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Rewari News: विद्यार्थियों ने हरियाणवी लोकगीतों का सामूहिक गायन किया
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 03 Jun 2026 04:18 PM IST
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भाषाई समर कैंप के तृतीय दिवस में भाग लेते विद्यार्थी। स्रोत : स्कूल
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। ततारपुर ईस्तमुरार स्थित राजकीय आदर्श संस्कृत वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में समर कैंप के तृतीय दिवस का आयोजन किया गया।
विद्यार्थियों ने हरियाणवी लोकगीतों का सामूहिक गायन किया। इससे उनमें भाषा और संस्कृति के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ी। ढोलक, बीन, सारंगी, इकतारा, मंजीरा और नगाड़ा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही विद्यार्थियों को इन वाद्ययंत्रों के सांस्कृतिक महत्व से भी अवगत कराया गया।
लोकनृत्य कार्यशाला में विद्यार्थियों ने हरियाणवी लोकनृत्य, घूमर और भांगड़ा के विभिन्न चरणों का अभ्यास किया। समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं चित्रकला गतिविधि में मधुबनी, वारली, फड़ और मंडना जैसी लोककलाओं का परिचय कराते हुए विद्यार्थियों ने आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं।
वीडियो आधारित सांस्कृतिक सत्र में विद्यार्थियों को भारतीय लोकगीतों, लोकनृत्यों एवं सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी दी गई। प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने भाग लेते हुए अपनी समझ का प्रदर्शन किया। समापन सत्र में सभी गतिविधियों की समूह प्रस्तुतियां दी गईं।
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प्राचार्य विनोद मेहता ने इस भाषाई समर कैंप को एक नवाचारपूर्ण और उपयोगी पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में भाषाई दक्षता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ाते हैं। संस्कृत अध्यापक विजेंद्र सिंह ने भी विद्यार्थियों को कैंप के उद्देश्य और लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ किया गया।
रेवाड़ी। ततारपुर ईस्तमुरार स्थित राजकीय आदर्श संस्कृत वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में समर कैंप के तृतीय दिवस का आयोजन किया गया।
विद्यार्थियों ने हरियाणवी लोकगीतों का सामूहिक गायन किया। इससे उनमें भाषा और संस्कृति के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ी। ढोलक, बीन, सारंगी, इकतारा, मंजीरा और नगाड़ा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही विद्यार्थियों को इन वाद्ययंत्रों के सांस्कृतिक महत्व से भी अवगत कराया गया।
लोकनृत्य कार्यशाला में विद्यार्थियों ने हरियाणवी लोकनृत्य, घूमर और भांगड़ा के विभिन्न चरणों का अभ्यास किया। समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं चित्रकला गतिविधि में मधुबनी, वारली, फड़ और मंडना जैसी लोककलाओं का परिचय कराते हुए विद्यार्थियों ने आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं।
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वीडियो आधारित सांस्कृतिक सत्र में विद्यार्थियों को भारतीय लोकगीतों, लोकनृत्यों एवं सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी दी गई। प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने भाग लेते हुए अपनी समझ का प्रदर्शन किया। समापन सत्र में सभी गतिविधियों की समूह प्रस्तुतियां दी गईं।
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