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Rohtak News: एमडीयू कुलपति ने प्रो. नसीब सिंह गिल का निलंबन किया रद्द
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45-प्रो. नसीब सिंह गिल। स्रोत : एमडीयू
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयूू) के कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशंस विभाग के प्रो. नसीब सिंह गिल बहाल कर दिए गए हैं। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने 17 फरवरी का निलंबन आदेश निरस्त कर दिया है। रजिस्ट्रार कार्यालय ने उन्हें तत्काल सेवाएं संभालने के लिए कहा है।
कुलसचिव के पत्र के मुताबिक, 17 फरवरी के निलंबन आदेश को प्रारंभ से ही निरस्त माना गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय नियमानुसार विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। अब डॉ. गिल अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निर्णय से एमडीयू के शिक्षकों ने खुशी जताई है। डॉ. गिल को अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने पर निलंबित किया गया था। उन्होंने राज्यपाल और सीएम को लिखा था कि वीसी प्रो. राजबीर सिंह द्वेषवश उनके विरुद्ध कार्रवाई कर रहे हैं।
वीसी ने 1989 में लेक्चरर के रूप में हुई भर्ती के विरुद्ध आईं शिकायतों के बहाने एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग इनक्वायरी कमेटी गठित की थी। इसकी रिपोर्ट में उनके चयन को गलत करार दिया गया था। हालांकि, लेक्चरर के बाद डॉ. गिल की बतौर प्रोफेसर यहीं सीधी भर्ती हुई थी।
विवि के काबिल शिक्षकों में शुमार प्रो. गिल के कई शोधार्थियों के काम को पेटेंट मिल चुका है। वहीं, निलंबित डॉ. विकास सिवाच को अभी कोई राहत नहीं मिली है। इस मामले में भी जल्द फैसला आने की उम्मीद है। दोनों का निलंबन खत्म करने के लिए शिक्षक संघ ने पिछले हफ्ते ही नए वीसी को ज्ञापन सौंपा था।
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कुलसचिव के पत्र के मुताबिक, 17 फरवरी के निलंबन आदेश को प्रारंभ से ही निरस्त माना गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय नियमानुसार विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। अब डॉ. गिल अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
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विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निर्णय से एमडीयू के शिक्षकों ने खुशी जताई है। डॉ. गिल को अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने पर निलंबित किया गया था। उन्होंने राज्यपाल और सीएम को लिखा था कि वीसी प्रो. राजबीर सिंह द्वेषवश उनके विरुद्ध कार्रवाई कर रहे हैं।
वीसी ने 1989 में लेक्चरर के रूप में हुई भर्ती के विरुद्ध आईं शिकायतों के बहाने एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग इनक्वायरी कमेटी गठित की थी। इसकी रिपोर्ट में उनके चयन को गलत करार दिया गया था। हालांकि, लेक्चरर के बाद डॉ. गिल की बतौर प्रोफेसर यहीं सीधी भर्ती हुई थी।
विवि के काबिल शिक्षकों में शुमार प्रो. गिल के कई शोधार्थियों के काम को पेटेंट मिल चुका है। वहीं, निलंबित डॉ. विकास सिवाच को अभी कोई राहत नहीं मिली है। इस मामले में भी जल्द फैसला आने की उम्मीद है। दोनों का निलंबन खत्म करने के लिए शिक्षक संघ ने पिछले हफ्ते ही नए वीसी को ज्ञापन सौंपा था।