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Rewari News: नहर में पानी बंद, आज से एक दिन छोड़कर होगी पेयजलापूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 16 Jun 2026 04:52 PM IST
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जवाहर लाल नेहरू नहर में कम हुआ पानी। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी शहर में पेयजल संकट एक बार फिर गहरा गया है। नहर में पानी की आपूर्ति ठप होने के कारण जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने बुधवार से शहर में एक दिन छोड़कर पानी देने की व्यवस्था लागू कर दी है। शहरवासियों को नहर आने तक तक इसी व्यवस्था के तहत पानी मिलेगा।
करीब पौने तीन लाख की आबादी वाले शहर में लगभग 20 वर्षों से पेयजल की समस्या बनी हुई है लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम धरातल पर नजर नहीं आया है। दरअसल 2 जून को नहर में पानी आया था। इसके बाद 14 दिनों तक जलापूर्ति की स्थिति सामान्य रही।
हालांकि निर्धारित शेड्यूल के अनुसार नहर में सीमित अवधि तक ही पानी उपलब्ध रहता है। अब नहर में पानी बंद हो चुकी है जिसके चलते विभाग को संग्रहित पानी के सहारे शहर की जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं। ऐसे में नागरिकों को एक दिन छोड़कर पानी मिलने से दैनिक जरूरत को पूरा करने के लिए पहले से पानी का भंडारण करना होगा।
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शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था कालाका और लिसाना स्थित वाटर वर्क्स पर आधारित है। वर्तमान में कालाका में पांच और लिसाना में तीन वाटर टैंक हैं। नहरी पानी को इन टैंकों में संग्रहित कर कॉलोनियों और मोहल्लों में सप्लाई किया जाता है। शहर में प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की आवश्यकता होती है लेकिन उपलब्ध स्टोरेज क्षमता बढ़ती आबादी के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। यही कारण है कि नहर बंद होते ही जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने लगती है।
शहर में वर्तमान समय में प्रतिदिन करीब 40 मिलियन लीटर पानी की आवश्यकता है लेकिन प्रतिदिन करीब 27.82 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति हो रही है। लिसाना वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 5.32 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। कालाका वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 22.5 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है।
इंसेट
बढ़ती आबादी के मुकाबले नहीं बढ़े संसाधन
मोहल्ला विकास नगर निवासी गौरव यादव, हंसनगर निवासी पंकज और भाड़ावास गेट निवासी प्रेम प्रकाश का कहना है कि दो दशक में शहर की आबादी में वृद्धि हुई है लेकिन जल भंडारण और वितरण से जुड़े संसाधनों में उसी अनुपात में विस्तार नहीं हो पाया। कई बार नई योजनाओं और परियोजनाओं की घोषणाएं की गईं लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। गर्मी के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है और लोगों को पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता सताने लगती है।
इंसेट
नया वाटर टैंक बनने से मिल सकती है राहत
यदि अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता की व्यवस्था की जाए तो पेयजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी दिशा में भगवानपुर गांव में नया वाटर टैंक बनाए जाने की योजना प्रस्तावित है। यह परियोजना जल्द पूरी हो जाती है तो नहर बंद रहने के दौरान भी पर्याप्त पानी का भंडारण किया जा सकेगा और लोगों को बार-बार राशनिंग व्यवस्था का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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वर्जन:
खूबडू हेड से नहर में पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई है। इसके चलते शहर में बुधवार से एक दिन छोड़कर पेयजल सप्लाई की जाएगी। नागरिकों से अपील है कि पानी का दुरुपयोग न करके जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करें ताकि सभी को पर्याप्त पानी मिल सके। - हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग रेवाड़ी
रेवाड़ी शहर में पेयजल संकट एक बार फिर गहरा गया है। नहर में पानी की आपूर्ति ठप होने के कारण जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने बुधवार से शहर में एक दिन छोड़कर पानी देने की व्यवस्था लागू कर दी है। शहरवासियों को नहर आने तक तक इसी व्यवस्था के तहत पानी मिलेगा।
करीब पौने तीन लाख की आबादी वाले शहर में लगभग 20 वर्षों से पेयजल की समस्या बनी हुई है लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम धरातल पर नजर नहीं आया है। दरअसल 2 जून को नहर में पानी आया था। इसके बाद 14 दिनों तक जलापूर्ति की स्थिति सामान्य रही।
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हालांकि निर्धारित शेड्यूल के अनुसार नहर में सीमित अवधि तक ही पानी उपलब्ध रहता है। अब नहर में पानी बंद हो चुकी है जिसके चलते विभाग को संग्रहित पानी के सहारे शहर की जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं। ऐसे में नागरिकों को एक दिन छोड़कर पानी मिलने से दैनिक जरूरत को पूरा करने के लिए पहले से पानी का भंडारण करना होगा।
शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था कालाका और लिसाना स्थित वाटर वर्क्स पर आधारित है। वर्तमान में कालाका में पांच और लिसाना में तीन वाटर टैंक हैं। नहरी पानी को इन टैंकों में संग्रहित कर कॉलोनियों और मोहल्लों में सप्लाई किया जाता है। शहर में प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की आवश्यकता होती है लेकिन उपलब्ध स्टोरेज क्षमता बढ़ती आबादी के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। यही कारण है कि नहर बंद होते ही जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने लगती है।
शहर में वर्तमान समय में प्रतिदिन करीब 40 मिलियन लीटर पानी की आवश्यकता है लेकिन प्रतिदिन करीब 27.82 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति हो रही है। लिसाना वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 5.32 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। कालाका वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 22.5 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है।
इंसेट
बढ़ती आबादी के मुकाबले नहीं बढ़े संसाधन
मोहल्ला विकास नगर निवासी गौरव यादव, हंसनगर निवासी पंकज और भाड़ावास गेट निवासी प्रेम प्रकाश का कहना है कि दो दशक में शहर की आबादी में वृद्धि हुई है लेकिन जल भंडारण और वितरण से जुड़े संसाधनों में उसी अनुपात में विस्तार नहीं हो पाया। कई बार नई योजनाओं और परियोजनाओं की घोषणाएं की गईं लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। गर्मी के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है और लोगों को पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता सताने लगती है।
इंसेट
नया वाटर टैंक बनने से मिल सकती है राहत
यदि अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता की व्यवस्था की जाए तो पेयजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी दिशा में भगवानपुर गांव में नया वाटर टैंक बनाए जाने की योजना प्रस्तावित है। यह परियोजना जल्द पूरी हो जाती है तो नहर बंद रहने के दौरान भी पर्याप्त पानी का भंडारण किया जा सकेगा और लोगों को बार-बार राशनिंग व्यवस्था का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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वर्जन:
खूबडू हेड से नहर में पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई है। इसके चलते शहर में बुधवार से एक दिन छोड़कर पेयजल सप्लाई की जाएगी। नागरिकों से अपील है कि पानी का दुरुपयोग न करके जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करें ताकि सभी को पर्याप्त पानी मिल सके। - हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग रेवाड़ी