{"_id":"6a256a42fdd0f20cf107a80d","slug":"the-insurance-company-was-ordered-to-pay-rs-167-lakh-along-with-nine-percent-interest-rohtak-news-c-17-roh1019-868655-2026-06-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: बीमा कंपनी को 1.67 लाख नौ प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने का दिया आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: बीमा कंपनी को 1.67 लाख नौ प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने का दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 08 Jun 2026 06:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
लोगो- अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के चेयरमैन नगेंद्र सिंह कादियान ने निर्णय दिया है कि इंश्योरेंस कंपनी बिना ठोस वजह के स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज नहीं कर सकती। आयोग ने मंगलवार को सुनाए आदेश में कंपनी को सुंडाना निवासी साहिल को 1.67 लाख रुपये की क्लेम राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता साहिल ने आयोग में 11 नवंबर 2023 शिकायत दी थी। शिकायत में बताया था कि उन्होंने स्टार हेल्थ से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ले रखी थी। 2 नवंबर 2022 को सड़क दुर्घटना में उसके दाहिने घुटने में गंभीर चोट लगी थी। उनको उपचार के लिए उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
उपचार पर कुल 1.52 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए थे लेकिन बीमा कंपनी ने एमआरआई रिपोर्ट के हवाले से यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि चोट पहले की है इसलिए पॉलिसी की शर्तों के तहत भुगतान नहीं किया जा सकता। आयोग ने बीमा कंपनी को आयोग में दावा पेश करने के लिए कहा।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने अस्पताल के रिकॉर्ड, एमआरआई रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की जांच की। आयोग ने पाया कि किसी भी डॉक्टर, सर्जन या रेडियोलॉजिस्ट ने चोट को पुरानी या पहले की नहीं बताया था। एमआरआई रिपोर्ट में भी ऐसी कोई टिप्पणी नहीं थी। इससे यह साबित हो सके कि चोट दुर्घटना से पहले की है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी चोट को दुर्घटना से पहले का साबित करने में विफल रही है। इसके लिए वह कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है इसलिए मामला खारिज नहीं किया जा सकता है।
भुगतान को 30 दिनों में चुकाने का आदेश
आयोग ने बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता के उपचार और दवाइयों में खर्च हुए कुल 1,67,700 रुपये का भुगतान करने के साथ शिकायत दायर करने की तारीख 11 अप्रैल 2023 से अदायगी तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और सेवा में कमी के लिए 5,000 रुपये तथा मुकदमेबाजी खर्च के लिए 5,000 रुपये अलग से देने का आदेश भी दिया गया है। यह भुगतान 30 दिनों में करना होगा।
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के चेयरमैन नगेंद्र सिंह कादियान ने निर्णय दिया है कि इंश्योरेंस कंपनी बिना ठोस वजह के स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज नहीं कर सकती। आयोग ने मंगलवार को सुनाए आदेश में कंपनी को सुंडाना निवासी साहिल को 1.67 लाख रुपये की क्लेम राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता साहिल ने आयोग में 11 नवंबर 2023 शिकायत दी थी। शिकायत में बताया था कि उन्होंने स्टार हेल्थ से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ले रखी थी। 2 नवंबर 2022 को सड़क दुर्घटना में उसके दाहिने घुटने में गंभीर चोट लगी थी। उनको उपचार के लिए उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
उपचार पर कुल 1.52 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए थे लेकिन बीमा कंपनी ने एमआरआई रिपोर्ट के हवाले से यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि चोट पहले की है इसलिए पॉलिसी की शर्तों के तहत भुगतान नहीं किया जा सकता। आयोग ने बीमा कंपनी को आयोग में दावा पेश करने के लिए कहा।
Trending Videos
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने अस्पताल के रिकॉर्ड, एमआरआई रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की जांच की। आयोग ने पाया कि किसी भी डॉक्टर, सर्जन या रेडियोलॉजिस्ट ने चोट को पुरानी या पहले की नहीं बताया था। एमआरआई रिपोर्ट में भी ऐसी कोई टिप्पणी नहीं थी। इससे यह साबित हो सके कि चोट दुर्घटना से पहले की है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी चोट को दुर्घटना से पहले का साबित करने में विफल रही है। इसके लिए वह कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है इसलिए मामला खारिज नहीं किया जा सकता है।
भुगतान को 30 दिनों में चुकाने का आदेश
आयोग ने बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता के उपचार और दवाइयों में खर्च हुए कुल 1,67,700 रुपये का भुगतान करने के साथ शिकायत दायर करने की तारीख 11 अप्रैल 2023 से अदायगी तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और सेवा में कमी के लिए 5,000 रुपये तथा मुकदमेबाजी खर्च के लिए 5,000 रुपये अलग से देने का आदेश भी दिया गया है। यह भुगतान 30 दिनों में करना होगा।