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PoJK Protest: रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी, एक की मौत, मुजफ्फराबाद मार्च के बीच क्यों भड़की हिंसा?

Mon, 27 Jul 2026 10:39 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फराबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फराबाद Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 27 Jul 2026 10:39 PM IST
सार

PoJK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में प्रदर्शनकारियों ने रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध गोलीबारी का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए हैं। यह घटना उस समय हुई, जब हजारों लोग मुजफ्फराबाद की ओर मार्च शुरू कर चुके थे। आखिर बातचीत क्यों विफल हुई और आंदोलन इतना उग्र कैसे हो गया? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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PoJK Protest: Violence Erupts During Muzaffarabad March as Protesters Allege Firing in Rawalakot
प्रदर्शनकारियों ने क्या आरोप लगाए? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे आंदोलन के बीच सोमवार को हालात और तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि रावलकोट में विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलीबारी की। इन घटनाओं में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। यह घटना उस समय हुई, जब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) और प्रशासन के बीच बातचीत विफल होने के बाद हजारों लोग मुजफ्फराबाद की ओर मार्च के लिए निकल पड़े। प्रदर्शनकारी पिछले 52 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं और गिरफ्तार लोगों की रिहाई, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने तथा अपनी अन्य मांगों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।

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रिपोर्ट के अनुसार, जेएएसी ने 27 जुलाई को दोपहर 1 बजे तक प्रशासन को अपनी मांगें स्वीकार करने और आधिकारिक अधिसूचना जारी करने का समय दिया था। समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो हजारों लोग रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक मार्च करेंगे। तय समय तक कोई सहमति नहीं बनने के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और मार्च शुरू कर दिया। इसी दौरान रावलकोट में हालात बिगड़ने और गोलीबारी के आरोप सामने आए।

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रावलकोट में प्रदर्शनकारियों ने क्या आरोप लगाए?

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अकील भाई, जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने घटना को अपनी आंखों से देखा, ने कहा कि रावलकोट में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। उन्होंने वीडियो संदेश में कहा कि इलाके में मृतकों और घायलों की संख्या इतनी अधिक है कि प्रदर्शनकारी और राहतकर्मी दोनों दबाव में हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने किसी तरह अपनी जान बचाई। अकील भाई ने कहा कि उन्होंने अपने सामने कई लोगों को मरते देखा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दुनिया से अपील की कि वे इस मामले पर ध्यान दें। उन्होंने यह भी दावा किया कि एम्बुलेंस और अन्य वाहनों की कमी पड़ गई है तथा लोग अपने घायल साथियों को खुद उठाकर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, सड़कें खून से भर गई हैं।

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प्रदर्शनकारियों ने सरकार और सुरक्षा बलों पर क्या आरोप लगाए?

अकील भाई ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और लंबे समय से आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 5 जून से लगातार लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के टैक्स के पैसे से खरीदी गई गोलियों का इस्तेमाल उन्हीं के खिलाफ किया गया। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि घटना में कम से कम 15 से 20 लोगों को गोली लगी है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी और किसी आधिकारिक एजेंसी की ओर से हताहतों की संख्या जारी नहीं की गई थी।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की गई?

अकील भाई ने अपने वीडियो संदेश में अंतरराष्ट्रीय मीडिया, मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने दावा किया कि कई प्रदर्शनकारी मारे गए या घायल हुए हैं और स्थानीय संसाधन लगातार कम पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए पर्याप्त एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने और प्रदर्शनकारियों की आवाज दुनिया तक पहुंचाने की अपील की।

चुनाव और आंदोलन पर क्या असर पड़ा?

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब पीओजेके के मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान का पहला चरण चल रहा था। वहीं कोटली से हिंसा और चुनाव में धांधली के आरोप भी सामने आए। लंबे समय से जारी हड़ताल और प्रदर्शनों के कारण राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सार्वजनिक सभाएं, रैलियां और घर-घर संपर्क अभियान प्रभावित हुए। साथ ही, सुधनोती और रावलकोट जिलों में विधानसभा चुनाव 10 अगस्त तक स्थगित कर दिए गए हैं। आंदोलन के कारण पूरे क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।

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