{"_id":"6a6776a94053b515260291ec","slug":"report-says-research-confirms-active-tectonic-fault-under-chinas-dam-project-on-brahmaputra-2026-07-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Report: ब्रह्मपुत्र पर चीन के मेदोग बांध परियोजना को लेकर बड़ा खुलासा, भारत समेत कई देशों के लिए कितना खतरनाक?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Report: ब्रह्मपुत्र पर चीन के मेदोग बांध परियोजना को लेकर बड़ा खुलासा, भारत समेत कई देशों के लिए कितना खतरनाक?
Mon, 27 Jul 2026 09:16 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 27 Jul 2026 09:16 PM IST
सार
China Brahmaputra Dam:चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बना रहा है। अब एक नए अध्ययन में पुष्टि हुई है कि इस परियोजना मेंकुछ गड़बड़ है। इसीलिए यहां भूकंपीय गतिविधियां भी जारी हैं। क्या यह खुलासा भारत समेत निचले हिस्से में बसे देशों की चिंताओं को और बढ़ा देगा? आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...
विज्ञापन
भारत की सीमा के पास चीन क्या कर रहा?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चीन की ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रही मेदोग जलविद्युत परियोजना को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस परियोजना के नीचे एक सक्रिय टेक्टोनिक फॉल्ट मौजूद है। इस खुलासे के बाद अब चर्चा इस बात पर तेज हो गई है कि दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना केवल एक इंजीनियरिंग चुनौती नहीं है, बल्कि इससे जुड़े भूवैज्ञानिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक जोखिमों का आकलन कितना मजबूत है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब सवाल यह नहीं है कि चीन इतना बड़ा बांध बना सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या उसने इन जोखिमों का पर्याप्त मूल्यांकन किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत लंबे समय से कहता रहा है कि यारलुंग त्सांगपो, यानी ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से पर चीन की यह परियोजना केवल विकास का मामला नहीं, बल्कि पर्यावरण और रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है। चीन लगातार इन चिंताओं को खारिज करता रहा और कहता रहा कि परियोजना पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई है तथा इससे निचले हिस्से के देशों को कोई बड़ा खतरा नहीं होगा। लेकिन अब चीन के ही वैज्ञानिकों के अध्ययन ने इन आशंकाओं को नई मजबूती दी है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Iran-US Talks: ट्रंप के किस दावे को ईरान ने किया खारिज? बोला- वार्ता की भीख मांगना हमारे डीएनए में नहीं
विज्ञापन
रिपोर्ट के अनुसार, भारत लंबे समय से कहता रहा है कि यारलुंग त्सांगपो, यानी ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से पर चीन की यह परियोजना केवल विकास का मामला नहीं, बल्कि पर्यावरण और रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है। चीन लगातार इन चिंताओं को खारिज करता रहा और कहता रहा कि परियोजना पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई है तथा इससे निचले हिस्से के देशों को कोई बड़ा खतरा नहीं होगा। लेकिन अब चीन के ही वैज्ञानिकों के अध्ययन ने इन आशंकाओं को नई मजबूती दी है।
विज्ञापन
क्या अध्ययन में सक्रिय फॉल्ट की पुष्टि हुई?
रिपोर्ट में चेंगदू यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और चाइना जियोलॉजिकल सर्वे के शोध का हवाला दिया गया है। इस अध्ययन में पुष्टि की गई है कि सक्रिय टेक्टोनिक फॉल्ट 'पाइझेन फॉल्ट' सीधे मेदोग जलविद्युत परियोजना के नीचे से गुजरता है। भूवैज्ञानिकों ने बताया कि इस इलाके की चट्टानें ढीली हैं, उनका आपसी जुड़ाव कमजोर है और लंबे समय तक पानी के दबाव तथा लगातार टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण यहां ढलानों के खिसकने का खतरा बना रह सकता है। अध्ययन में यह भी कहा गया कि यह फॉल्ट प्लाइस्टोसीन काल से सक्रिय है और आज भी भूकंपीय गतिविधियां पैदा करता है। वर्ष 2017 में इसी फॉल्ट के उत्तरी हिस्से में 6.9 तीव्रता का भूकंप भी आया था।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Iran-US Talks: ट्रंप के किस दावे को ईरान ने किया खारिज? बोला- वार्ता की भीख मांगना हमारे डीएनए में नहीं