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Rohtak News: चार प्रमुख निजी अस्पताल आयुष्मान पैनल से हटे, सरकारी अस्पतालों में बढ़ जाएंगे 3000 मरीज
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04-आईएमए प्रधान डॉ. अमित मान
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अभिषेक कीरत
रोहतक। जिले में आयुष्मान के तहत इलाज देने बाद भी निजी अस्पतालों का पैसा नहीं मिलने के कारण अस्पताल आयुष्मान पैनल से पीछे हटने लगे हैं। जिले के चार प्रमुख अस्पताल आयुष्मान पैनल से हट चुके हैं। अन्य अस्पताल भी पैनल से हटने पर विचार कर रहे हैंं। हर महीने 3,000 से 5,000 मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों में किया जा रहा है।
ऐसे में यहां आयुष्मान के तहत इलाज लेने वाले मरीजों का बोझ सरकारी अस्पतालों बढ़ने की संभावना बढ़ती नजर आ रही है। निजी अस्पतालों का करीब 60 करोड़ रुपये आयुष्मान के तहत इलाज देने के बाद बकाया है। 34 निजी अस्पताल आयुष्मान के तहत मरीजों को निशुल्क इलाज देने का कार्य कर रहे हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रोहतक के प्रधान डॉ. अमित मान ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन व सरकार के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं। कोई स्पष्ट हल न निकल पाने के कारण अब अस्पताल ही पैनल से बाहर होने लगे हैं। संवाद
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सरकारी अस्पतालों में सालाना 11,708 मरीज इलाज ले रहे
जिले के आयुष्मान नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश गर्ग ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में हर साल लगभग 11,708 मरीजों का इलाज आयुष्मान के तहत किया जा रहा है। इसके तहत मरीजों की आंखों के लेंस बदलना, हर्निया, सिजेरियन, कुत्ते काटना, एचआईवी, एनीमिया अन्य इलाज निशुल्क दिए जा रहे हैं। लगभग 1500 तरह के इलाज आयुष्मान के तहत मरीजों को मुहैया कराए जा रहे हैं।
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वर्जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से हर माह आयुष्मान से इलाज को लेकर रिव्यू बैठक की जाती है। इसमें जिले के सभी अस्पतालों से सदस्य उपस्थित रहते हैं। इसमें आयुष्मान के तहत की स्वास्थ्य संस्थान मेें आयुष्मान के तहत कम इलाज का संबंधित अधिकारी से जवाब लेकर आवश्यक निर्देश दिया जाता है। - डॉ. दिनेश गर्ग, जिला आयुष्मान नोडल अधिकारी, रोहतक
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ये बोले मरीज
केस 1
सोमवार को आयुष्मान के तहत आंख में लेंस डलवाने के लिए आए थे। मंगलवार को बुलाकर सारे टेस्ट किए। फिर बुधवार को बुलाकर ऑपरेशन कर दिया। ज्यादा समस्या नहीं आई। 140 रुपये का टीका बाहर से मंगाया। -सतवंती, गांव ब्राह्मणवास।
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केस 1
पत्नी को दिमागी तौर पर समस्या आ रही है। आयुष्मान के तहत इलाज कराने के लिए यहां आए हैं। डॉक्टर के पास गए थे। उन्होंने आयुष्मान काउंटर पर जाकर दस्तावेज कराने के बोला। फिर कागज पूरे करा लिए। ज्यादा समस्या नहीं आई। -सुरेश कुमार, भिवानी चुंगी।
रोहतक। जिले में आयुष्मान के तहत इलाज देने बाद भी निजी अस्पतालों का पैसा नहीं मिलने के कारण अस्पताल आयुष्मान पैनल से पीछे हटने लगे हैं। जिले के चार प्रमुख अस्पताल आयुष्मान पैनल से हट चुके हैं। अन्य अस्पताल भी पैनल से हटने पर विचार कर रहे हैंं। हर महीने 3,000 से 5,000 मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों में किया जा रहा है।
ऐसे में यहां आयुष्मान के तहत इलाज लेने वाले मरीजों का बोझ सरकारी अस्पतालों बढ़ने की संभावना बढ़ती नजर आ रही है। निजी अस्पतालों का करीब 60 करोड़ रुपये आयुष्मान के तहत इलाज देने के बाद बकाया है। 34 निजी अस्पताल आयुष्मान के तहत मरीजों को निशुल्क इलाज देने का कार्य कर रहे हैं।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रोहतक के प्रधान डॉ. अमित मान ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन व सरकार के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं। कोई स्पष्ट हल न निकल पाने के कारण अब अस्पताल ही पैनल से बाहर होने लगे हैं। संवाद
सरकारी अस्पतालों में सालाना 11,708 मरीज इलाज ले रहे
जिले के आयुष्मान नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश गर्ग ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में हर साल लगभग 11,708 मरीजों का इलाज आयुष्मान के तहत किया जा रहा है। इसके तहत मरीजों की आंखों के लेंस बदलना, हर्निया, सिजेरियन, कुत्ते काटना, एचआईवी, एनीमिया अन्य इलाज निशुल्क दिए जा रहे हैं। लगभग 1500 तरह के इलाज आयुष्मान के तहत मरीजों को मुहैया कराए जा रहे हैं।
वर्जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से हर माह आयुष्मान से इलाज को लेकर रिव्यू बैठक की जाती है। इसमें जिले के सभी अस्पतालों से सदस्य उपस्थित रहते हैं। इसमें आयुष्मान के तहत की स्वास्थ्य संस्थान मेें आयुष्मान के तहत कम इलाज का संबंधित अधिकारी से जवाब लेकर आवश्यक निर्देश दिया जाता है। - डॉ. दिनेश गर्ग, जिला आयुष्मान नोडल अधिकारी, रोहतक
ये बोले मरीज
केस 1
सोमवार को आयुष्मान के तहत आंख में लेंस डलवाने के लिए आए थे। मंगलवार को बुलाकर सारे टेस्ट किए। फिर बुधवार को बुलाकर ऑपरेशन कर दिया। ज्यादा समस्या नहीं आई। 140 रुपये का टीका बाहर से मंगाया। -सतवंती, गांव ब्राह्मणवास।
केस 1
पत्नी को दिमागी तौर पर समस्या आ रही है। आयुष्मान के तहत इलाज कराने के लिए यहां आए हैं। डॉक्टर के पास गए थे। उन्होंने आयुष्मान काउंटर पर जाकर दस्तावेज कराने के बोला। फिर कागज पूरे करा लिए। ज्यादा समस्या नहीं आई। -सुरेश कुमार, भिवानी चुंगी।
