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Panipat News: पालिका बाजार की दुकानों को खाली करने पर अदालत ने लगाई रोक
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पानीपत। जीटी रोड पर स्थित पालिका बाजार के दुकानदारों को अदालत से राहत मिली है। अदालत ने दुकानों को खाली करने के नोटिस के मामले में सुनवाई करते हुए फिलहाल प्रक्रिया पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि जब तक नगर निगम की ओर से पुनर्वास या पुनः आवंटन की स्पष्ट योजना नहीं बनाई जाती, तब तक दुकानदार को जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता।
जीटी रोड पर पालिका बाजार भवन को नगर निगम द्वारा जर्जर घोषित कर दिया गया था। इसके बाद नगर निगम ने बाजार के सभी दुकानदारों को दुकान खाली करने का नोटिस जारी किया था। दुकानदार दिनेश ने नगर निगम के नोटिस को अदालत में चुनौती दी थी। वादी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि दुकान नंबर-9, ग्राउंड फ्लोर, पालिका बाजार वर्ष 2011 की रजिस्टर्ड लीज डीड के आधार पर ली गई थी। लीज की शर्तों के अनुसार किरायेदार को केवल किराया न देने की स्थिति में ही हटाया जा सकता है। नगर निगम ने 7 नवंबर 2025 और 29 जनवरी 2026 को नोटिस जारी कर भवन को जर्जर बताते हुए दुकान खाली करने के निर्देश दिए थे। वादी का कहना है कि उनकी दुकान सुरक्षित है और मरम्मत की जरूरत ऊपरी मंजिलों को है।
नगर निगम की ओर से कहा गया कि 2023 में भवन को कंडम घोषित किया गया था और पूरे पालिका बाजार के भवन को दोबारा बनाने की प्रक्रिया शुरू है। निगम ने नगर निगम अधिनियम की धारा 266 का हवाला देते हुए कहा कि आयुक्त को खतरनाक भवन खाली कराने का अधिकार है। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि रिपोर्ट मुख्य रूप से नगर निगम कार्यालय से संबंधित है और यह स्पष्ट नहीं करती कि वादी की दुकान भी खतरनाक स्थिति में है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और आजीविका के अधिकार का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानदार को बेदखल करना उसके मूल अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल का होगी।
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जीटी रोड पर पालिका बाजार भवन को नगर निगम द्वारा जर्जर घोषित कर दिया गया था। इसके बाद नगर निगम ने बाजार के सभी दुकानदारों को दुकान खाली करने का नोटिस जारी किया था। दुकानदार दिनेश ने नगर निगम के नोटिस को अदालत में चुनौती दी थी। वादी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि दुकान नंबर-9, ग्राउंड फ्लोर, पालिका बाजार वर्ष 2011 की रजिस्टर्ड लीज डीड के आधार पर ली गई थी। लीज की शर्तों के अनुसार किरायेदार को केवल किराया न देने की स्थिति में ही हटाया जा सकता है। नगर निगम ने 7 नवंबर 2025 और 29 जनवरी 2026 को नोटिस जारी कर भवन को जर्जर बताते हुए दुकान खाली करने के निर्देश दिए थे। वादी का कहना है कि उनकी दुकान सुरक्षित है और मरम्मत की जरूरत ऊपरी मंजिलों को है।
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नगर निगम की ओर से कहा गया कि 2023 में भवन को कंडम घोषित किया गया था और पूरे पालिका बाजार के भवन को दोबारा बनाने की प्रक्रिया शुरू है। निगम ने नगर निगम अधिनियम की धारा 266 का हवाला देते हुए कहा कि आयुक्त को खतरनाक भवन खाली कराने का अधिकार है। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि रिपोर्ट मुख्य रूप से नगर निगम कार्यालय से संबंधित है और यह स्पष्ट नहीं करती कि वादी की दुकान भी खतरनाक स्थिति में है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और आजीविका के अधिकार का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानदार को बेदखल करना उसके मूल अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल का होगी।