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1986 के बाद सबसे बड़ा बदलाव: अमेरिका में H-1बी वीजा होल्डर्स वाला बिल पेश, भारतीयों को कैसे मिलेगा फायदा?

Tue, 28 Jul 2026 11:45 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस,वाशिंगटन।
आईएएनएस,वाशिंगटन। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 28 Jul 2026 11:45 AM IST
सार

अमेरिकी सीनेटर में एक ऐसा विधेयक पेश किया है, जिससे सात साल से अमेरिका में रह रहे पात्र अप्रवासियों को ग्रीन कार्ड का रास्ता मिल सकता है। जिनमें एच-1बी वीजा धारक भी शामिल हैं। प्रस्ताव से 80 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर भी शामिल हैं।

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Biggest change since 1986: Bill regarding H-1B visa holders introduced in the US how will Indians benefit?
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इमिग्रेशन कानून को और सख्त कर रहे हैं। इस बीच एक वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सीनेटर ने लाखों लंबे समय से अमेरिका में रह रहे लोगों को स्थायी रेजिडेंसी का रास्ता देने की कोशिश फिर से शुरू की है। इन लोगों में एच-1बी वीजा होल्डर्स भी शामिल हैं। 

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सीनेटर एलेक्स पैडिला ने क्या कहा? 
कैलिफोर्निया के सीनेटर एलेक्स पडिला ने कहा कि उनका प्रस्ताव एक इमिग्रेशन नियम को मॉडर्नाइज करेगा जिसे 1986 से अपडेट नहीं किया गया है। उनके ऑफिस से जारी जानकारी के अनुसार, इससे आठ मिलियन से ज्यादा लोगों को फायदा हो सकता है।

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इमिग्रेशन एक्ट के नियम क्या?
बता दें, 1929 के इमिग्रेशन एक्ट के रिन्यूइंग इमिग्रेशन नियम अप्रवासी को कानूनी स्थायी रेजिडेंट स्टेटस के लिए अप्लाई करने की इजाजत देंगे। इसके लिए शर्त ये है कि आवेदन करने से पहले आवेदक कम से कम सात साल तक लगातार अमेरिका में रहे हों। इसके अलावा, आवेदक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं होना चाहिए और उन्हें ग्रीन कार्ड पात्रता की बाकी सभी मौजूदा जरूरतें पूरी करनी होंगी।

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यह प्रस्ताव ड्रीमर्स (बचपन में अमेरिका लाए गए अप्रवासी), अस्थायी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) धारकों, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और लंबे समय से वीजा पर रह रहे लोगों के बच्चों को कवर करेगा। यह उन उच्च-कुशल पेशेवरों के लिए भी राहत का रास्ता खोल सकता है, जिनमें एच-1बी वीजा धारक शामिल हैं और जो वर्षों से रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।


भारत को मिलेगा लाभ?
इस प्रस्ताव का भारतीय पेशेवरों के लिए विशेष महत्व हो सकता है। एच-1बी वीजा धारकों में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी है और रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड पर लागू देशवार सीमा (कंट्री कैप) के कारण उन्हें स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए अक्सर कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।

 क्या ट्रंप प्रशासन ने अप्रवासियों के साथ कठोर व्यवहार किया? 
पडिला ने कहा, 'एक साल पहले मैंने यह विधेयक ट्रंप प्रशासन द्वारा मेहनती अप्रवासियों के साथ किए जा रहे कठोर व्यवहार का विरोध करने के लिए पेश किया था।' उन्होंने कहा, 'तब से राष्ट्रपति ट्रंप के डर और दहशत फैलाने वाले अभियान में और तेजी आई है। जिन परिवारों ने इस देश में अपनी जिंदगी बसाई है, वे भी लगातार अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं।'

गृह सुरक्षा सचिव को क्या अधिकार है? 
यह विधेयक इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट की धारा 249, में संशोधन करेगा। जिसे 'रजिस्ट्री' के नाम से जाना जाता है। इस प्रावधान के तहत गृह सुरक्षा सचिव को यह अधिकार है कि वह निर्धारित तारीख से अमेरिका में रह रहे और अन्य पात्रता शर्तें पूरी करने वाले कुछ लोगों को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) दे सकें।

अभी पात्रता कटऑफ 1 जनवरी, 1972 है। पैडिला का कानून उस तय तारीख को सात साल की रोलिंग जरूरत से बदल देगा। यह बदलाव लागू होने के 60 दिन बाद लागू होगा। सीनेट डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन इस कदम को को-लीड कर रहे हैं। 14 दूसरे सीनेटरों ने को-स्पॉन्सर के तौर पर साइन किए हैं। कैलिफोर्निया की प्रतिनिधि जो लोफग्रेन हाउस में साथी कानून को लीड कर रही हैं।

अखिरी बार कब हुआ था संशोधन?
अमेरिकी कांग्रेस ने 1929 में पहली बार 'रजिस्ट्री' प्रावधान लागू किया था और अब तक इसमें चार बार संशोधन किया जा चुका है। इसका सबसे हालिया संशोधन 1986 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के कार्यकाल के दौरान हुआ था।



इमिग्रेशन पर गहरे पार्टी मतभेदों के बीच कांग्रेस में इस प्रस्ताव का रास्ता पक्का नहीं है। सीनेट ज्यूडिशियरी इमिग्रेशन सबकमेटी में रैंकिंग डेमोक्रेट पैडिला ने ऐसे उपाय भी पेश किए हैं जिनमें जरूरी इमिग्रेंट वर्कर और वर्क-वीजा होल्डर के डिपेंडेंट के तौर पर कानूनी तौर पर अमेरिका लाए गए बच्चे शामिल हैं।
 


 

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