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Rohtak News: पूर्व शिक्षा मंत्री चौ. माडू सिंह व रागिनी गायक कलावड़िया ने खरावड़ को दिलाई पहचान
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06-गांव खरावड़ से पूर्व शिक्षा मंत्री रहे चौधरी माडू सिंह मलिक का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन
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अभिषेक कीरत
रोहतक। शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित गांव खरावड़ को पूर्व शिक्षा मंत्री चौधरी माडू सिंह मलिक और 61 वर्षीय प्रसिद्ध रागिनी गायक रमेश कलावड़िया ने गांव को प्रदेश के साथ विदेश में भी पहचान दिलाई है। उच्च पदों पर रहे अधिकारियों ने भी गांव का नाम रोशन किया है।
प्रसिद्ध गायक रमेश कलावड़िया ने बताया कि बचपन में तीसरी-चौथी कक्षा से ही रागिनी गाना शुरू कर दिया था। स्कूल में अध्यापक सुबह की प्रार्थना के लिए उनको लड़कियों के साथ स्टेज पर खड़ा कर देते थे। एक अध्यापक ने आवाज अच्छी बताकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
वह पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू से भी सम्मानित हो चुके हैं। गायक का कहना है कि सरकार को हरियाणवी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी कार्यक्रमों में रागिनी गायन रखना चाहिए।
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गायक रमेश बताते हैं कि परिवार वाले पढ़ा-लिखाकर उन्हें अफसर बनाना चाहते थे। रागिनी गायन को छोड़कर पढ़ाई के लिए बोलते थे। नहीं मानने पर कई बार पिटाई भी हुई लेकिन रागिनी गायन नहीं छोड़ा।
मशहूर गायक रमेश पाकिस्तान व ऑस्ट्रेलिया में रागिनी गायन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वहां जब विदेशी लोग रागिनी कार्यक्रम को अनूठा मानकर वीडियो फोटो लेते हैं, तब अलग ही आनंद की अनुभूति होती है। संवाद
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दादा लख्मीचंद को बनाया आदर्श
गायक रमेश ने बताया कि दादा लख्मीचंद की रागिनी को सुन-सुनकर सुर-ताल सीखी। इसके बाद गांव या आस-पास सांग करने पहुंचने वाली टीमों को देख देखकर गाना सीख लिया। गायक रमेश ने बताया कि हर साल कुरुक्षेत्र में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय रत्नावली कार्यक्रम में रागिनी गायन के लिए बुलाया जाता है। 1984 फरीदाबाद में उत्तर भारत गायन प्रतियोगिता हुई थी जिसमें वह विजेता रहे। इसके बाद एक्साइज एंड टेक्सेशन विभाग में नौकरी कर अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।-- -- -- -- -- -
ये हैं गांव के प्रमुख शिक्षाविद
डॉ. जयसिंह मलिक, हजारी लाल मलिक, मास्टर रामचंद्र, प्रो. उमेद सिंह मलिक, पंडित नंदन गौतम व अन्य। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पूर्व तहसीलदार दयानंद भी ईमानदारी व व्यक्तित्व के लिए मशहूर हैं। आसपास के गांवों के लोग भी उनको पहचानते हैं। तहसीलदार होते हुए भी गांव में साधार आचरण में जीवन व्यतीत करने के लिए जाने जाते हैं। परिजन उनके बारे में बताते हुए रो पड़े।
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गांव ने प्रदेश को शिक्षा मंत्री दिया
