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Panipat News: मतलौडा के लोग शिक्षा और समाजसेवा के साथ उद्योग की बने शान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2026 06:03 AM IST
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The people of Matalauda have become the pride of industry along with education and social service.
बाबा मोलडनाथ का डेरा। संवाद
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मतलौडा। मतलौडा के लोग शिक्षा के साथ समाजसेवा और उद्योग में भी शान बनाए हुए हैं। राइस मिल के साथ टेक्सटाइल और प्लाईबोर्ड उद्योग मेेें भी मतलौडा के लोग नाम कमा रहे हैं। करीब 12 परिवारों की बड़ी फैक्टरी और राइस मिल हैं। गांव का भाईचारा आज भी बना हुआ है। आजाद आर्य गोसेवा के साथ शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेशभर में नाम चमका चुके हैं। उन्होंने गांव के साथ आसपास के गांवों की बेटियों की शिक्षा के लिए मतलौडा में कॉलेज शुरू किया। 95 वर्षीय हरिराम बंसल पिछले 34 साल से गोशाला संभाल रहे हैं। श्यामलाल गर्ग की राइस मिल के साथ आसपास के कई गांवों में फैक्टरी हैं।
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गोशाला की जिम्मेदारी संभाल रहे हरिराम बंसल
हरिराम बंसल 95 साल की उम्र में गांव में गोशाला की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने 1992 में गोशाला बनाने का फैसला लिया था। उनको गोशाला की जिम्मेदारी दी थी। वे उसी दिन से लगातार मुख्य सेवक के रूप में कार्य कर रहे हैं। गांव की करीब 14 एकड़ पंचायती जमीन में गोशाला है। यहां करीब तीन हजार गोवंश हैं। वे हर रोज सुबह 10 बजे गोशाला पहुंच जाते हैं और दोपहर बाद दो बजे वापस आते हैं। वे इस दौरान 15 साल अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रहे। ग्रामीणों के सहयोग से मतलौडा में अग्रसेन धर्मशाला बनवाई।
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कोट्स फोटो-24
पंकज बंसल का परिवार उद्योग में बेमिसाल
पंकज बंसल ने बताया कि उनका करीब 50 सदस्यों का संयुक्त परिवार है। उनके दादा ने गांव में 1984 में राइस मिल लगाया था। उनके राइस मिल के चावल की कई देशों में आज भी मांग है। उन्होंने इसके बाद लकड़ी का काम शुरू किया। परिवार के सदस्यों ने 1996 में टेक्सटाइल के क्षेत्र में आगे आने का फैसला लिया। उनकी मतलौडा, आसन कलां व थिराना गांव में टेक्सटाइल की फैक्टरी हैं। उन्होंने इसके बाद प्लाई बोर्ड बनाने की फैक्टरी लगाने का फैसला लिया। उन्होंने यमुनानगर में उदमगढ़ गांव में प्लाई बोर्ड की फैक्टरी बनाई। वे गांव के युवाओं को नौकरी देने में प्राथमिकता बरतते हैं।


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संघर्ष से शिक्षा की राह तक पहुंचे आजाद सिंह आर्य
56 वर्षीय आजाद सिंह आर्य का जीवन संघर्ष, सेवा और शिक्षा का अनूठा संगम है। आजाद सिंह आर्य ने कैंटर चालक से अपने जीवन के सफर की शुरुआत की। उन्होंने बेटियों की शिक्षा के लिए 1994 में मतलौडा में आर्य आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की स्थापना की। यह क्षेत्र का पहला निजी स्कूल बना। उन्होंने इसके बाद 2002 में आर्य आदर्श कन्या महाविद्यालय की स्थापना की। इससे मतलौडा व आसपास के क्षेत्रों की बेटियों को उच्च शिक्षा का अवसर मिला। उन्होंने शिक्षा के साथ गोसेवा व गाेरक्षा के प्रति खुद को समर्पित रख। वे अब तक हजारों गायों की सुरक्षा कर चुके हैं। अब गोरक्षा सेवादल के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। महाविद्यालय परिसर में भी देसी गायों का पालन कर रहे हैं।


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ओम प्रकाश पांचाल देशभक्ति और समाज सेवा की प्रेरक मिसाल
मतलौडा के 97 वर्षीय ओम प्रकाश पांचाल का जीवन समर्पण, देशभक्ति और समाज सेवा की प्रेरक मिसाल है। उनके पिता मांगेराम पांचाल स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ओम प्रकाश पांचाल अपने पिता के आदर्शों पर चलते हुए भारतीय सेना में भर्ती हुए। उन्होंने 1965 के युद्ध में राष्ट्र की रक्षा में अपना योगदान दिया। सेना से सेवानिवृत होने के बाद समाजसेवा का मार्ग पकड़ा। उन्होंने पानीपत-जींद रूट पर बसों में यात्रियों को पानी पिलाने का पुनीत कार्य किया। परिवहन विभाग ने उनको निशुल्क बस पास दिया। वे आज बच्चों को शिक्षित करने में अपना योगदान दे रहे हैं।

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संघर्ष से सफलता तक शिक्षा की अलख जगा रहीं सुनीता शर्मा
मतलौडा की सुनीता शर्मा शिक्षा की अलख जगा रही हैं। सुनीता शर्मा ने बताया कि उनका सेना में जाने का सपना था। कॉलेज के समय में एनसीसी का सी सर्टिफिकेट प्राप्त किया। उनके पास सेना में लेफ्टिनेंट बनने का अवसर था, लेकिन उनके पिता मास्टर ओमप्रकाश ने उनको शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए हरियाणा की बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब हासिल किया। वे करनाल के गांव चोचड़ा की उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली पहली बेटी बनीं। उन्होंने मतलौडा में पहला सीबीएसई स्कूल न्यू एरा पब्लिक स्कूल स्थापित किया। वे स्कूल की प्रधानाचार्या की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। वे स्कूल में करीब 60 जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं।
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