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Rewari News: शहर को पानी की पूर्ति के लिए 2 वाटर टैंकों की जरूरत... पर अभी इंतजार है लंबा

संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Wed, 17 Jun 2026 11:50 PM IST
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The city needs two water tanks for its water supply... but the wait is still long.
रेवाड़ी से गुजरती नहर। संवाद - फोटो : 1
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रेवाड़ी। शहर में पानी की राशनिंग से परेशान लोगों को राहत मिलने में अभी काफी वक्त लग सकता है। जन स्वास्थ्य विभाग की योजना के तहत शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारु करने के लिए दो नए 8 एमएलडी क्षमता के वाटर टैंक बनाए जाने हैं। इनमें से एक रामगढ़ भगवानपुर में करीब 27 करोड़ रुपये से बनाया जाएगा जबकि दूसरा वाटर टैंक जाटूवास क्षेत्र में प्रस्तावित है।

रामगढ़ भगवानपुर में बनने वाले वाटर टैंक की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और निर्माण कार्य का वर्क ऑर्डर भी जारी किया जा चुका है। हालांकि जिस भूमि पर यह टैंक बनाया जाना है वहां मौजूद पेड़-पौधों को लेकर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा। फिलहाल विभाग अदालत के आदेश का इंतजार कर रहा है। मामले में फैसला कब तक आएगा, इसका इंतजार है।
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वहीं जाटूवास में प्रस्तावित दूसरे 8 एमएलडी वाटर टैंक के लिए भूमि खरीद की प्रक्रिया जारी है। जन स्वास्थ्य विभाग ने भूमि खरीद संबंधी प्रस्ताव मुख्यालय को भेज दिया है। मुख्यालय से मंजूरी मिलने और भूमि खरीद पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।
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शहर में पानी की राशनिंग व्यवस्था समाप्त करने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए दोनों वाटर टैंकों का निर्माण आवश्यक है लेकिन कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते इन परियोजनाओं को पूरा होने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं।
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यदि सभी आवश्यक अनुमतियां समय पर मिल जाती हैं तो वाटर टैंक का निर्माण एक से दो वर्ष में पूरा किया जा सकता है। हालांकि बीच में कोई कानूनी या प्रशासनिक अड़चन आने पर परियोजना में और देरी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि रामगढ़ भगवानपुर में प्रस्तावित वाटर टैंक बनने से पानी की राशनिंग व्यवस्था में काफी सुधार होगा और जलापूर्ति के अंतराल में 3 से 4 दिन तक का फर्क पड़ सकता है। हालांकि राशनिंग पूरी तरह समाप्त करने के लिए जाटूवास में दूसरा वाटर टैंक बनना भी जरूरी है। दोनों परियोजनाएं पूरी होने के बाद ही राशनिंग सिस्टम खत्म होने की संभावना है।


क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट

फिलहाल जो वाटर टैंक जिले में उपयोग में हैं, उनकी स्टोरेज क्षमता कम है। यदि नहरी पानी की सप्लाई पीछे से दो-चार दिन के लिए गड़बड़ा जाए, तो पूरे शहर में पानी की किल्लत हो जाती है। रामगढ़ भगवानपुर में बनने वाले नए टैंक की स्टोरेज क्षमता 200 मिलियन लीटर पानी की होगी। यानी नहरी बंदी के दिनों में भी शहर के पास कई दिनों का बैकअप रहेगा। इसके साथ ही 8 एमएलडी का नया ट्रीटमेंट प्लांट मिलने से पानी की क्वालिटी में भी बड़ा सुधार होगा।

टैंकों की सीमित क्षमता बनी बड़ी बाधा
शहर की तेजी से बढ़ती आबादी के मुकाबले वाटर टैंकों की संख्या और क्षमता में बीते एक दशक से कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। आबादी 3 लाख के करीब पहुंच गई है। लिसाना जलघर से शहर के करीब 30 फीसदी हिस्से को पानी सप्लाई होती है। वहीं, शहर का लगभग 70 फीसदी क्षेत्र कालाका जलघर पर निर्भर है जहां फिलहाल सिर्फ पांच वाटर टैंक मौजूद हैं। तकनीकी रूप से इन टैंकों में अधिकतम 15 से 20 दिन तक का ही पानी संग्रह किया जा सकता है, जबकि मौजूदा क्लोजर 24 दिन का है। गर्मी के दस्तक देने के साथ शहर में 20 एमएलडी से बढ़कर रोजाना 25 एमएलडी पानी की मांग बढ़ गई है। टैंकों की कुल भंडारण क्षमता लगभग 636.87 मिलियन लीटर है।

रामगढ़ भगवानपुर में बनने वाले वाटर टैंक का वर्क ऑर्डर जारी किया जा चुका है। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। जाटूवास में प्रस्तावित दूसरे वाटर टैंक के लिए भूमि खरीद की प्रक्रिया जारी है। भूमि खरीद संबंधी प्रस्ताव मुख्यालय को भेज दिया गया है।- वीपी चौहान, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग
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