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Rewari News: वन क्षेत्र में तीन करोड़ की राशि होगी खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 22 Jan 2026 11:52 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली। एसडीएम विजय कुमार यादव ने नाहड़ बीड़ के संरक्षित वन क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां बांस व अन्य प्रजातियों के लगाए जा रहे पौधों की जानकारी ली। बताया कि बांस के यहां करीब 4500 पौधे लगाए जाएंगे। वन क्षेत्र के विकास पर तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
नाहड़ बीड़ के संरक्षित वन क्षेत्र में हिरण व अन्य प्रजाति के जानवरों के रहने के लिए आने वाले समय में वन विभाग की ओर से करीब तीन करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। फिलहाल यहां दीवार और नाले के साथ बंबू प्रजाति के वृक्ष लगाए जा रहे हैं।
इस पर 9 लाख 53 हजार की राशि खर्च की जा रही है। इसके अलावा बावली कीकर की छोटी झाड़ियों की सफाई करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि भविष्य में इस बीड़ की चार दीवारी का पुनर्निर्माण करवाया जाएगा।
इस समय हिरण के रहने के लिए करीब चालीस एकड़ भूमि है। वन विभाग की योजना है कि हिरणों के लिए पूरे 250 एकड़ का एरिया खोल दिया जाए। इसी दिशा में कीकर को हटाने व बांस के वृक्ष लगाने का कार्य करवाया जा रहा है। वन विभाग के विक्रम सिंह ने बताया कि एक साल तक टेंडर लेने वाली एजेंसी ही इन पौधों का रखरखाव करेगी।
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कोसली। एसडीएम विजय कुमार यादव ने नाहड़ बीड़ के संरक्षित वन क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां बांस व अन्य प्रजातियों के लगाए जा रहे पौधों की जानकारी ली। बताया कि बांस के यहां करीब 4500 पौधे लगाए जाएंगे। वन क्षेत्र के विकास पर तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
नाहड़ बीड़ के संरक्षित वन क्षेत्र में हिरण व अन्य प्रजाति के जानवरों के रहने के लिए आने वाले समय में वन विभाग की ओर से करीब तीन करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। फिलहाल यहां दीवार और नाले के साथ बंबू प्रजाति के वृक्ष लगाए जा रहे हैं।
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इस पर 9 लाख 53 हजार की राशि खर्च की जा रही है। इसके अलावा बावली कीकर की छोटी झाड़ियों की सफाई करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि भविष्य में इस बीड़ की चार दीवारी का पुनर्निर्माण करवाया जाएगा।
इस समय हिरण के रहने के लिए करीब चालीस एकड़ भूमि है। वन विभाग की योजना है कि हिरणों के लिए पूरे 250 एकड़ का एरिया खोल दिया जाए। इसी दिशा में कीकर को हटाने व बांस के वृक्ष लगाने का कार्य करवाया जा रहा है। वन विभाग के विक्रम सिंह ने बताया कि एक साल तक टेंडर लेने वाली एजेंसी ही इन पौधों का रखरखाव करेगी।