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Rewari News: हर संस्थान में मेडिकल केयर यूनिट स्थापित करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 10 Jun 2026 04:00 AM IST
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मेडिकल केयर यूनिट स्थापित करने की मांग करते संस्था के पदाधिकारी व स्टाफ। स्रोत : संस्था
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रेवाड़ी। राष्ट्रीय सामाजिक संगठन लोक सेवा मंच ने केंद्र और राज्य सरकारों से सार्वजनिक व निजी संस्थानों में मेडिकल केयर यूनिट स्थापित करने की मांग की है। मेगा मिशन जनसंपर्क अभियान के तहत लोक सेवा मंच के प्रधान अशोक, कोर कमेटी सदस्य बीके राम सिंह, नंदलाल यादव ने राष्ट्रीय राजमार्ग-11 के पास नर्सिंग कॉलेज में बैठक की।
बैठक में युवाओं ने रोजगार के अवसरों की कमी, सार्वजनिक परिवहन की असुविधा और बढ़ती महंगाई से परिवारों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव जैसी समस्याएं भी सामने रखीं। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक ने कहा कि असमय होने वाली मौतों के पीछे एक बड़ा कारण समय पर फर्स्ट एड न मिलना है।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में यदि मरीज को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल जाए तो अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी जान बचाई जा सकती है। इसलिए हर उस स्थान पर मेडिकल केयर यूनिट जरूरी है जहां 10 से अधिक लोग नियमित रूप से मौजूद रहते हैं या जहां सार्वजनिक आवाजाही होती है।
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सुझाव दिया कि ऐसे मेडिकल यूनिट्स में कम से कम जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, एएनएम और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति होनी चाहिए। इससे न केवल आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित इलाज संभव होगा बल्कि नर्सिंग और पैरामेडिकल क्षेत्र के प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
बैठक में यह भी बताया गया कि बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों में अचानक हृदय संबंधी समस्याएं, ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल में बदलाव, चोट, बुखार, उल्टी-दस्त और चक्कर आने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में शुरुआती उपचार की सुविधा कई जानें बचा सकती है।
संगठन ने कहा कि यह नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकार से जुड़ा मुद्दा है और राज्य की जिम्मेदारी है कि वह स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा लगातार बढ़ाए। बैठक में उपस्थित नर्सिंग प्रशिक्षणार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
लोक सेवा मंच ने कहा कि इस मांग को लेकर स्वास्थ्य मंत्री, परिवहन मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र भेजा जाएगा ताकि देशभर में मेडिकल केयर यूनिट स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सके।
बैठक में युवाओं ने रोजगार के अवसरों की कमी, सार्वजनिक परिवहन की असुविधा और बढ़ती महंगाई से परिवारों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव जैसी समस्याएं भी सामने रखीं। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक ने कहा कि असमय होने वाली मौतों के पीछे एक बड़ा कारण समय पर फर्स्ट एड न मिलना है।
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उन्होंने बताया कि कई मामलों में यदि मरीज को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल जाए तो अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी जान बचाई जा सकती है। इसलिए हर उस स्थान पर मेडिकल केयर यूनिट जरूरी है जहां 10 से अधिक लोग नियमित रूप से मौजूद रहते हैं या जहां सार्वजनिक आवाजाही होती है।
सुझाव दिया कि ऐसे मेडिकल यूनिट्स में कम से कम जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, एएनएम और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति होनी चाहिए। इससे न केवल आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित इलाज संभव होगा बल्कि नर्सिंग और पैरामेडिकल क्षेत्र के प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
बैठक में यह भी बताया गया कि बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों में अचानक हृदय संबंधी समस्याएं, ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल में बदलाव, चोट, बुखार, उल्टी-दस्त और चक्कर आने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में शुरुआती उपचार की सुविधा कई जानें बचा सकती है।
संगठन ने कहा कि यह नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकार से जुड़ा मुद्दा है और राज्य की जिम्मेदारी है कि वह स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा लगातार बढ़ाए। बैठक में उपस्थित नर्सिंग प्रशिक्षणार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
लोक सेवा मंच ने कहा कि इस मांग को लेकर स्वास्थ्य मंत्री, परिवहन मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र भेजा जाएगा ताकि देशभर में मेडिकल केयर यूनिट स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सके।