{"_id":"69ba9018bb718e37d20f530b","slug":"campaign-to-declare-masani-barrage-a-wetland-intensifies-signature-campaign-to-begin-after-april-5-rewari-news-c-198-1-rew1001-235223-2026-03-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: मसानी बैराज को वेटलैंड घोषित कराने की मुहिम तेज, 5 अप्रैल के बाद शुरू होगा हस्ताक्षर अभियान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: मसानी बैराज को वेटलैंड घोषित कराने की मुहिम तेज, 5 अप्रैल के बाद शुरू होगा हस्ताक्षर अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 20 Mar 2026 02:13 AM IST
विज्ञापन
कमल सिंह यादव
- फोटो : credit
विज्ञापन
रेवाड़ी। मसानी बैराज को वेटलैंड (आर्द्रभूमि) घोषित कराने और प्रदूषण मुक्त बनाने की मांग को लेकर क्षेत्र के अभियान चलेगा। राष्ट्रीय प्रकृति पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन संस्था के राष्ट्रीय संयोजक एवं रिटायर्ड वन अधिकारी कमल सिंह यादव के नेतृत्व में 20 गांवों में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
पांच अप्रैल के बाद बड़े स्तर पर हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की तैयारी है। इसमें 20 गांवों की महापंचायत बुलाई जाएगी व आगे की रणनीति तय होगी। इसके बाद व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाकर वेटलैंड अथॉरिटी को ज्ञापन देंगे। अभियान के संयोजक कमल सिंह यादव ने बताया कि मसानी बैराज और उसके आसपास बढ़ते प्रदूषण और इसके दुष्प्रभावों को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है।
खरखड़ा, मसानी, तितरपुर, खलियावास, निखरी, निगानियावास, रालियावास, जड्लथ, आशियाकी पांचोर, पीथनवास और सांपली सहित कई गांव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा संगवाड़ी, भूड़ला, लादूवास, साल्हावास, डूंगरवास, माजरा गुरदास, जीतपुरा, नंदरामपुर बास, भटसाना और बोलनी गांवों पर भी इसका असर पड़ रहा है।
बैराज में करीब 400 एकड़ क्षेत्र में पानी जमा है, लेकिन इसमें बिना उपचारित दूषित पानी छोड़ा जा रहा है। इससे भू-जल स्तर पर विपरीत असर पड़ रहा है और जल गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। इसके अलावा जब पूर्व दिशा से हवा चलती है तो बैराज से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास रहना मुश्किल हो जाता है।
पानी को पहले पूरी तरह से शुद्ध किया जाए
निखरी निवासी धर्मपाल ने बताया कि बैराज में छोड़े जाने वाले पानी को पहले पूरी तरह से शुद्ध किया जाए। इसके साथ ही बैराज को वेटलैंड घोषित कर संरक्षित किया जाए ताकि यहां का पारिस्थितिकी संतुलन बहाल हो सके। गौरतलब है कि यदि मसानी बैराज को वेटलैंड का दर्जा मिल जाता है तो यहां जल प्रवाह बेहतर होगा। प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ेगी और पर्यावरण को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही यह क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से भी विकसित हो सकता है।
प्रवासी पक्षियों की देखी गई थी तादाद
कमल सिंह यादव ने बताया कि 2012-13 में साफ पानी छोड़ा गया था तब प्रवासी पक्षियों की तादाद भी बढ़ गई थी। इसमें मुख्य रूप से साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर, फाल्कन, इम्पीरियल, तिदार, गुलाबी पेलिकन, रेड हेडेड, ग्रेटर स्पाटेंड इगल समेत कई पक्षी शामिल थे। प्रयास है कि फिर से ऐसा ही माहौल मिले। कमल सिंह यादव दक्षिण हरियाणा खेजड़ी बचाओ जन चेतना के संयोजक भी हैं।
एनजीटी में चल रहा है मामला
साहबी बैराज में दूषित पानी छोड़ने का मामला पहले से ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। सिंचाई विभाग ने 218 करोड़ रुपये की एक विस्तृत योजना तैयार की है। इस योजना में पांच बड़े टैंक बनाए जाएंगे। 200 एकड़ में एक बड़ा टैंक निर्मित होगा। 23 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस पाइपलाइन से पानी को पटौदी के पास इंदौरी नदी तक पहुंचाया जाएगा। योजना को पूरा करने में लगभग तीन वर्ष का समय लगेगा।