चौ. माडू सिंह मलिक के पोते प्रदीप मलिक ने बताया कि उनके परदादा के पिता गंगादास बख्तावरी देवी के सबसे छोटे बेटे थे। चौ. माडू सिंह मलिक 26 मई 1906 को पैदा हुए थे। शुरू में शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण माडू कहा जाता था। बचपन में ही मां-पिता का देहांत हो गया था, फिर बड़ी बहन ने देखभाल की। 1927 में दिल्ली के हिंदू कॉलेज से बीए की थी। नौकरी की तलाश में चौधरी छोटूराम के नजदीक आए थे। उनके सुझाव पर 1930 में वकालत पूरी की। फिर एक साल शिक्षक का कार्य किया। फिर यूनियनिस्ट पार्टी में 1931 को जिला सचिव नियुक्त किया। सर छोटूराम की मृत्यु के बाद पार्टी कांग्रेस में शामिल हो गई थी। 1967 में चौधरी बंसीलाल की सरकार में उनको शिक्षा मंत्री बनाया गया था। हसनगढ़ विधानसभा से दो बार विधायक रहे थे। फिर 1977 के चुनाव में हार मिली थी। 1983 में निधन हो गया था।
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ऐसे जताया परिजनों और ग्रामीणों ने गर्व
आसपास के क्षेत्र के लोग उनके गांव को तहसीलदार दयानंद के नाम से जानते हैं। सब उनकी तारीफ करते हैं। वह साधारण जीवन व्यतीत करते थे। सारा गांव गर्व महसूस करता है।
- सुरेंद्र सिंह मलिक, तहसीलदार के बेटे
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रिश्ते में ससुर थे लेकिन बेटी की तरह रखते थे। छह साल पति बेरोजगार रहे थे लेकिन उन्होंने कोई कमी महसूस नहीं होने दी। हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे।
- मंजू रानी, ग्रामीण
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गांव से कई बड़े व्यक्तित्व हुए हैं। चौधरी माडू सिंह हरियाणा के शिक्षा मंत्री रहे हैं। पूर्व तहसीलदार दयानंद ईमानदारी की मिसाल रहे हैं। डॉ. जयसिंह मलिक भी शिक्षाविद रहे। प्रसिद्ध रागिनी गायक रमेश कलावड़िया ने भी गांव का नाम रोशन किया है। इसके अलावा भी अन्य व्यक्तित्व हुए हैं।
- कैप्टन जगवीर मलिक, ग्रामीण
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रोहतक। शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित गांव खरावड़ को पूर्व शिक्षा मंत्री चौधरी माडू सिंह मलिक और 61 वर्षीय प्रसिद्ध रागिनी गायक रमेश कलावड़िया ने गांव को प्रदेश के साथ विदेश में भी पहचान दिलाई है। उच्च पदों पर रहे अधिकारियों ने भी गांव का नाम रोशन किया है।
प्रसिद्ध गायक रमेश कलावड़िया ने बताया कि बचपन में तीसरी-चौथी कक्षा से ही रागिनी गाना शुरू कर दिया था। स्कूल में अध्यापक सुबह की प्रार्थना के लिए उनको लड़कियों के साथ स्टेज पर खड़ा कर देते थे। एक अध्यापक ने आवाज अच्छी बताकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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वह पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू से भी सम्मानित हो चुके हैं। गायक का कहना है कि सरकार को हरियाणवी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी कार्यक्रमों में रागिनी गायन रखना चाहिए।
गायक रमेश बताते हैं कि परिवार वाले पढ़ा-लिखाकर उन्हें अफसर बनाना चाहते थे। रागिनी गायन को छोड़कर पढ़ाई के लिए बोलते थे। नहीं मानने पर कई बार पिटाई भी हुई लेकिन रागिनी गायन नहीं छोड़ा।
मशहूर गायक रमेश पाकिस्तान व ऑस्ट्रेलिया में रागिनी गायन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वहां जब विदेशी लोग रागिनी कार्यक्रम को अनूठा मानकर वीडियो फोटो लेते हैं, तब अलग ही आनंद की अनुभूति होती है। संवाद
