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LPG Crisis: गैस की किल्लत से शादी वाले घरों में परेशानी, पकवान हुए कम; कैटरर्स ने मेन्यू पर चलाई कैंची
अभय सिंह, जगाधरी (यमुनानगर)
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Fri, 13 Mar 2026 06:01 AM IST
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सार
कमर्शियल सिलिंडर न मिलने के कारण शादियों में खाना बनाने की किल्लत हो गई है। चूंकि शादियों में एक साथ कई व्यंजन व पकवान बनाए जाते हैं। ऐसे में गैस सिलिंडर की मांग सबसे ज्यादा होती है।
एलपीजी की कमी का शादियों के मेन्यू पर असर
- फोटो : AI
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विस्तार
कमर्शियल सिलिंडर की किल्लत से जिले की तमाम सामाजिक, धार्मिक व व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होने लगी हैं। शादियों के सीजन में यह समस्या परिवार वालों के लिए विकट बन गई है और उनके पास इसका कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है।
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सिलिंडर न मिलने से कैटरर्स व परिवारों को मजबूरन शादी व समारोह का मेन्यु छोटा करना पड़ रहा है। होटल-रेस्टोरेंट व्यवसाय पर भी काले बादल मंडराने लगे हैं। इसके अलावा औद्योगिक व व्यवसायिक गतिविधियां भी डगमगा गई है। बता दें कि इससे शहर के करीब 450 कैटर्स और 200 होटल कारोबारी सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
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कमर्शियल सिलिंडर न मिलने के कारण शादियों में खाना बनाने की किल्लत हो गई है। चूंकि शादियों में एक साथ कई व्यंजन व पकवान बनाए जाते हैं। ऐसे में गैस सिलिंडर की मांग सबसे ज्यादा होती है। इस कारण अब आयोजक परिवार को शादी का मेन्यु छोटा करना पड़ रहा है।
यदि कुछ दिन हालात ऐसे ही रहे तो जल्द ही शादियों सहित अन्य समारोहों से फास्ट फूड, स्नैकस सहित अन्य स्टाल पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। कैटर्स, होटल व रेस्तरां संचालकों ने अभी से लोगों को विभिन्न ऑर्डर के लिए मना करना शुरू कर दिया है। बता दें कि एक छोटे शादी समारोह में 200 लोगों का खाना बनाने में तकरीबन चार सिलिंडर की आवश्यकता होती है। कमर्शियल सिलिंडर बंद होने के कारण अब शादियों में सिलिंडर का उपयोग बंद हो जाएगा। चूंकि घरेलू सिलिंडर का व्यवसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता है।
नहीं कोई अतिरिक्त विकल्प
होटल दावत-ए-प्लाजा के प्रबंधक देवेंद्र सिंह ने बताया कि शादियों व समारोह के लिए पकवान बनाने के लिए उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। इसका अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। समारोह तो दूर इन दिनों होटलों में ठहरने वाले मेहमानों को खाना खिलाने की समस्या खड़ी हो गई है। होटल की रसोई से परोसी जाने वाली लगभग सभी आइटम्स बंद करनी पड़ रही हैं। कारोबार अब केवल दाल-रोटी पर सिमट गया है। चाय और अन्य छोटी आइटम्स के लिए इंडक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है। परंतु यह ठोस विकल्प नहीं है। इससे केवल दो-चार लोगों का बंदोबस्त ही किया जा सकता है।
बंद करनी पड़ रही है रसोई
शहर के जीएम कॉन्टिनेंटल होटल के प्रबंधक रंजन पुरी ने बताया कि उनके यहां गैस सिलिंडर का प्रयोग किया जाता है। परंतु अब कमर्शियल सिलिंडर बंद हो गए हैं। ऐसे में उन्हें होटल की रसोई बंद करनी पड़ेगी। होटल में तंदुर और भट्टी नहीं चलाई जा सकती है। शादी, जन्मदिन सहित अन्य समारोह के लिए लोग आ रहे हैं, लेकिन उनका मेन्यु वे तैयार नहीं करवा सकते हैं। यही नहीं उनके यहां ठहरने वाले मेहमानों की खान-पान की फरमाइश भी वह पूरी नहीं कर सकते हैं। ऐसे में आयोजकों से सिलिंडर साथ लाने की सिफारिश की जा रही है। यदि यही हालात रहे तो उन्हें रसोई बंद करनी पड़ेगी।
