{"_id":"69bc501813e2853a5d0585a1","slug":"10-mustard-damage-due-to-rain-notice-to-three-traders-for-negligence-in-crop-protection-rewari-news-c-198-1-rew1001-235283-2026-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: बारिश से 10 फीसदी सरसों को नुकसान, फसल सुरक्षा में लापरवाही पर तीन व्यापारियों को नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: बारिश से 10 फीसदी सरसों को नुकसान, फसल सुरक्षा में लापरवाही पर तीन व्यापारियों को नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 20 Mar 2026 01:05 AM IST
विज्ञापन
नई अनाज मंडी में सरसों की फसल को समेटते श्रमिक। संवाद
विज्ञापन
रेवाड़ी। बुधवार की शाम हुई बारिश से नई अनाज मंडी में खुले में रखी सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा है। दस फीसदी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। मंडी में श्रमिक सुबह तक पानी से सरसों को छानकर रखते नजर आए। भीगी बोरियों से सरसों निकाल कर सुखाने और उसे फिर सहेजने में समय और पैसे बर्बाद होंगे। वहीं फसल सुरक्षा में लापरवाही बरतने पर मार्केट कमेटी के सचिव ने तीन व्यापारियों को नोटिस जारी किया है।
अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि और किन आढ़तियों ने बारिश से पहले फसल को बचाने का उचित इंतजाम नहीं किया था। जांच के बाद और भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
मौसम विभाग ने पहले ही बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया था। इसके बाद भी मंडी में फसल को सुरक्षित रखने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। मंडी परिसर में पर्याप्त शेड, तिरपाल या जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण फसल खुले में पड़ी रही और बारिश का सीधा असर उस पर पड़ा।
समय रहते मंडी प्रशासन ने उचित कदम उठाया होता तो नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था। 2 दिनों में करीब 15 हजार क्विंटल सरसों की आवक हुई थी। 10 प्रतिशत नुकसान बताया जा रहा है जबकि हकीकत इससे गुणा ज्यादा है।
बारिश के बाद मंडी में अव्यवस्था का माहौल देखने को मिला। कई जगह पानी भर गया जिससे फसल को उठाने और बचाने में देरी हुई। श्रमिकों को देर रात तक भीगी फसल को इकट्ठा करने में जुटना पड़ा। हालांकि जो सरसों की फसल पूरी तरह पानी में बह गई, उसका नुकसान उठाना अब किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए भारी पड़ सकता है। इसमें अधिक नुकसान किसान का है।
-
लाखों रुपये का हुआ नुकसान
व्यापार संघ के प्रधान अशोक यादव ने कहा कि यह केवल आढ़तियों की लापरवाही का मामला नहीं है बल्कि पूरी व्यवस्था की कमी के कारण नुकसान हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान किसान का हुआ है। मंडी में पहले से ही लिफ्टिंग की समस्या बनी हुई है। इसके चलते जाम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। बड़े ट्राॅले मंडी में पहुंचते हैं लेकिन पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण उन्हें खड़ा करने में दिक्कत आती है। इसी कारण किसानों को मजबूर होकर अपनी फसल मंडी के बाहर डालनी पड़ती है, जहां बारिश के दौरान उसे बचाना मुश्किल हो जाता है। यह नुकसान लाखों रुपये में है और इसका सीधा असर सभी पक्षों पर पड़ रहा है।
--
एक दिन की छुट्टी देकर माल ढुलाई कराई जाए
व्यापार संघ का कहना है कि मौजूदा हालात में यदि एक दिन की छुट्टी देकर केवल माल की ढुलाई करवाई जाए तो मंडी की व्यवस्था को काफी हद तक सुधारा जा सकता है। इससे जाम की स्थिति भी खत्म होगी और फसल को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सकेगा। यह भी कहा कि बारिश के बाद खरीदारों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भीगी हुई फसल की बोरियों को पलटवाना, सुखाना और दोबारा संभालना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च और समय दोनों बढ़ते हैं। वहीं मंडी में पर्याप्त तिरपाल उपलब्ध नहीं है, जिससे पूरी फसल को ढक पाना संभव नहीं हो पाता।
-
तीन व्यापारियों को नोटिस जारी किया गया है। 10 प्रतिशत के आसपास नुकसान की आशंका है। व्यवस्था बनाने को लेकर कार्य किया जा रहा है।-
मनीष रोहिल्ला, सचिव, मार्केटिंग कमेटी।
-- -- -- -- -- --
काफी नुकसान हुआ है। पूरे मंडी में पानी भर गया। काफी सरसों तो भीग गई है। कई किसान तो वजन भी नहीं करवा पाए थे। सुबह पानी से सरसों छान के निकाली गई।-लल्लन, श्रमिक।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
