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Rohtak News: वीरों की धरती बहुअकबरपुर...आसमान से भी ऊंचा है सैनिकों का शौर्य

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 24 Apr 2026 02:35 AM IST
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Bahu Akbarpur, the land of heroes...the bravery of the soldiers is higher than the sky.
14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स
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रोहतक। हिसार मार्ग स्थित बहुअकबरपुर गांव के वीर सैनिकों का शौर्य आसमान से भी ऊंचा है। यहां के रणबांकुरों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान से भी ज्यादा महत्व दिया है। इस गांव में जन्मे मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह के नाम से तो रोहतक शहर में न्यायालय के पास एक मार्ग का नामकरण भी किया गया है।
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ग्रामीण जलकरण बताते हैं कि जांबाजी का जज्बा यहां के युवाओं के खून में बसा है। पंचायत निगरानी कमेटी के प्रधान एवं पंच विजय बल्हारा के अनुसार, जंग शमशेर सिंह कुंडू मेजर जनरल के पद तक पहुंचने वाले पहले हरियाणवी थे।
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ग्रामीण बताते हैं कि आजादी के बाद हैदराबाद रियासत के भारत में विलय कराने उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके अलावा मेजर जनरल महावीर सिंह बल्हारा भी सेना में बड़े पद पर रहे और देश का गौरव बढ़ाया।
रिसलदार रिसाल सिंह बल्हारा का नाम भी गांव में सम्मान के साथ लिया जाता है। हालांकि, इन बड़े सैन्य अधिकारियों के परिवार अब गांव में नहीं रहते हैं लेकिन उनके पैतृक मकान आज भी शौर्य की गवाही दे रहे हैं।
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गांव में 300 से अधिक सैनिक

गांव में 8600 परिवार हैं जिनमें 300 से अधिक सैनिक हैं। ब्रिगेडियर, लेफ्टिनेंट, कैप्टन, कर्नल, मेजर व सूबेदार आदि तमाम पदों पर यहां के सैनिक रहे हैं। ग्रामीण मानते हैं कि देश के प्रति समर्पण की भावना यहां की मिट्टी में ही रची-बसी है।

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निरंकार बल्हारा लड़ चुके हैं 1962, 1965 और 1971 के युद्ध

गांव के 90 वर्षीय हवलदार निरंकार बल्हारा ने 1962 में चीन जबकि 1965 व 1971 में पाकिस्तान के युद्ध लड़े हैं। वह गांव में रहने वाले सबसे अधिक आयु के पूर्व सैनिक हैं। इस गांव के युवाओं में खेल के प्रति भी रुझान है।
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आजादी के बाद से ही गांव के युवाओं का सेना में लगाव है। इसी कारण यहां के युवा खेतीबाड़ी के अलावा सेना में जाकर देश सेवा को महत्व देते हैं।
- ऑनरेरी कैप्टन रणधीर सिंह, बहुअकबरपुर

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हमारे गांव के मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह सेना में बड़े अधिकारी हुए हैं। मैं उनके परिवार से हूं। वे नाते में मेरे दादा लगते थे। परिवार के तमाम सदस्य आज भी अपने मोबाइल फोन में उनकी फोटो देखकर गर्व महसूस करते हैं।

- सुरेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त नायक सूबेदार।
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बहुअकबरपुर को वीरों की भूमि कहा जाता है। यहां के युवाओं में सेना में जाने का जज्बा दशकों पहले से है। यहां करतार सिंह के अलावा जुगलाल, दुलीचंद, बदलू, राम सरूप, गोर्धन आदि स्वतंत्रता सेनानी भी हुए हैं। इसी कारण युवा अब भी सेना में जाकर देश सेवा की चाह रखते हैं।
- जलकरण बल्हारा, बहुअकबरपुर

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स्वतंत्रता सेनानी करतार सिंह को पांच बार मिले हैं ताम्र पत्र
गांव निवासी विजय बल्हारा बताते हैं कि सीने में आजादी की लौ जलाए रखने वाले उनके दादा करतार सिंह को अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी कतई पसंद नहीं थी। उन्होंने आजाद हिंद फौज में सेवाएं दीं। अंग्रेजों ने लड़ाई के दौरान बर्मा बॉर्डर से उन्हें कैद करके सात साल के लिए सिंगापुर जेल में भेज दिया था। उन्हें दो साल के काला पानी की सजा भी दी गई। स्वतंत्रता संग्राम में उनके स्मरणीय योगदान के लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1972 में उन्हें ताम्र पत्र भेंट किया था। विजय का कहना है कि दादा के सराहनीय योगदान के लिए उनको 1963, 1966, 1972 व 1997 सहित पांच बार ताम्र पत्र मिल चुके हैं।
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14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

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14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

14-बहुअकबरपुर गांव में मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह व रिसलदार रिसाल सिंह की गली की बताते ग्रामीण। स

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