ल्यू अनिल ने कूलर और फ्रिज की ट्रे में पानी जमा न होने देने को कहा। उन्होंने सप्ताह में एक बार सफाई को जरूरी बताया।
सरपंच और अधिकारियों का आश्वासन : ग्राम पंचायत सरपंच मुकेश पहलवान ने ग्रामीणों को सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गांव में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। प्रशासन को कई कामों के प्रस्ताव दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों के मूर्त रूप में आने के बाद गांव में विकास होगा। सरपंच ने चौकीदार भर्ती के लिए जल्द ही अधिकारियों से मिलने की बात कही। मेडिकल ऑफिसर आशीष कुमार ने पीएचसी में हर संभव दवा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और जागरूकता
चौपाल कार्यक्रम में करीब 25 ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की गई। उन्हें बेहतर स्वास्थ्य के बारे में जागरूक भी किया गया। मेडिकल ऑफिसर आशीष कुमार ने बताया कि एनसीडी कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के महिला और पुरुष की नियमित जांच की जा रही है। उन्होंने लोगों को हर महीने बीपी और शुगर की जांच कराने की सलाह दी। बच्चों का जन्म के बाद टीकाकरण कराना जरूरी है। किशोरियों का टीकाकरण अभियान भी चल रहा है। लोगों को भ्रांतियों को पीछे छोड़कर इसके लिए आगे आना चाहिए।
गांव की परेशानी ग्रामीणों की जुबानी
कोट्स फोटो
सुभाष ने बताया कि हमारे गांव को समालखा का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक गांव कहा जाता है, लेकिन विकास के मामले में यह बहुत पीछे है। विधायक और प्रशासन से हमारी मांग है कि गांव में सभी विकास कार्यों को बराबर तरीके से करवाया जाए। सबसे पहले गांव में पुलिस सुरक्षा बढ़ाई जाए और सार्वजनिक कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
कोट्स फोटो
जिले सिंह ने बताया कि गांव में गंदगी और जलभराव सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। सड़कों पर गंदा पानी जमा होने के कारण मच्छरों का प्रकोप बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिससे मलेरिया और डेंगू फैलने का खतरा बना रहता है। इस गंदगी और मच्छरों से निजात पाने के लिए तुरंत उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
कोट्स फोटो
राकेश ने बताया कि गांव की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। यहां डॉक्टरों की बहुत कमी है। पीएचसी की व्यवस्था को तुरंत सुधारा जाना चाहिए और डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति होनी चाहिए ताकि ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। इस बारे में कई बार आवाज उठा चुके हैं।
कोट्स फोटो
जय किशन ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में जांच और दवा की भारी किल्लत है। गैर-संचारी रोगों जैसे शुगर और बीपी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सामान्य और दूसरी गंभीर बीमारियों की जांच की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। लोगों को छोटी-मोटी दवा तक नहीं मिल पाती। स्टाफ चिकित्सक के बिना दवा नहीं देते और चिकित्सक मिलते नहीं हैं।
कोट्स फोटो
टेकचंद ने बताया कि गांव में एक सरकारी स्कूल का भवन कंडम घोषित किया गया था। इस भवन को ढाई साल पहले गिरा दिया गया है। अब नया भवन नहीं बनाया जा रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को खुले में बैठकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश होने पर छुट्टी कर दी जाती है। इससे पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
कोट्स फोटो
सतपाल ने बताया कि गांव की करीब 14 एकड़ जमीन करीब 25 साल पहले वन विभाग को हर्बल पार्क बनाने के लिए दी थी। इसकी समय सीमा तीन-चार पहले खत्म हो गई है। अब यह जमीन खाली पड़ी है। इस जमीन पर स्टेडियम और पावर हाउस बनाया जा सकता है। इससे गांव और युवाओं को सुविधा मिलेगी।
कोट्स फोटो
विनोद ने बताया कि गांव में 11 गांवों का सीएचसी है। यहां कोई भी दवा समय पर नहीं मिल पाती है। ग्रामीणों को 10 से 20 रुपये की दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर पर जाना पड़ता है। सीएचसी में सामान्य दवा होनी चाहिए। ग्रामीणों को समालखा दवा लेने जाना पड़ता है। एंबुलेंस की भी व्यवस्था नहीं है। यह गंभीर स्थिति है।

जिले सिंह- फोटो : संवाद

जिले सिंह- फोटो : संवाद

जिले सिंह- फोटो : संवाद

जिले सिंह- फोटो : संवाद

जिले सिंह- फोटो : संवाद

जिले सिंह- फोटो : संवाद

जिले सिंह- फोटो : संवाद