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Rewari News: अब पंचायतों के खातों से नहीं होगा मनमाना भुगतान, पाई-पाई का देना होगा हिसाब
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 24 Jun 2026 05:52 PM IST
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प्रकाश यादव
धारूहेड़ा(रेवाड़ी)। हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओं की तरफ से विकास और प्रशासनिक कार्यों के नाम पर होने वाले पैसों के लेन-देन में पारदर्शिता लाने के लिए प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है। विकास और पंचायत विभाग की ओर से 23 जून को जारी नए आदेशों के मुताबिक अब राज्य की कोई भी ग्राम पंचायत, पंचायत समिति या जिला परिषद बैंक खातों से मनमाने तरीके से भुगतान नहीं कर पाएंगी। पाई-पाई का हिसाब देना होगा।
विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की मंजूरी के बाद प्रदेश के सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारियों को इस संबंध में हिदायत दे दी गई है। नए नियमों के तहत अब किसी भी प्रकार के भुगतान के लिए बैंकों को एक विशेष पेमेंट एडवाइस सौंपनी होगी।
चाहे गांव में गली-नाली का निर्माण कार्य हो या फिर कर्मचारियों का वेतन और बिजली बिल जैसा गैर-विकास कार्य, हर भुगतान के लिए इस एडवाइस पर संबंधित संस्था के दोनों अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के हस्ताक्षर होने अनिवार्य होंगे। चेतावनी दी है कि यदि किसी बैंक ने बिना इस एडवाइस या बिना अनिवार्य हस्ताक्षरों के कोई भी भुगतान जारी किया तो उसे अवैध और अनियमित माना जाएगा और इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय कर कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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इंसेट
इन बातों का रखना होगा ध्यान
अक्सर धरातल पर देखने में आता था कि काम पूरा हुए बिना ही कागजों के सहारे पूरी राशि का भुगतान उठा लिया जाता था। इस खेल को पूरी तरह बंद करने के लिए सरकार ने विकास कार्यों के भुगतान वाले फॉर्म में सख्त शर्तें जोड़ी हैं। अब कोई भी चेक या पेमेंट क्लियर करवाते समय बैंक को लिखित में देना होगा कि संबंधित कार्य का नाम हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स पोर्टल पर दर्ज है, ठेकेदार का पूरा विवरण और जीएसटी नंबर क्या है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि मौके पर अभी तक कितने प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि इस काम के एवज में पहले कितना भुगतान हो चुका है और कितनी राशि शेष है।
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सभी लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को निर्देश जारी
सिर्फ विकास कार्य ही नहीं बल्कि पंचायतों के रोजमर्रा के खर्चों, जैसे स्टोर का सामान खरीदने, कर्मचारियों को वेतन बांटने या बिजली के बिलों का भुगतान करने के लिए भी विभाग ने दूसरा फॉर्म अनिवार्य कर दिया है। इसमें वेंडर का नाम, बिल या वाउचर नंबर और भुगतान का स्पष्ट उद्देश्य लिखना होगा। इस पूरी व्यवस्था को जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू करने के लिए विकास एवं पंचायत विभाग ने राज्य के सभी लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर्स को भी सीधे निर्देश जारी किए हैं ताकि सभी बैंक शाखाएं इन नियमों का पालन करे। सरकार के इस कदम से ग्रामीण स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में न सिर्फ वित्तीय अनुशासन आएगा बल्कि फर्जी बिलों के सहारे होने वाले भ्रष्टाचार और बंदरबांट पर भी पूरी तरह से लगाम लग सकेगी।
वर्जन
पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई भुगतान व्यवस्था लागू की गई है। अब सभी भुगतान निर्धारित प्रक्रिया और पेमेंट एडवाइस के आधार पर ही किए जाएंगे। इससे अनियमित भुगतान पर रोक लगेगी तथा विकास कार्यों में सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।-अरुण यादव, खण्ड एवं पंचायत विकास अधिकारी तावडू
धारूहेड़ा(रेवाड़ी)। हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओं की तरफ से विकास और प्रशासनिक कार्यों के नाम पर होने वाले पैसों के लेन-देन में पारदर्शिता लाने के लिए प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है। विकास और पंचायत विभाग की ओर से 23 जून को जारी नए आदेशों के मुताबिक अब राज्य की कोई भी ग्राम पंचायत, पंचायत समिति या जिला परिषद बैंक खातों से मनमाने तरीके से भुगतान नहीं कर पाएंगी। पाई-पाई का हिसाब देना होगा।
विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की मंजूरी के बाद प्रदेश के सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारियों को इस संबंध में हिदायत दे दी गई है। नए नियमों के तहत अब किसी भी प्रकार के भुगतान के लिए बैंकों को एक विशेष पेमेंट एडवाइस सौंपनी होगी।
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चाहे गांव में गली-नाली का निर्माण कार्य हो या फिर कर्मचारियों का वेतन और बिजली बिल जैसा गैर-विकास कार्य, हर भुगतान के लिए इस एडवाइस पर संबंधित संस्था के दोनों अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के हस्ताक्षर होने अनिवार्य होंगे। चेतावनी दी है कि यदि किसी बैंक ने बिना इस एडवाइस या बिना अनिवार्य हस्ताक्षरों के कोई भी भुगतान जारी किया तो उसे अवैध और अनियमित माना जाएगा और इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय कर कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इंसेट
इन बातों का रखना होगा ध्यान
अक्सर धरातल पर देखने में आता था कि काम पूरा हुए बिना ही कागजों के सहारे पूरी राशि का भुगतान उठा लिया जाता था। इस खेल को पूरी तरह बंद करने के लिए सरकार ने विकास कार्यों के भुगतान वाले फॉर्म में सख्त शर्तें जोड़ी हैं। अब कोई भी चेक या पेमेंट क्लियर करवाते समय बैंक को लिखित में देना होगा कि संबंधित कार्य का नाम हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स पोर्टल पर दर्ज है, ठेकेदार का पूरा विवरण और जीएसटी नंबर क्या है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि मौके पर अभी तक कितने प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि इस काम के एवज में पहले कितना भुगतान हो चुका है और कितनी राशि शेष है।
सभी लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को निर्देश जारी
सिर्फ विकास कार्य ही नहीं बल्कि पंचायतों के रोजमर्रा के खर्चों, जैसे स्टोर का सामान खरीदने, कर्मचारियों को वेतन बांटने या बिजली के बिलों का भुगतान करने के लिए भी विभाग ने दूसरा फॉर्म अनिवार्य कर दिया है। इसमें वेंडर का नाम, बिल या वाउचर नंबर और भुगतान का स्पष्ट उद्देश्य लिखना होगा। इस पूरी व्यवस्था को जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू करने के लिए विकास एवं पंचायत विभाग ने राज्य के सभी लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर्स को भी सीधे निर्देश जारी किए हैं ताकि सभी बैंक शाखाएं इन नियमों का पालन करे। सरकार के इस कदम से ग्रामीण स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में न सिर्फ वित्तीय अनुशासन आएगा बल्कि फर्जी बिलों के सहारे होने वाले भ्रष्टाचार और बंदरबांट पर भी पूरी तरह से लगाम लग सकेगी।
वर्जन
पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई भुगतान व्यवस्था लागू की गई है। अब सभी भुगतान निर्धारित प्रक्रिया और पेमेंट एडवाइस के आधार पर ही किए जाएंगे। इससे अनियमित भुगतान पर रोक लगेगी तथा विकास कार्यों में सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।-अरुण यादव, खण्ड एवं पंचायत विकास अधिकारी तावडू