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Panipat News: होर्मूज में फंसा टेक्सटाइल का सामान, उद्यमियों की बढ़ीं धड़कनें
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जगमहेंद्र सरोहापानीपत। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग पर दिखाई देने लगा है। होर्मूज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्गों पर बढ़ी बाधाओं के कारण पानीपत से भेजा गया करोड़ों रुपये का टेक्सटाइल निर्यात प्रभावित हो रहा है। जहाजों की
आवाजाही में रुकावट, बढ़ते माल भाड़े और महंगी बीमा दरों ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी है।
हाल में माल भाड़े और करों में मिली राहत के बाद विदेशी खरीदारों से नए ऑर्डर मिलने शुरू हुए थे, जिससे उद्योग को कुछ राहत मिली थी लेकिन पश्चिम एशिया के हालात बिगड़ने के बाद निर्यात की रफ्तार फिर धीमी पड़ गई है।
पानीपत से मुख्य रूप से कॉरपेट, कंबल और मिंक कंबल का बड़े स्तर पर निर्यात किया जाता है। आगामी सर्दी के सीजन के लिए इन्हीं दिनों में बड़ी संख्या में आपूर्ति ऑर्डर मिलते हैं, लेकिन सप्लाई चेन प्रभावित होने से अब ऑर्डर रद्द होने और भुगतान अटकने का खतरा बढ़ गया है।
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होर्मूज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कई कंटेनर रास्ते में अटक गए हैं। रूट में अनिश्चितता के कारण शिपिंग कंपनियों ने जोखिम का हवाला देते हुए माल भाड़ा और बीमा दरों में बढ़ोतरी कर दी है। समय पर माल नहीं पहुंचने से भुगतान में देरी हो रही है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमियों पर नकदी का दबाव बढ़ गया है।
हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने बताया कि पश्चिम एशिया के देशों में इस समय कंबल और मिंक कंबल के ऑर्डर का सीजन रहता है। उद्यमी पूरे साल की आपूर्ति के लिए इन्हीं महीनों में तैयारी करते हैं, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं। ऑर्डर प्रभावित हुए हैं और मौजूदा ऑर्डर समय पर पूरा करना भी चुनौती बन गया है।
उद्यमी गुलशन मल्होत्रा ने बताया कि राहत मिलने के बाद उद्योग में उम्मीद जगी थी, लेकिन होर्मूज संकट ने फिर परेशानी बढ़ा दी है। समुद्री मार्ग में माल फंसा हुआ है। यदि यह गतिरोध लंबे समय तक जारी रहा तो मिंक कंबल और कारपेट उद्योग को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात का सीधा असर निर्यात पर पड़ा है। जहाजों का किराया बढ़ने और समय पर माल न पहुंचने से वित्तीय संकट गहरा गया है। इसमें सरकार के स्तर पर कूटनीतिक पहल कर उद्यमियों को इस संकट से निकालना चाहिए। - विनोद धमीजा, प्रधान, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स, पानीपत।
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आवाजाही में रुकावट, बढ़ते माल भाड़े और महंगी बीमा दरों ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी है।
हाल में माल भाड़े और करों में मिली राहत के बाद विदेशी खरीदारों से नए ऑर्डर मिलने शुरू हुए थे, जिससे उद्योग को कुछ राहत मिली थी लेकिन पश्चिम एशिया के हालात बिगड़ने के बाद निर्यात की रफ्तार फिर धीमी पड़ गई है।
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पानीपत से मुख्य रूप से कॉरपेट, कंबल और मिंक कंबल का बड़े स्तर पर निर्यात किया जाता है। आगामी सर्दी के सीजन के लिए इन्हीं दिनों में बड़ी संख्या में आपूर्ति ऑर्डर मिलते हैं, लेकिन सप्लाई चेन प्रभावित होने से अब ऑर्डर रद्द होने और भुगतान अटकने का खतरा बढ़ गया है।
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होर्मूज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कई कंटेनर रास्ते में अटक गए हैं। रूट में अनिश्चितता के कारण शिपिंग कंपनियों ने जोखिम का हवाला देते हुए माल भाड़ा और बीमा दरों में बढ़ोतरी कर दी है। समय पर माल नहीं पहुंचने से भुगतान में देरी हो रही है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमियों पर नकदी का दबाव बढ़ गया है।
हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने बताया कि पश्चिम एशिया के देशों में इस समय कंबल और मिंक कंबल के ऑर्डर का सीजन रहता है। उद्यमी पूरे साल की आपूर्ति के लिए इन्हीं महीनों में तैयारी करते हैं, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं। ऑर्डर प्रभावित हुए हैं और मौजूदा ऑर्डर समय पर पूरा करना भी चुनौती बन गया है।
उद्यमी गुलशन मल्होत्रा ने बताया कि राहत मिलने के बाद उद्योग में उम्मीद जगी थी, लेकिन होर्मूज संकट ने फिर परेशानी बढ़ा दी है। समुद्री मार्ग में माल फंसा हुआ है। यदि यह गतिरोध लंबे समय तक जारी रहा तो मिंक कंबल और कारपेट उद्योग को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात का सीधा असर निर्यात पर पड़ा है। जहाजों का किराया बढ़ने और समय पर माल न पहुंचने से वित्तीय संकट गहरा गया है। इसमें सरकार के स्तर पर कूटनीतिक पहल कर उद्यमियों को इस संकट से निकालना चाहिए। - विनोद धमीजा, प्रधान, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स, पानीपत।