दादा लख्मीचंद को बनाया आदर्श
गायक रमेश ने बताया कि दादा लख्मीचंद की रागिनी को सुन-सुनकर सुर-ताल सीखी। इसके बाद गांव या आस-पास सांग करने पहुंचने वाली टीमों को देख देखकर गाना सीख लिया। गायक रमेश ने बताया कि हर साल कुरुक्षेत्र में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय रत्नावली कार्यक्रम में रागिनी गायन के लिए बुलाया जाता है। 1984 फरीदाबाद में उत्तर भारत गायन प्रतियोगिता हुई थी जिसमें वह विजेता रहे। इसके बाद एक्साइज एंड टेक्सेशन विभाग में नौकरी कर अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
ये हैं गांव के प्रमुख शिक्षाविद
डॉ. जयसिंह मलिक, हजारी लाल मलिक, मास्टर रामचंद्र, प्रो. उमेद सिंह मलिक, पंडित नंदन गौतम व अन्य। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पूर्व तहसीलदार दयानंद भी ईमानदारी व व्यक्तित्व के लिए मशहूर हैं। आसपास के गांवों के लोग भी उनको पहचानते हैं। तहसीलदार होते हुए भी गांव में साधार आचरण में जीवन व्यतीत करने के लिए जाने जाते हैं। परिजन उनके बारे में बताते हुए रो पड़े।
गांव ने प्रदेश को शिक्षा मंत्री दिया
चौ. माडू सिंह मलिक के पोते प्रदीप मलिक ने बताया कि उनके परदादा के पिता गंगादास बख्तावरी देवी के सबसे छोटे बेटे थे। चौ. माडू सिंह मलिक 26 मई 1906 को पैदा हुए थे। शुरू में शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण माडू कहा जाता था। बचपन में ही मां-पिता का देहांत हो गया था, फिर बड़ी बहन ने देखभाल की। 1927 में दिल्ली के हिंदू कॉलेज से बीए की थी। नौकरी की तलाश में चौधरी छोटूराम के नजदीक आए थे। उनके सुझाव पर 1930 में वकालत पूरी की। फिर एक साल शिक्षक का कार्य किया। फिर यूनियनिस्ट पार्टी में 1931 को जिला सचिव नियुक्त किया। सर छोटूराम की मृत्यु के बाद पार्टी कांग्रेस में शामिल हो गई थी। 1967 में चौधरी बंसीलाल की सरकार में उनको शिक्षा मंत्री बनाया गया था। हसनगढ़ विधानसभा से दो बार विधायक रहे थे। फिर 1977 के चुनाव में हार मिली थी। 1983 में निधन हो गया था।
ऐसे जताया परिजनों और ग्रामीणों ने गर्व
आसपास के क्षेत्र के लोग उनके गांव को तहसीलदार दयानंद के नाम से जानते हैं। सब उनकी तारीफ करते हैं। वह साधारण जीवन व्यतीत करते थे। सारा गांव गर्व महसूस करता है।
- सुरेंद्र सिंह मलिक, तहसीलदार के बेटे
रिश्ते में ससुर थे लेकिन बेटी की तरह रखते थे। छह साल पति बेरोजगार रहे थे लेकिन उन्होंने कोई कमी महसूस नहीं होने दी। हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे।
- मंजू रानी, ग्रामीण
गांव से कई बड़े व्यक्तित्व हुए हैं। चौधरी माडू सिंह हरियाणा के शिक्षा मंत्री रहे हैं। पूर्व तहसीलदार दयानंद ईमानदारी की मिसाल रहे हैं। डॉ. जयसिंह मलिक भी शिक्षाविद रहे। प्रसिद्ध रागिनी गायक रमेश कलावड़िया ने भी गांव का नाम रोशन किया है। इसके अलावा भी अन्य व्यक्तित्व हुए हैं।
- कैप्टन जगवीर मलिक, ग्रामीण

06-गांव खरावड़ से पूर्व शिक्षा मंत्री रहे चौधरी माडू सिंह मलिक का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन

06-गांव खरावड़ से पूर्व शिक्षा मंत्री रहे चौधरी माडू सिंह मलिक का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन

06-गांव खरावड़ से पूर्व शिक्षा मंत्री रहे चौधरी माडू सिंह मलिक का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन