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Rewari News: अपनों ने ठुकराया तो आशियाना वृद्धाश्रम में मिला 23 बुजुर्गों को सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 14 Jun 2026 11:42 PM IST
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बुजुर्गों के साथ खड़े संस्था के पदाधिकारी। संवाद
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रेवाड़ी। अपनों की उपेक्षा का दंश झेल रहे 23 बुजुर्ग इन दिनों फरीद सेवा ट्रस्ट की ओर से संचालित आशियाना वृद्धाश्रम में गुजारा कर रहे हैं। इन बुजुर्गों में महिलाएं भी शामिल हैं। इन्हें भोजन, कपड़े, बिस्तर, दवा, मनोरंजन आदि की सुविधाएं मुहैया कराई जाती है।
विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस 15 जून को मनाया जाता है। हर वर्ष इस दिन बुजुर्गों की उपेक्षा नहीं करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाता है। इसके बाद भी वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। आशियाना वृद्धाश्रम में 23 बुजुर्ग महिला व पुरुष रह रहे हैं जिन्हें उनके बेटे और बहुओं ने निकाल दिया है।
कई बुजुर्ग घर में उपेक्षा का शिकार होने के कारण खुद घर छोड़कर वृद्धाश्रम चले गए। वृद्धाश्रम के इन बुजुर्गों को प्रभु जी कहा जाता है। इनकी हर तरह की सेवा की जाती है। इन्हें बेहतर भोजन, कपड़े, बिस्तर, दवा, मनोरंजन की सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं।
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आश्रम के आने वाले बुजुर्गों से उनका परिचय लेकर व एक पहचान पत्र लेकर उनको रहने के लिए बेड दे दिया जाता है। उनसे उनकी अवस्था एवं पारिवारिक स्थिति के बारे में पूछा जाता है। फिर कोशिश की जाती है कि उनके परिजनों को बुलाकर उनसे परामर्श एवं चर्चा करके उनके परिवार से पुनर्मिलन करवाया जा सके।
संस्था का मानना है कि इनका असली घर इनके परिजनों के साथ ही है। तत्पश्चात समय-समय पर उनका हाल चाल भी पूछा जाता है। ऐसा देखा गया है कि ज्यादातर मामलों में जेनरेशन गैप ही इसका कारण होता है जिसे परामर्श द्वारा दूर करने की एवं सुलझाने की कोशिश की जाती है। 50 से ज्यादा ऐसे मामलों को सुलझाया जा चुका है।
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आठ अक्तूबर 2021 में पंजीकृत हुई थी संस्था
फरीद सेवा ट्रस्ट 8 अक्तूबर 2021 में स्थापित एवं रजिस्टर्ड हुआ था। एक वर्ष के अंदर ही वृद्धाश्रम का दो मंजिला भवन तैयार हुआ। 16 अक्तूबर 2022 को तत्कालीन डीसी अशोक गर्ग ने वृद्धाश्रम का उद्घाटन किया गया था। तब से यहां निरंतर वृद्धों की सेवा की जा रही है। यह संस्था रक्तदान व पौधरोपण जैसे अन्य सामाजिक व परोपकारी आयोजनों में भी अग्रणी रहती है।
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सभी सदस्यों की लगाई गई है ड्यूटी
संस्था के अध्यक्ष दिनेश राजपाल ने बताया कि उनके 41 अन्य ट्रस्टी पूरी तरह से सेवा में समर्पित हैं। आश्रम के दैनिक कार्यों का संचालन संस्था के सदस्यों एवं उनके परिवारजनों की ओर से किया जाता है। दिनेश, सरला, सपना व सोनिया पोपली, डॉ. राहुल बतरा और अमित पोपली अलग अलग व्यवस्था संभालते हैंं। अन्य व्यवस्थाओं में एडवोकेट महेंद्र चक्रवर्ती, आदर्श अरोड़ा, राजू दुआ, ललित दुआ, जितेंद्र सपड़ा, रितेश गुलाटी, सीए जतिन सैनी, विनय बत्रा की ओर से सेवाएं दी जाती हैं।
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दिवस का ये है मकसद
सीए जतिन सैनी ने बताया कि विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस का उद्देश्य बुजुर्गों के प्रति होने वाले शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दुर्व्यवहार के प्रति लोगों को जागरूक करना है। दिवस समाज को यह याद दिलाता है कि सभी बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा का अधिकार है। कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिन्हें अपने ही घरों में मानसिक, आर्थिक या सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जबकि कुछ को परिवार द्वारा घर से निकाल दिया जाता है। वहीं अनेक बुजुर्ग ऐसे भी हैं जो वृद्धाश्रमों में रह रहे हैं और उनके परिवार के सदस्य उनसे मिलने तक नहीं आते। इनमें बुजुर्गों की बेटियां शामिल हैं।
