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पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण आवश्यक : दीपांशु

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2026 11:38 PM IST
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Water conservation is essential to secure the future of generations: Deepanshu
विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भागीदारी निभाते लोग। स्रोत: विभाग
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रेवाड़ी। विश्व जल दिवस के अवसर पर जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन की तरफ से विभिन्न खंडों में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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खंड डहीना के गांव कंवाली में सरपंच शीलवती देवी की अध्यक्षता में भी कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर कनिष्ठ अभियंता दीपांशु ढहिनवाल ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण आवश्यक है।
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उन्होंने कहा कि यदि आज पानी की बचत नहीं की गई तो भविष्य में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, खंड संसाधन समन्वयक जितेंद्र कुमार ने जल के सही उपयोग, जल जांच और ग्राम जल सीवरेज समिति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई।
खंड रेवाड़ी के गांव बूढ़पुर में भी सरपंच मोनिका देवी की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां खंड संसाधन समन्वयक मनोज कुमार ने कहा कि जिस प्रकार लोग अपने बच्चों के भविष्य के लिए धन की बचत करते हैं उसी तरह जल की भी बचत करनी चाहिए।
खंड जाटूसाना के गांव बेरली कला में रैली निकालकर ग्रामीणों को जल संरक्षण का संदेश दिया गया। खंड संसाधन समन्वयक अनिल नेहरा के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में पंचायत सदस्यों और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जल बचाने का संकल्प लिया।

पौधरोपण कर विश्व जल दिवस मनाया
बावल। खंड बावल के सुलखा गांव में पौधरोपण कर विश्व जल दिवस मनाया गया। इस मौके पर खंड संसाधन समन्वयक विनोद कुमार ने कहा कि जीवन के लिए जल, वायु और भोजन तीनों अनिवार्य हैं। उन्होंने बताया कि यदि जल का संरक्षण नहीं किया गया तो न केवल खेती प्रभावित होगी बल्कि जीवन भी संकट में पड़ जाएगा। इस दौरान ग्रामीणों को पौधरोपण के महत्व से भी अवगत कराया गया।
अशुद्ध जल से होने वाले रोगों के बारे में दी जानकारी
कोसली। नाहड़ में भी कार्यक्रम आयोजित कर जल संरक्षण का संदेश दिया गया। खंड संसाधन समन्वयक ओमवती ने कहा कि जल पृथ्वी की अमूल्य संपदा है और इसका संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने ग्रामीणों को जल जांच, अशुद्ध जल से होने वाले रोगों और उनसे बचाव के उपायों के बारे में भी जानकारी दी।
विभाग के जिला सलाहकार योगेंद्र परमार ने बताया कि विश्व जल दिवस की शुरूआत वर्ष 1993 में हुई थी, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा कि लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सभी को जल बचाने का संकल्प लेना चाहिए।
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