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Rewari News: बारिश से खरीफ फसलों को मिला लाभ, अब कीटों के प्रकोप का खतरा बढ़ा

Tue, 11 Aug 2026 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 11 Aug 2026 12:21 AM IST
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Kharif crops benefited from the rain; now, the risk of pest infestation has increased.
कपास की फसल। संवाद
रेवाड़ी। जिले में एक सप्ताह में हुई 150 एमएम बारिश से खरीफ फसलों को लाभ मिला है। खेतों में नमी के चलते बाजरा, कपास, ज्वार और मूंग फसल का विकास तेजी से हो रहा है। अब फसलों पर कीटों का प्रकोप होने की आशंका है। ऐसे में किसानों को फसल पर नजर रखनी होगी।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बरसाती मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से कई प्रकार के कीट सक्रिय हो जाते हैं। कपास की फसल में सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी का खतरा बना रहता है। सफेद मक्खी पत्तियों का रस चूसकर पौधों की बढ़वार प्रभावित करती है, जबकि गुलाबी सुंडी कपास की टिंडों को नुकसान पहुंचा सकती है।
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ऐसे में किसानों को नियमित रूप से कपास के पौधों की पत्तियों, फूलों और टिंडों की जांच करने की सलाह दी गई है। शुरुआती स्तर पर कीटों की पहचान होने से समय रहते नियंत्रण किया जा सकता है।
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बाजरे की फसल में इस समय कच्ची पत्तियों पर कीटों के हमले की आशंका रहती है। लगातार बारिश के बाद निकली नई पत्तियां कोमल होने के कारण कीटों के लिए अनुकूल होती हैं। किसान खेत में नियमित निगरानी कर पत्तियों में छेद, मुड़ने या उनका रंग बदलने जैसे लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें।
ज्वार और मूंग में भी बढ़ सकता है प्रकोप
ज्वार की फसल में तना छेदक और पत्ती से जुड़े कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं मूंग की फसल में सफेद मक्खी, थ्रिप्स और फली से संबंधित कीटों का प्रकोप देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद खेतों में नमी और हरियाली बढ़ने से फसलों की बढ़वार तो बेहतर होती है, लेकिन यही परिस्थितियां कुछ कीटों के लिए भी अनुकूल रहती हैं।

वर्जन
बिना कीट की पहचान किए कीटनाशक दवा का छिड़काव नहीं करना चाहिए। कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही निर्धारित मात्रा में दवा का इस्तेमाल करें। किसान खेतों का निरीक्षण करें, ताकि फसल में कीटों का प्रकोप शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।-डॉ. मनोज कुमार, तकनीकी अधिकारी, कृषि व किसान कल्याण विभाग।

कपास की फसल। संवाद

कपास की फसल। संवाद

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