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Rewari News: आरआरटीएस प्रोजेक्ट को हरी झंडी, प्रथम चरण में बावल तक मिली मंजूरी

संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Thu, 22 Jan 2026 11:50 PM IST
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RRTS project gets green signal, first phase approved till Bawal
बावल का औद्योगिक क्षेत्र। संवाद
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रेवाड़ी। दिल्ली से शाहजहांपुर-नीमराणा तक प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पत्र लिखकर इस परियोजना के प्रथम चरण को दिल्ली के सराय काले खां से हरियाणा के बावल तक विकसित करने की मंजूरी की जानकारी दी है। इस पत्र के बाद रेवाड़ी, बावल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में विकास उम्मीदें जगी हैं।
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पत्र में बताया गया है कि सेमी हाई-स्पीड ट्रांजिट सिस्टम को विकसित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) ने एनसीआर-2032 के लिए परिवहन पर एक कार्यात्मक योजना तैयार की थी।
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इस योजना के तहत एनसीआर के प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड रेल आधारित कम्यूटर ट्रांजिट से जोड़ने के लिए कुल आठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर चिह्नित किए गए थे। इनमें दिल्ली-अलवर आरआरटीएस कॉरिडोर भी शामिल है, जिसे नमो भारत परियोजना के नाम से विकसित किया जा रहा है।
दिल्ली-अलवर आरआरटीएस कॉरिडोर के संबंध में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रथम चरण में इस कॉरिडोर का निर्माण दिल्ली के सराय कालेखां से बावल तक किया जाएगा। बावल से आगे राजस्थान की ओर विस्तार अगले चरण में प्रस्तावित रहेगा। इस फैसले से हरियाणा के दक्षिणी हिस्से को तेज और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
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सितंबर में राव इंद्रजीत सिंह ने लिखा था पत्र
सितंबर माह में राव इंद्रजीत सिंह ने इस परियोजना की प्रगति को लेकर गुरुग्राम के विश्राम गृह में एनसीआरटीसी, जीएमडीए और एचएमआरटीसी के अधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक की थी। इस बैठक में दिल्ली सराय कालेखां से गुरुग्राम, मानेसर, बिलासपुर, धारूहेड़ा, बावल होते हुए शाहजहांपुर-नीमराणा तक प्रस्तावित रैपिड रेल की प्रगति रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई थी। बैठक के दौरान एनसीआरटीसी अधिकारियों ने बताया था कि प्रथम चरण में आरआरटीएस को धारूहेड़ा तक ही सीमित रखने की योजना पर विचार किया जा रहा है, क्योंकि धारूहेड़ा से आगे रूट पर यात्रियों की उपलब्धता कम आंकी गई है। हालांकि इस आकलन पर राव इंद्रजीत सिंह ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने अधिकारियों को बताया था कि धारूहेड़ा से आगे बावल हरियाणा का एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। बावल से सटे राजस्थान के भिवाड़ी, शाहजहांपुर और नीमराणा भी देश के प्रमुख औद्योगिक हब हैं, जहां प्रतिदिन हजारों श्रमिक और कर्मचारी रोजगार के लिए आवाजाही करते हैं। ऐसे में धारूहेड़ा से आगे यात्रियों की कमी का तर्क जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता।
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दिल्ली-अलवर कॉरिडोर को आगे बढ़ाना तार्किक
अपने पत्र में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने यह भी उल्लेख किया है कि दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत आरआरटीएस परियोजनाओं की घोषणा एक साथ की गई थी और इन्हें एनसीआरपीबी के प्लान में अधिसूचित किया गया था। दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर लगभग पूरा होने वाला है, जबकि दिल्ली-पानीपत लाइन को पहले पानीपत तक ही मंजूरी थी, जिसे अब केंद्र सरकार ने करनाल तक बढ़ाने की स्वीकृति दे दी है। ऐसे में दिल्ली-अलवर कॉरिडोर को भी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाना तार्किक है।
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