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Rohtak News: पीजीआई में बिना चीरा लगाए तीन वर्षीय मासूम के फेफड़े से निकाला पेंच
Wed, 29 Jul 2026 06:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 29 Jul 2026 06:44 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआई के चिकित्सकों ने तीन साल के बच्चे के फेफड़े का बिना चीरा लगाए लोहे का पेंच निकाला है। नारनौल निवासी बच्चे के फेफड़े में यह पेंच फंसा हुआ था। यह कभी भी सांस की नली को ब्लॉक कर सकता था। पेंच फेफड़े में कैसे पहुंचा इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाई है।
बच्चे की जांघ की हड्डी टूटने के बाद 23 जुलाई को हुए रूटीन सीने के एक्सरे में दाहिने फेफड़े में पेंच दिखाई दिया। सीटी स्कैन से पुष्टि हुई कि पेंच दाहिने ब्रोन्कस इंटरमीडियस में फंसा था जो दुर्लभ व खतरनाक स्थिति थी।
ईएनटी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रमन वडेरा व उनकी टीम ने रीजिड ब्रोन्कोस्कोपी तकनीक का उपयोग किया। गले के रास्ते पतली दूरबीन डालकर दो घंटे चले ऑपरेशन में पेंच को बाहर निकाला गया। डॉ. रमन वडेरा ने बताया कि अनंत को कोई जटिलता नहीं हुई व वह तेजी से ठीक हो रहा है।
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अभिभावकों के लिए सलाह
डॉ. रमन वडेरा ने कहा कि अक्सर छह माह से बड़े बच्चे हर चीज मुंह में डालकर चेक करते हैं। पेंच, सिक्के, बैटरी व खिलौनों के छोटे पार्ट्स बच्चों के लिए खतरनाक होते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि ऐसी लापरवाही से बचें।
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रोहतक। पीजीआई के चिकित्सकों ने तीन साल के बच्चे के फेफड़े का बिना चीरा लगाए लोहे का पेंच निकाला है। नारनौल निवासी बच्चे के फेफड़े में यह पेंच फंसा हुआ था। यह कभी भी सांस की नली को ब्लॉक कर सकता था। पेंच फेफड़े में कैसे पहुंचा इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाई है।
बच्चे की जांघ की हड्डी टूटने के बाद 23 जुलाई को हुए रूटीन सीने के एक्सरे में दाहिने फेफड़े में पेंच दिखाई दिया। सीटी स्कैन से पुष्टि हुई कि पेंच दाहिने ब्रोन्कस इंटरमीडियस में फंसा था जो दुर्लभ व खतरनाक स्थिति थी।
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ईएनटी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रमन वडेरा व उनकी टीम ने रीजिड ब्रोन्कोस्कोपी तकनीक का उपयोग किया। गले के रास्ते पतली दूरबीन डालकर दो घंटे चले ऑपरेशन में पेंच को बाहर निकाला गया। डॉ. रमन वडेरा ने बताया कि अनंत को कोई जटिलता नहीं हुई व वह तेजी से ठीक हो रहा है।
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अभिभावकों के लिए सलाह
डॉ. रमन वडेरा ने कहा कि अक्सर छह माह से बड़े बच्चे हर चीज मुंह में डालकर चेक करते हैं। पेंच, सिक्के, बैटरी व खिलौनों के छोटे पार्ट्स बच्चों के लिए खतरनाक होते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि ऐसी लापरवाही से बचें।