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Rohtak News: महिलाएं घर ही नहीं, समाज के हर क्षेत्र में कर रहीं भागीदारी
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20-अमर उजाला कार्यक्रम में हुए संवाद कार्यक्रम में शामिल महिलाएं। संवाद
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में समाज में महिलाओं की भूमिका पर विशिष्ट महिलाओं ने रखे विचार
लोगो- अमर उजाला संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। महिलाएं अब चूल्हा-चौका ही नहीं करती हैं बल्कि बाहर निकलकर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर देश की उन्नति में सहभागी बन रही हैं। कोई अंतरिक्ष तक पहुंच गई है तो काेई आतंक के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दे रही हैं। महिलाएं राजनीति, उद्योग, नौकरी, सेना, शोध हर क्षेत्र में बराबर की भूमिका निभा रही हैं।
आरक्षण के चलते पंचायतों में जगह बनाने में सफल रही हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे पर सवाल उठाते हुए महिलाओं ने बेटियों को बचाने के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही बचपन से ही बच्चों को समानता का पाठ पढ़ाने की आवश्यकता जताई। शनिवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अमर उजाला कार्यालय में हुए संवाद कार्यक्रम में विशिष्ट महिलाओं ने विचार रखे।
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आज की नारी किसी से कम नहीं है। महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाएं अब बेझिझक अपना काम आधी रात तक भी कर सकती हैं। - प्रिया कपूर, व्यवसायी व समाजसेविका।
महिला की भूमिका पहले से काफी बदल चुकी है। महिलाएं घर व ऑफिस दोनों जिम्मेदारियां एक साथ निभा रही हैं, इसलिए उन्हें हर दिन सम्मान मिलना चाहिए। महिलाएं देश काे नई पहचान दिलाने में अहम योगदान दे रही हैं।
- संगीता, भारतीय जनता मोर्चा महामंत्री
महिलाओं के लिए सिर्फ एक दिन ही नहीं बल्कि हर दिन खास होना चाहिए। पहले महिलाएं जागरूक नहीं थीं। अब हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए परिवार व समाज के सहयोग की जरूरत होती है।
इस मौके पर डॉ. सीमा, सहायक प्रोफेसर पूजा, डॉ. पुष्पा, पूर्व प्राचार्य वीणा कौशिक, भाजपा कार्यकर्ता कमला, भाजपा महिला मोर्चा की महामंत्री संगीता सिन्हा, डॉ. शोभा सैनी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष वीणा सिक्का, सीडब्ल्यूसी की पूर्व अध्यक्ष आशा आहुजा, नेहा व अन्य भी मौजूद रहीं।
- पूमा गोयल, अध्यक्ष, वैश्य महिला समाज
जब भी महिलाओं को मौका मिला है, उन्होंने खुद को साबित किया है। उन्होंने कहा कि पंचायतों में आरक्षण मिलने के बावजूद कई जगह महिला सरपंच के पीछे पुरुष ही फैसले लेते हैं। कार्यस्थलों पर भी महिलाओं को कई बार शोषण का सामना करना पड़ता है।
- मिथलेश, सदस्य, एमडीडी ऑफ इंडिया।
चिकित्सा क्षेत्र में 95 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं। महिलाओं को अपने जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों का अधिकार अब भी पूरी तरह नहीं मिल पाया है। समाज को बेटियों को बचाने की नहीं बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है। - डॉ. आरती साहू, स्त्री रोग विशेषज्ञ
पिछले 25 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही हूं। महिलाएं नौकरी के साथ-साथ घर भी अच्छे से संभाल सकती हैं। महिलाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए। एकजुट रहना चाहिए। - प्रो. अरुणा आचल, बीएमयू।
बच्चों को बचपन से ही समानता का पाठ पढ़ाना जरूरी है। बेटा और बेटी में फर्क नहीं होना चाहिए। समाज में कई बार महिलाएं ही महिलाओं के खिलाफ खड़ी हो जाती हैं। इसे बदलने की जरूरत है। - लोविना सिंगला, एडवोकेट
पहले की महिलाएं भी काफी सशक्त थीं और उन्होंने काफी संघर्षों के बाद अपनी पहचान बनाई। समाज को महिलाओं के सम्मान की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से निभानी होगी। - वीना कौशिक, सेवानिवृत्त प्राचार्य।
