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Rohtak News: 16 वर्षीय ब्रेन डेड किशोर आज देगा आठ लोगों को नई जिंदगी
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 26 Apr 2026 02:08 AM IST
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37-16 वर्षीय करनाल निवासी ब्रेन डेड मरीज के परिवार के सदस्यों के साथ स्वास्थ्य विज्ञान विवि के
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रोहतक। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए करनाल निवासी 16 वर्षीय ब्रेन डेड किशोर के अंगों से आज आठ लोगों को जिंदगी मिलेगी। संस्थान में सुबह 6 बजे से अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी। दोपहर 2 बजे परिवार को सम्मान के साथ पार्थिव देह सौंप दी जाएगी।
पीजीआई में रविवार को एक महीने में तीसरा अंगदान होनेे जा रहा है। कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने बताया कि गत दिनों सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय किशोर को ट्रॉमा सेंटर में लाया गया था। 24 अप्रैल को उनको ब्रेन डेड घोषित किया गया।
युवा के ब्रेन डेड होने की सूचना मिली तो उन्होने स्वयं निदेशक डॉ. एसके सिंघल के साथ परिवार से मुलाकात की। परिवार को बताया कि उनका बेटा भले ही इस दुनिया में नहीं रहा लेकिन उसके अंगों से करीब आठ लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं। इसके बाद वे सहमत हो गए।
अब स्टेट आर्गन ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन जिस अस्पताल को जो अंग अलॉट करेगा वहां के विशेषज्ञ डॉक्टर की टीम अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। इसमें किडनी, लिवर, पैंक्रियाज, लंग्स, कॉर्निया व हार्ट दी जाएंगी।
संस्थान निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि शोक संतप्त परिवार से मिला सहयोग आठ लोगों को नया जीवन देगा। यह सब हमारे डॉक्टराें के प्रयास से संभव हुआ है।
23 अप्रैल को मरीज में ब्रेन डेड के दिखे लक्षण
निश्चेतन विभाग के डॉ. तरुण ने बताया कि 23 अप्रैल को मरीज में ब्रेन डेड के लक्षण दिखने पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने तत्काल चार वरिष्ठ चिकित्सकों की ब्रेन डेड प्रमाणन समिति गठित की। समिति ने 24 अप्रैल की सुबह पहला एप्निया टेस्ट व अन्य क्लीनिकल टेस्ट किए। पहला टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद नियमानुसार 6 घंटे के अंतराल पर शाम को दूसरा टेस्ट किया गया। दोनों टेस्ट में ब्रेन स्टेम फंक्शन शून्य पाया गया। फिर मरीज को कानूनी रूप से ब्रेन डेड घोषित कर सोटो हरियाणा व पुलिस प्रशासन को सूचित किया गया।
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पीजीआई में रविवार को एक महीने में तीसरा अंगदान होनेे जा रहा है। कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने बताया कि गत दिनों सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय किशोर को ट्रॉमा सेंटर में लाया गया था। 24 अप्रैल को उनको ब्रेन डेड घोषित किया गया।
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युवा के ब्रेन डेड होने की सूचना मिली तो उन्होने स्वयं निदेशक डॉ. एसके सिंघल के साथ परिवार से मुलाकात की। परिवार को बताया कि उनका बेटा भले ही इस दुनिया में नहीं रहा लेकिन उसके अंगों से करीब आठ लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं। इसके बाद वे सहमत हो गए।
अब स्टेट आर्गन ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन जिस अस्पताल को जो अंग अलॉट करेगा वहां के विशेषज्ञ डॉक्टर की टीम अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। इसमें किडनी, लिवर, पैंक्रियाज, लंग्स, कॉर्निया व हार्ट दी जाएंगी।
संस्थान निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि शोक संतप्त परिवार से मिला सहयोग आठ लोगों को नया जीवन देगा। यह सब हमारे डॉक्टराें के प्रयास से संभव हुआ है।
23 अप्रैल को मरीज में ब्रेन डेड के दिखे लक्षण
निश्चेतन विभाग के डॉ. तरुण ने बताया कि 23 अप्रैल को मरीज में ब्रेन डेड के लक्षण दिखने पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने तत्काल चार वरिष्ठ चिकित्सकों की ब्रेन डेड प्रमाणन समिति गठित की। समिति ने 24 अप्रैल की सुबह पहला एप्निया टेस्ट व अन्य क्लीनिकल टेस्ट किए। पहला टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद नियमानुसार 6 घंटे के अंतराल पर शाम को दूसरा टेस्ट किया गया। दोनों टेस्ट में ब्रेन स्टेम फंक्शन शून्य पाया गया। फिर मरीज को कानूनी रूप से ब्रेन डेड घोषित कर सोटो हरियाणा व पुलिस प्रशासन को सूचित किया गया।