साहबी बैराज को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की थी योजना
तत्कालीन सीएम मनोहर लाल ने कहा था कि पर्यटकों के लिए इसे रमणीक स्थल बनाया जाएगा। इसमें रेस्टोरेंट व ठहरने के लिए हट्स भी बनाए जाएंगे। बोटिंग के बाद फूड कोर्ट, एडवेंचर कैंप की गतिविधियां शुरू की जाएंगी। साहबी क्षेत्र के कई किलोमीटर में फैले बैराज में नेचर ट्रेल भी विकसित किया जाएगा। सरकार की योजना 18 किलोमीटर तक ट्रेल बनाने की थी ताकि एक बेहतर पर्यटक स्थल बनाया जा सके।
Trending Videos
पांच अप्रैल के बाद बड़े स्तर पर हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की तैयारी है। इसमें 20 गांवों की महापंचायत बुलाई जाएगी व आगे की रणनीति तय होगी। इसके बाद व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाकर वेटलैंड अथॉरिटी को ज्ञापन देंगे। अभियान के संयोजक कमल सिंह यादव ने बताया कि मसानी बैराज और उसके आसपास बढ़ते प्रदूषण और इसके दुष्प्रभावों को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
खरखड़ा, मसानी, तितरपुर, खलियावास, निखरी, निगानियावास, रालियावास, जड्लथ, आशियाकी पांचोर, पीथनवास और सांपली सहित कई गांव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा संगवाड़ी, भूड़ला, लादूवास, साल्हावास, डूंगरवास, माजरा गुरदास, जीतपुरा, नंदरामपुर बास, भटसाना और बोलनी गांवों पर भी इसका असर पड़ रहा है।
बैराज में करीब 400 एकड़ क्षेत्र में पानी जमा है, लेकिन इसमें बिना उपचारित दूषित पानी छोड़ा जा रहा है। इससे भू-जल स्तर पर विपरीत असर पड़ रहा है और जल गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। इसके अलावा जब पूर्व दिशा से हवा चलती है तो बैराज से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास रहना मुश्किल हो जाता है।
पानी को पहले पूरी तरह से शुद्ध किया जाए
निखरी निवासी धर्मपाल ने बताया कि बैराज में छोड़े जाने वाले पानी को पहले पूरी तरह से शुद्ध किया जाए। इसके साथ ही बैराज को वेटलैंड घोषित कर संरक्षित किया जाए ताकि यहां का पारिस्थितिकी संतुलन बहाल हो सके। गौरतलब है कि यदि मसानी बैराज को वेटलैंड का दर्जा मिल जाता है तो यहां जल प्रवाह बेहतर होगा। प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ेगी और पर्यावरण को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही यह क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से भी विकसित हो सकता है।
प्रवासी पक्षियों की देखी गई थी तादाद
कमल सिंह यादव ने बताया कि 2012-13 में साफ पानी छोड़ा गया था तब प्रवासी पक्षियों की तादाद भी बढ़ गई थी। इसमें मुख्य रूप से साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर, फाल्कन, इम्पीरियल, तिदार, गुलाबी पेलिकन, रेड हेडेड, ग्रेटर स्पाटेंड इगल समेत कई पक्षी शामिल थे। प्रयास है कि फिर से ऐसा ही माहौल मिले। कमल सिंह यादव दक्षिण हरियाणा खेजड़ी बचाओ जन चेतना के संयोजक भी हैं।
एनजीटी में चल रहा है मामला
साहबी बैराज में दूषित पानी छोड़ने का मामला पहले से ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। सिंचाई विभाग ने 218 करोड़ रुपये की एक विस्तृत योजना तैयार की है। इस योजना में पांच बड़े टैंक बनाए जाएंगे। 200 एकड़ में एक बड़ा टैंक निर्मित होगा। 23 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस पाइपलाइन से पानी को पटौदी के पास इंदौरी नदी तक पहुंचाया जाएगा। योजना को पूरा करने में लगभग तीन वर्ष का समय लगेगा।
साहबी बैराज को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की थी योजना
तत्कालीन सीएम मनोहर लाल ने कहा था कि पर्यटकों के लिए इसे रमणीक स्थल बनाया जाएगा। इसमें रेस्टोरेंट व ठहरने के लिए हट्स भी बनाए जाएंगे। बोटिंग के बाद फूड कोर्ट, एडवेंचर कैंप की गतिविधियां शुरू की जाएंगी। साहबी क्षेत्र के कई किलोमीटर में फैले बैराज में नेचर ट्रेल भी विकसित किया जाएगा। सरकार की योजना 18 किलोमीटर तक ट्रेल बनाने की थी ताकि एक बेहतर पर्यटक स्थल बनाया जा सके।

कमल सिंह यादव- फोटो : credit