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Panipat News: जनसंख्या असंतुलन राष्ट्रीय संकट, देश में लागू हो समान नागरिक संहिता

Mon, 27 Jul 2026 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Mon, 27 Jul 2026 01:29 AM IST
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Population imbalance is a national crisis; a Uniform Civil Code should be implemented in the country.
समालखा (पानीपत)। राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधिमंडल की तीन दिवसीय बैठक रविवार को संपन्न हो गई। इसमें देश में बढ़ते जनसंख्या असंतुलन को राष्ट्रीय संकट करार दिया गया। समालखा के पट्टीकल्याणा स्थित माधव सृष्टि केंद्र में आयोजित बैठक में दो बड़े प्रस्ताव पारित हुए। समिति ने कहा कि भारत में बढ़ता जनसांख्यिकी असंतुलन न केवल देश की सांस्कृतिक पहचान को समाप्त कर रहा है, अपितु इसके अस्तित्व के लिए भी गंभीर संकट निर्माण कर रहा है। देश में समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए।
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प्रस्ताव में प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति के आंकड़ों का हवाला दिया और बताया कि 1951 में देश में हिंदुओं की जनसंख्या का हिस्सा 84.68 प्रतिशत था, जो 2015 तक घटकर 78.06 प्रतिशत रह गया है। वहीं दूसरी ओर, मुस्लिम जनसंख्या 1950 में 9.84 प्रतिशत से बढ़कर 2015 तक 14.09 प्रतिशत हो चुकी है। समिति ने साफ कहा कि कश्मीर घाटी, बंगाल, बिहार, केरल और असम के कुछ जिले में हिंदू आबादी कम हुई है। यहां सांप्रदायिक सौहार्द पूरी तरह समाप्त हो चुका है। यह असंतुलन पहले भी 1947 में भारत के विभाजन का कारण बन चुका है।
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अवैध घुसपैठ व लव जिहाद गंभीर चुनौती
प्रमुख संचालिका शांताकुमारी और प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री ने बताया कि देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ जनसांख्यिकी असंतुलन का एक बड़ा कारण है। इससे स्थानीय नागरिकों के रोजगार, भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हजारिका आयोग का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी गई कि असम व पूर्वोत्तर में बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण वहां के मूल नागरिक 2047 तक अल्पसंख्यक बन जाएंगे। इसके अलावा, ईसाई व मुस्लिम धर्मांतरण और लव जिहाद को भी अनुपात बदलने का प्रमुख कारण माना गया है।
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आधुनिक जीवनशैली और डिंक संस्कृति से बढ़ता खतरा

समिति ने हिंदू समाज की आंतरिक कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि आज उच्च शिक्षित युवा परिवार संस्था की उपेक्षा कर रहे हैं। देर से विवाह करना, संतानोत्पत्ति से बचना, एक ही संतान पैदा करना और डिंक (डबल इनकम नो किड्स) जैसी जीवनशैली के कारण हिंदू आबादी तेजी से घट रही है। आगामी 50 वर्षों में वर्तमान युवा आबादी वृद्धावस्था में पहुंचेगी और यदि नई पीढ़ी नहीं होगी तो समाज व्यवस्था में भारी बिखराव आएगा।

समान नागरिक संहिता व सख्त कानून की मांग

राष्ट्र सेविका समिति ने केंद्र व राज्य सरकारों से अनुरोध किया है कि धर्मांतरण, लव जिहाद और अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए अविलंब सख्त कानून बनाए जाएं। साथ ही संपूर्ण देश में सभी समाजों के लिए समान राष्ट्रीय जनसंख्या नीति और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को तत्काल लागू किया जाएं। समिति ने समाज का आह्वान किया कि युवा सही समय पर विवाह, संतान उत्पत्ति और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर देश को इस संकट से बचाएं।
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