कई मामलों में पीड़ित लड़कियों को न्याय पाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। महिलाओं की बात कितनी सुनी और समझी जाती है, इस पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। - नीलम आहुजा, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी सदस्य
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लोगो- अमर उजाला संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। महिलाएं अब चूल्हा-चौका ही नहीं करती हैं बल्कि बाहर निकलकर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर देश की उन्नति में सहभागी बन रही हैं। कोई अंतरिक्ष तक पहुंच गई है तो काेई आतंक के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दे रही हैं। महिलाएं राजनीति, उद्योग, नौकरी, सेना, शोध हर क्षेत्र में बराबर की भूमिका निभा रही हैं।
आरक्षण के चलते पंचायतों में जगह बनाने में सफल रही हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे पर सवाल उठाते हुए महिलाओं ने बेटियों को बचाने के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही बचपन से ही बच्चों को समानता का पाठ पढ़ाने की आवश्यकता जताई। शनिवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अमर उजाला कार्यालय में हुए संवाद कार्यक्रम में विशिष्ट महिलाओं ने विचार रखे।
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आज की नारी किसी से कम नहीं है। महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाएं अब बेझिझक अपना काम आधी रात तक भी कर सकती हैं। - प्रिया कपूर, व्यवसायी व समाजसेविका।
महिला की भूमिका पहले से काफी बदल चुकी है। महिलाएं घर व ऑफिस दोनों जिम्मेदारियां एक साथ निभा रही हैं, इसलिए उन्हें हर दिन सम्मान मिलना चाहिए। महिलाएं देश काे नई पहचान दिलाने में अहम योगदान दे रही हैं।
- संगीता, भारतीय जनता मोर्चा महामंत्री
महिलाओं के लिए सिर्फ एक दिन ही नहीं बल्कि हर दिन खास होना चाहिए। पहले महिलाएं जागरूक नहीं थीं। अब हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए परिवार व समाज के सहयोग की जरूरत होती है।
इस मौके पर डॉ. सीमा, सहायक प्रोफेसर पूजा, डॉ. पुष्पा, पूर्व प्राचार्य वीणा कौशिक, भाजपा कार्यकर्ता कमला, भाजपा महिला मोर्चा की महामंत्री संगीता सिन्हा, डॉ. शोभा सैनी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष वीणा सिक्का, सीडब्ल्यूसी की पूर्व अध्यक्ष आशा आहुजा, नेहा व अन्य भी मौजूद रहीं।
- पूमा गोयल, अध्यक्ष, वैश्य महिला समाज
जब भी महिलाओं को मौका मिला है, उन्होंने खुद को साबित किया है। उन्होंने कहा कि पंचायतों में आरक्षण मिलने के बावजूद कई जगह महिला सरपंच के पीछे पुरुष ही फैसले लेते हैं। कार्यस्थलों पर भी महिलाओं को कई बार शोषण का सामना करना पड़ता है।
- मिथलेश, सदस्य, एमडीडी ऑफ इंडिया।
चिकित्सा क्षेत्र में 95 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं। महिलाओं को अपने जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों का अधिकार अब भी पूरी तरह नहीं मिल पाया है। समाज को बेटियों को बचाने की नहीं बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है। - डॉ. आरती साहू, स्त्री रोग विशेषज्ञ
पिछले 25 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही हूं। महिलाएं नौकरी के साथ-साथ घर भी अच्छे से संभाल सकती हैं। महिलाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए। एकजुट रहना चाहिए। - प्रो. अरुणा आचल, बीएमयू।
बच्चों को बचपन से ही समानता का पाठ पढ़ाना जरूरी है। बेटा और बेटी में फर्क नहीं होना चाहिए। समाज में कई बार महिलाएं ही महिलाओं के खिलाफ खड़ी हो जाती हैं। इसे बदलने की जरूरत है। - लोविना सिंगला, एडवोकेट
पहले की महिलाएं भी काफी सशक्त थीं और उन्होंने काफी संघर्षों के बाद अपनी पहचान बनाई। समाज को महिलाओं के सम्मान की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से निभानी होगी। - वीना कौशिक, सेवानिवृत्त प्राचार्य।
कई मामलों में पीड़ित लड़कियों को न्याय पाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। महिलाओं की बात कितनी सुनी और समझी जाती है, इस पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। - नीलम आहुजा, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी सदस्य