होटल दावत-ए-प्लाजा के प्रबंधक देवेंद्र सिंह ने बताया कि शादियों व समारोह के लिए पकवान बनाने के लिए उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। इसका अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। समारोह तो दूर इन दिनों होटलों में ठहरने वाले मेहमानों को खाना खिलाने की समस्या खड़ी हो गई है। होटल की रसोई से परोसी जाने वाली लगभग सभी आइटम्स बंद करनी पड़ रही हैं। कारोबार अब केवल दाल-रोटी पर सिमट गया है। चाय और अन्य छोटी आइटम्स के लिए इंडक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है। परंतु यह ठोस विकल्प नहीं है। इससे केवल दो-चार लोगों का बंदोबस्त ही किया जा सकता है।
बंद करनी पड़ रही है रसोई
शहर के जीएम कॉन्टिनेंटल होटल के प्रबंधक रंजन पुरी ने बताया कि उनके यहां गैस सिलिंडर का प्रयोग किया जाता है। परंतु अब कमर्शियल सिलिंडर बंद हो गए हैं। ऐसे में उन्हें होटल की रसोई बंद करनी पड़ेगी। होटल में तंदुर और भट्टी नहीं चलाई जा सकती है। शादी, जन्मदिन सहित अन्य समारोह के लिए लोग आ रहे हैं, लेकिन उनका मेन्यु वे तैयार नहीं करवा सकते हैं। यही नहीं उनके यहां ठहरने वाले मेहमानों की खान-पान की फरमाइश भी वह पूरी नहीं कर सकते हैं। ऐसे में आयोजकों से सिलिंडर साथ लाने की सिफारिश की जा रही है। यदि यही हालात रहे तो उन्हें रसोई बंद करनी पड़ेगी।
करीब 15 लोगों को कर चुके हैं मना
मोहित कैटर्स के संचालक अजय कुमार ने बतया कि सिलिंडर की किल्लत का बुरा असर पड़ रहा है। शादियों में खाना बनाने के लिए उनके पास लकड़ी और डीजल की भट्टी का विकल्प बचा है। परंतु लकड़ी और डीजल की भट्टी पर सभी आइटम्स नहीं बनाई जा सकती हैं। डोसा, टिक्की-चाट, चाऊमिन, पाव भाजी, मन्चूरियन, स्प्रिंग रोल सहित कई तरह के शाकाहारी व मांसाहारी स्नैकस तुरंत बनाकर देने होते हैं। इन सभी आइटम्स के लिए अलग-अलग सिलिंडर की आवश्यकता होती है। परंतु सिलिंडर की दिक्कत के कारण अब वे लोगों को यह स्टॉल लगाने के लिए मना कर रहे हैं। यही नहीं समारोह में कॉफी के लिए भी सिलिंडर का इस्तेमाल होता है। अभी तक वे ऐसे करीब 15 ऑर्डर छोड़ चुके हैं।
दस प्रतिशत बढ़ गई लकड़ी व कोयले की मांग
कारोबारी प्रदीप कुमार ने बताया कि कमर्शियल सिलिंडर की दिक्कत होने के साथ ही लकड़ी व कोयले की मांग में इजाफा हुआ है। जिले में करीब 10 से 12 प्रतिशत लकड़ी व कोयले की मांग बढ़ गई है। अभी तो इनके दाम स्थिर हैं, लेकिन मांग के अनुसार दाम भी बढ़ने की संभावना है। लकड़ी अलग-अलग किस्म की 10 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम से बिक रही है। वहीं, कोयले की कीमत 30 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम है।
मोहित कैटर्स के संचालक अजय कुमार ने बतया कि सिलिंडर की किल्लत का बुरा असर पड़ रहा है। शादियों में खाना बनाने के लिए उनके पास लकड़ी और डीजल की भट्टी का विकल्प बचा है। परंतु लकड़ी और डीजल की भट्टी पर सभी आइटम्स नहीं बनाई जा सकती हैं। डोसा, टिक्की-चाट, चाऊमिन, पाव भाजी, मन्चूरियन, स्प्रिंग रोल सहित कई तरह के शाकाहारी व मांसाहारी स्नैकस तुरंत बनाकर देने होते हैं। इन सभी आइटम्स के लिए अलग-अलग सिलिंडर की आवश्यकता होती है। परंतु सिलिंडर की दिक्कत के कारण अब वे लोगों को यह स्टॉल लगाने के लिए मना कर रहे हैं। यही नहीं समारोह में कॉफी के लिए भी सिलिंडर का इस्तेमाल होता है। अभी तक वे ऐसे करीब 15 ऑर्डर छोड़ चुके हैं।
दस प्रतिशत बढ़ गई लकड़ी व कोयले की मांग
कारोबारी प्रदीप कुमार ने बताया कि कमर्शियल सिलिंडर की दिक्कत होने के साथ ही लकड़ी व कोयले की मांग में इजाफा हुआ है। जिले में करीब 10 से 12 प्रतिशत लकड़ी व कोयले की मांग बढ़ गई है। अभी तो इनके दाम स्थिर हैं, लेकिन मांग के अनुसार दाम भी बढ़ने की संभावना है। लकड़ी अलग-अलग किस्म की 10 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम से बिक रही है। वहीं, कोयले की कीमत 30 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम है।