बारिश में सरसों भीग गई। आढ़तियों के पास फसल ढकने की व्यवस्था नहीं थी। 1 दिन पहले बोली में फसल की खरीद हुई थी। अब बता रहे हैं कि सूखने के बाद फसल दोबारा तौलेंगे। मेरा ही नुकसान है। हम किसान कहां जाएं। -ब्रह्म प्रकाश, किसान, कालूवास गांव।
-- -- -- -- -- --
सरसों को सुबह साफ किया गया। 10 ढेरिया और एक तिरपाल है। क्या किया जा सकता है। गीली फसल को छानने में मशक्कत करनी पड़ रही है। उतना मेहनताना भी नहीं मिल रहा है।-प्रवेश पासवान, श्रमिक।
-- -- -- --
सुबह 5 बजे से सरसों छानने में लगे हुए थे। खाना खाने तक का समय नहीं मिला है। किसानों का काफी नुकसान हुआ है। -धर्मेश कुमार, श्रमिक।
Trending Videos
अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि और किन आढ़तियों ने बारिश से पहले फसल को बचाने का उचित इंतजाम नहीं किया था। जांच के बाद और भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मौसम विभाग ने पहले ही बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया था। इसके बाद भी मंडी में फसल को सुरक्षित रखने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। मंडी परिसर में पर्याप्त शेड, तिरपाल या जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण फसल खुले में पड़ी रही और बारिश का सीधा असर उस पर पड़ा।
समय रहते मंडी प्रशासन ने उचित कदम उठाया होता तो नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था। 2 दिनों में करीब 15 हजार क्विंटल सरसों की आवक हुई थी। 10 प्रतिशत नुकसान बताया जा रहा है जबकि हकीकत इससे गुणा ज्यादा है।
बारिश के बाद मंडी में अव्यवस्था का माहौल देखने को मिला। कई जगह पानी भर गया जिससे फसल को उठाने और बचाने में देरी हुई। श्रमिकों को देर रात तक भीगी फसल को इकट्ठा करने में जुटना पड़ा। हालांकि जो सरसों की फसल पूरी तरह पानी में बह गई, उसका नुकसान उठाना अब किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए भारी पड़ सकता है। इसमें अधिक नुकसान किसान का है।
-
लाखों रुपये का हुआ नुकसान
व्यापार संघ के प्रधान अशोक यादव ने कहा कि यह केवल आढ़तियों की लापरवाही का मामला नहीं है बल्कि पूरी व्यवस्था की कमी के कारण नुकसान हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान किसान का हुआ है। मंडी में पहले से ही लिफ्टिंग की समस्या बनी हुई है। इसके चलते जाम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। बड़े ट्राॅले मंडी में पहुंचते हैं लेकिन पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण उन्हें खड़ा करने में दिक्कत आती है। इसी कारण किसानों को मजबूर होकर अपनी फसल मंडी के बाहर डालनी पड़ती है, जहां बारिश के दौरान उसे बचाना मुश्किल हो जाता है। यह नुकसान लाखों रुपये में है और इसका सीधा असर सभी पक्षों पर पड़ रहा है।
एक दिन की छुट्टी देकर माल ढुलाई कराई जाए
व्यापार संघ का कहना है कि मौजूदा हालात में यदि एक दिन की छुट्टी देकर केवल माल की ढुलाई करवाई जाए तो मंडी की व्यवस्था को काफी हद तक सुधारा जा सकता है। इससे जाम की स्थिति भी खत्म होगी और फसल को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सकेगा। यह भी कहा कि बारिश के बाद खरीदारों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भीगी हुई फसल की बोरियों को पलटवाना, सुखाना और दोबारा संभालना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च और समय दोनों बढ़ते हैं। वहीं मंडी में पर्याप्त तिरपाल उपलब्ध नहीं है, जिससे पूरी फसल को ढक पाना संभव नहीं हो पाता।
-
तीन व्यापारियों को नोटिस जारी किया गया है। 10 प्रतिशत के आसपास नुकसान की आशंका है। व्यवस्था बनाने को लेकर कार्य किया जा रहा है।-
मनीष रोहिल्ला, सचिव, मार्केटिंग कमेटी।
काफी नुकसान हुआ है। पूरे मंडी में पानी भर गया। काफी सरसों तो भीग गई है। कई किसान तो वजन भी नहीं करवा पाए थे। सुबह पानी से सरसों छान के निकाली गई।-लल्लन, श्रमिक।
बारिश में सरसों भीग गई। आढ़तियों के पास फसल ढकने की व्यवस्था नहीं थी। 1 दिन पहले बोली में फसल की खरीद हुई थी। अब बता रहे हैं कि सूखने के बाद फसल दोबारा तौलेंगे। मेरा ही नुकसान है। हम किसान कहां जाएं। -ब्रह्म प्रकाश, किसान, कालूवास गांव।
सरसों को सुबह साफ किया गया। 10 ढेरिया और एक तिरपाल है। क्या किया जा सकता है। गीली फसल को छानने में मशक्कत करनी पड़ रही है। उतना मेहनताना भी नहीं मिल रहा है।-प्रवेश पासवान, श्रमिक।
सुबह 5 बजे से सरसों छानने में लगे हुए थे। खाना खाने तक का समय नहीं मिला है। किसानों का काफी नुकसान हुआ है। -धर्मेश कुमार, श्रमिक।

नई अनाज मंडी में सरसों की फसल को समेटते श्रमिक। संवाद