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विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस (15 जून) के अवसर पर समाज में उपेक्षा का दंश झेल रहे बुजुर्गों के लिए बाबा फरीद सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित “आशियाना वृद्धाश्रम” उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। यहां न सिर्फ 23 बुजुर्गों को आश्रय मिला है, बल्कि टूटे हुए पारिवारिक रिश्तों को जोड़ने की भी लगातार कोशिश की जा रही है।
विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस 15 जून को मनाया जाता है। हर वर्ष इस दिन बुजुर्गों की उपेक्षा नहीं करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाता है। इसके बाद भी वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। आशियाना वृद्धाश्रम में 23 बुजुर्ग महिला व पुरुष रह रहे हैं जिन्हें उनके बेटे और बहुओं ने निकाल दिया है।
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कई बुजुर्ग घर में उपेक्षा का शिकार होने के कारण खुद घर छोड़कर वृद्धाश्रम चले गए। वृद्धाश्रम के इन बुजुर्गों को प्रभु जी कहा जाता है। इनकी हर तरह की सेवा की जाती है। इन्हें बेहतर भोजन, कपड़े, बिस्तर, दवा, मनोरंजन की सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं।
आश्रम के आने वाले बुजुर्गों से उनका परिचय लेकर व एक पहचान पत्र लेकर उनको रहने के लिए बेड दे दिया जाता है। उनसे उनकी अवस्था एवं पारिवारिक स्थिति के बारे में पूछा जाता है। फिर कोशिश की जाती है कि उनके परिजनों को बुलाकर उनसे परामर्श एवं चर्चा करके उनके परिवार से पुनर्मिलन करवाया जा सके।
संस्था का मानना है कि इनका असली घर इनके परिजनों के साथ ही है। तत्पश्चात समय-समय पर उनका हाल चाल भी पूछा जाता है। ऐसा देखा गया है कि ज्यादातर मामलों में जेनरेशन गैप ही इसका कारण होता है जिसे परामर्श द्वारा दूर करने की एवं सुलझाने की कोशिश की जाती है। 50 से ज्यादा ऐसे मामलों को सुलझाया जा चुका है।
आठ अक्तूबर 2021 में पंजीकृत हुई थी संस्था
फरीद सेवा ट्रस्ट 8 अक्तूबर 2021 में स्थापित एवं रजिस्टर्ड हुआ था। एक वर्ष के अंदर ही वृद्धाश्रम का दो मंजिला भवन तैयार हुआ। 16 अक्तूबर 2022 को तत्कालीन डीसी अशोक गर्ग ने वृद्धाश्रम का उद्घाटन किया गया था। तब से यहां निरंतर वृद्धों की सेवा की जा रही है। यह संस्था रक्तदान व पौधरोपण जैसे अन्य सामाजिक व परोपकारी आयोजनों में भी अग्रणी रहती है।
सभी सदस्यों की लगाई गई है ड्यूटी
संस्था के अध्यक्ष दिनेश राजपाल ने बताया कि उनके 41 अन्य ट्रस्टी पूरी तरह से सेवा में समर्पित हैं। आश्रम के दैनिक कार्यों का संचालन संस्था के सदस्यों एवं उनके परिवारजनों की ओर से किया जाता है। दिनेश, सरला, सपना व सोनिया पोपली, डॉ. राहुल बतरा और अमित पोपली अलग अलग व्यवस्था संभालते हैंं। अन्य व्यवस्थाओं में एडवोकेट महेंद्र चक्रवर्ती, आदर्श अरोड़ा, राजू दुआ, ललित दुआ, जितेंद्र सपड़ा, रितेश गुलाटी, सीए जतिन सैनी, विनय बत्रा की ओर से सेवाएं दी जाती हैं।
दिवस का ये है मकसद
सीए जतिन सैनी ने बताया कि विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस का उद्देश्य बुजुर्गों के प्रति होने वाले शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दुर्व्यवहार के प्रति लोगों को जागरूक करना है। दिवस समाज को यह याद दिलाता है कि सभी बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा का अधिकार है। कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिन्हें अपने ही घरों में मानसिक, आर्थिक या सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जबकि कुछ को परिवार द्वारा घर से निकाल दिया जाता है। वहीं अनेक बुजुर्ग ऐसे भी हैं जो वृद्धाश्रमों में रह रहे हैं और उनके परिवार के सदस्य उनसे मिलने तक नहीं आते। इनमें बुजुर्गों की बेटियां शामिल हैं।
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विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस (15 जून) के अवसर पर समाज में उपेक्षा का दंश झेल रहे बुजुर्गों के लिए बाबा फरीद सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित “आशियाना वृद्धाश्रम” उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। यहां न सिर्फ 23 बुजुर्गों को आश्रय मिला है, बल्कि टूटे हुए पारिवारिक रिश्तों को जोड़ने की भी लगातार कोशिश की जा रही है।