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Rewari News: आत्मनिर्भरता की राह पर नांगल शाहबाजपुर की महिलाएं, स्वयं सहायता समूहों ने बदली तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 10 Jun 2026 04:55 AM IST
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कार्य कर रही महिला। संवाद
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बावल। गांव नांगल शाहबाजपुर में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने मेहनत और लगन के बल पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। गांव की महिलाओं ने स्वरोजगार अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है बल्कि समाज में सम्मान और पहचान भी हासिल की है।
गांव के श्री राधा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी संगीता, बीना, सनाह और मनीषा ने समूह के माध्यम से फूल-बत्ती एवं पूजन सामग्री निर्माण का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ी और इससे उनकी आमदनी में भी इजाफा हुआ।
महिलाओं का कहना है कि पहले वे आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी नहीं कर पाती थीं लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग मिला। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वरोजगार के क्षेत्र में कदम रखा। आज वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर सामाजिक और पारिवारिक कारणों से महिलाएं घर से बाहर निकलकर काम करने में संकोच करती हैं लेकिन मिशन की इस पहल ने उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है।
समूह आधारित मॉडल के जरिए महिलाएं सामूहिक रूप से कार्य कर रही हैं और एक-दूसरे का सहयोग करते हुए आगे बढ़ रही हैं।
गांव की सरपंच मनीषा का भी योगदान रहा
इस सफलता के पीछे गांव की सरपंच मनीषा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने महिलाओं को समूहों से जोड़ने, उन्हें प्रेरित करने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से गांव की कई महिलाएं आज आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।
गांव के श्री राधा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी संगीता, बीना, सनाह और मनीषा ने समूह के माध्यम से फूल-बत्ती एवं पूजन सामग्री निर्माण का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ी और इससे उनकी आमदनी में भी इजाफा हुआ।
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महिलाओं का कहना है कि पहले वे आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी नहीं कर पाती थीं लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग मिला। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वरोजगार के क्षेत्र में कदम रखा। आज वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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समूह आधारित मॉडल के जरिए महिलाएं सामूहिक रूप से कार्य कर रही हैं और एक-दूसरे का सहयोग करते हुए आगे बढ़ रही हैं।
गांव की सरपंच मनीषा का भी योगदान रहा
इस सफलता के पीछे गांव की सरपंच मनीषा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने महिलाओं को समूहों से जोड़ने, उन्हें प्रेरित करने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से गांव की कई महिलाएं आज आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।