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Rewari News: परिणाम से पहले काउंसिलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे

संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sun, 12 Apr 2026 11:41 PM IST
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Counselling sessions will be conducted before the results.
शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ
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रेवाड़ी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम मई के मध्य तक जारी होने की संभावना है। विद्यार्थियों में उत्सुकता के साथ तनाव भी बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए काउंसिलिंग की तैयारी शुरू कर दी है।
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हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी परीक्षा परिणाम को लेकर चिंता और दबाव महसूस करते हैं। विशेष रूप से वे छात्र अधिक तनाव में आ जाते हैं जिन्हें अपने अंकों को लेकर संशय रहता है। इसी के मद्देनजर स्कूलों में काउंसिलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि विद्यार्थियों को सही दिशा-निर्देश मिल सके। वे नकारात्मक सोच से दूर रह सकें।
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विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं बल्कि उनका मनोबल बढ़ाएं। सकारात्मक माहौल मिलने पर ही विद्यार्थी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। समय पर सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने से विद्यार्थी तनाव से बाहर निकलकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकते हैं। जिले में इस बार 12वीं के 8 हजार 68 और 10वीं के करीब 8 हजार 351 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी है।
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कम अंक आए तो हताश न हों, आगे बढ़ने के कई अवसर

भाड़ावास गेट स्थित राजकीय वरिष्ठ बाल माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक मनोज वशिष्ठ ने बताया कि यदि किसी विद्यार्थी की अपेक्षा के अनुरूप अंक नहीं आते हैं तो उन्हें हताश होने की जरूरत नहीं है। जीवन में आगे बढ़ने के कई अवसर होते हैं और एक परीक्षा का परिणाम भविष्य तय नहीं करता। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे की योजना बनाएं। आगे पढ़ाई पर ध्यान दें। इस समय माता-पिता, शिक्षक और दोस्तों का सहयोग बहुत जरूरी होता है। माता-पिता बच्चों को डांटने या उनकी तुलना दूसरों से करने के बजाय उनका हौसला बढ़ाएं।


कम अंक असफलता नहीं, सही रणनीति से मिलेगी नई दिशा

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पाली के शिक्षक दिनेश सोनी ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अक्सर निराशा, तनाव और आत्मविश्वास की कमी का शिकार हो जाते हैं। वे अंकों को ही अपनी पूरी क्षमता और भविष्य का पैमाना मानने लगते हैं। हालांकि कम अंक या कम प्रतिशत प्राप्त करना असफलता नहीं है। इसके बजाय सही रणनीतियां अपनाकर ऐसे विद्यार्थी न केवल मानसिक रूप से मजबूत बन सकते हैं बल्कि अपने करियर को भी नई दिशा दे सकते हैं।

शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ

शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ

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