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Panipat News: नौल्था की बेटी काफी कबड्डी में बना रही पहचान, 27 पदक जीते
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काफी। स्वयं
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पानीपत। नौल्था गांव की 23 वर्षीय बेटी काफी आज कबड्डी के मैदान में अपनी मेहनत, लगन और जज्बे के दम पर नई पहचान बना रही हैं। साधारण परिवार से निकलकर काफी ने जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर 27 पदक जीते हैं, इनमें जिला स्तर पर अब तक 15 स्वर्ण पदक और राज्य स्तर पर 10 स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं।
उन्होंने वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर पहली बार राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। हाल ही में 27 से 30 जनवरी तक तेलंगाना में आयोजित वरिष्ठ राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया है।
काफी के पिता महक सिंह खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और मां नीलम गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने कभी बेटी के सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने हर मोड़ पर काफी का हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए पूरा सहयोग कर रहे हैं। काफी एमए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। काफी पिछले नौ वर्षों से अपने ही गांव नौल्था में कोच वीरेंद्र जागलान से कबड्डी के गुर सीख रही हैं। कोच वीरेंद्र जागलान ने बताया कि कठिन अभ्यास, नियमित ट्रेनिंग और अनुशासित जीवनशैली ही उनकी सफलता का मूल मंत्र है। अगर उन्हें बेहतर सुविधाएं और आर्थिक सहयोग मिले तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
काफी ने बताया कि उनका सपना एशियाड खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतना है। उनका उद्देश्य सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि गांव और जिले की अन्य बेटियों को भी खेलों के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि माता-पिता और कोच के सहयोग से ही वह यहां तक पहुंच पाई हैं।
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उन्होंने वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर पहली बार राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। हाल ही में 27 से 30 जनवरी तक तेलंगाना में आयोजित वरिष्ठ राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया है।
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काफी के पिता महक सिंह खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और मां नीलम गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने कभी बेटी के सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने हर मोड़ पर काफी का हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए पूरा सहयोग कर रहे हैं। काफी एमए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। काफी पिछले नौ वर्षों से अपने ही गांव नौल्था में कोच वीरेंद्र जागलान से कबड्डी के गुर सीख रही हैं। कोच वीरेंद्र जागलान ने बताया कि कठिन अभ्यास, नियमित ट्रेनिंग और अनुशासित जीवनशैली ही उनकी सफलता का मूल मंत्र है। अगर उन्हें बेहतर सुविधाएं और आर्थिक सहयोग मिले तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
काफी ने बताया कि उनका सपना एशियाड खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतना है। उनका उद्देश्य सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि गांव और जिले की अन्य बेटियों को भी खेलों के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि माता-पिता और कोच के सहयोग से ही वह यहां तक पहुंच पाई हैं।
