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Sirsa News: ऑटो म्यूटेशन और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 लागू, इंतकाल से रजिस्ट्री सेवाओं में मिलेगी सुविधा, फर्जीवाड़े पर रोक के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी और व्यक्तिगत फोटो पहचान अनिवार्य
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 22 Jun 2026 10:38 PM IST
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सिरसा। भूमि संबंधी कार्यों में तेजी लाने और आम नागरिकों को तहसील के चक्करों से राहत देने के लिए सरकार ने ऑटो म्यूटेशन प्रणाली और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 को पूरी तरह लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और त्वरित हो जाएगी।
जिला जनसूचना व जनसंपर्क अधिकारी रामनाथ ने बताया कि पहले रजिस्ट्री होने के बाद भी इंतकाल दर्ज होने में काफी समय लगता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ऑटो म्यूटेशन प्रणाली को एक माह तक पायलट आधार पर चलाया गया था जिसके तहत प्रारंभिक चरण में ही करीब 50 हजार इंतकाल स्वतः दर्ज किए जा चुके हैं।
जिला जनसूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी रामनाथ ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री होते ही स्वतः इंतकाल दर्ज हो जाएगा और रजिस्ट्री के समय ही इंतकाल नंबर भी उपलब्ध हो जाएगा। जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी उनका निपटान 24 घंटे के भीतर किया जाएगा। खेवट विभाजन वाले मामलों का निपटान अधिकतम 10 दिनों में होगा। इसी तरह विरासत, पारिवारिक बंटवारे और न्यायालय की डिग्री आधारित इंतकाल भी अधिकतम 10 दिनों में निपटाए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होगी। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग विशेष अभियान चलाकर सभी लंबित इंतकालों का निपटान करेगा और अगले 15 दिनों में शेष मामलों के समाधान का लक्ष्य रखा गया है।
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अलग से नहीं करना होगा इंतकाल आवेदन
नई व्यवस्था के तहत नागरिकों को अब अलग से इंतकाल के लिए आवेदन नहीं करना होगा। रजिस्ट्री और इंतकाल प्रक्रिया आपस में जुड़ जाएगी, जिससे तहसील कार्यालयों के चक्कर कम लगेंगे। नागरिक ऑनलाइन अपने इंतकाल की स्थिति देख सकेंगे और उसकी प्रति डाउनलोड व प्रिंट भी कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने 29 सितंबर 2025 को बाबैन (कुरुक्षेत्र) से पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 1.0 की शुरुआत की थी। आठ माह के संचालन और प्राप्त सुझावों के आधार पर अब इसका 2.0 संस्करण लागू किया गया है।
नई प्रणाली में आवेदन फॉर्म को सरल बनाया गया है तथा प्रथम और द्वितीय पक्ष की आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है। कंपनियों और एनआरआई के लिए अधिकृत व्यक्ति नियुक्त करने की सुविधा दी गई है। डीड को नागरिक स्वयं, डीड राइटर, अधिवक्ता या हेल्पडेस्क के माध्यम से भर सकेंगे।
अनावश्यक औपचारिकताएं कम होंगी
इसके अलावा पूर्ण डिजिटल सिग्नेचर और बायोमेट्रिक प्रक्रिया, ऑनलाइन स्टे सत्यापन, अतिरिक्त दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन व अपॉइंटमेंट को तत्काल श्रेणी में बदलने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। नई प्रणाली में आरसी-1 और आरसी-2 प्रक्रियाओं को एकीकृत कर दिया गया है जिससे अनावश्यक औपचारिकताएं कम होंगी। साथ ही रजिस्ट्री में शामिल प्रत्येक पक्षकार की फोटो से पहचान सुनिश्चित की जाएगी जिससे फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगेगी।
जिला जनसूचना व जनसंपर्क अधिकारी रामनाथ ने बताया कि पहले रजिस्ट्री होने के बाद भी इंतकाल दर्ज होने में काफी समय लगता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ऑटो म्यूटेशन प्रणाली को एक माह तक पायलट आधार पर चलाया गया था जिसके तहत प्रारंभिक चरण में ही करीब 50 हजार इंतकाल स्वतः दर्ज किए जा चुके हैं।
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जिला जनसूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी रामनाथ ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री होते ही स्वतः इंतकाल दर्ज हो जाएगा और रजिस्ट्री के समय ही इंतकाल नंबर भी उपलब्ध हो जाएगा। जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी उनका निपटान 24 घंटे के भीतर किया जाएगा। खेवट विभाजन वाले मामलों का निपटान अधिकतम 10 दिनों में होगा। इसी तरह विरासत, पारिवारिक बंटवारे और न्यायालय की डिग्री आधारित इंतकाल भी अधिकतम 10 दिनों में निपटाए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होगी। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग विशेष अभियान चलाकर सभी लंबित इंतकालों का निपटान करेगा और अगले 15 दिनों में शेष मामलों के समाधान का लक्ष्य रखा गया है।
अलग से नहीं करना होगा इंतकाल आवेदन
नई व्यवस्था के तहत नागरिकों को अब अलग से इंतकाल के लिए आवेदन नहीं करना होगा। रजिस्ट्री और इंतकाल प्रक्रिया आपस में जुड़ जाएगी, जिससे तहसील कार्यालयों के चक्कर कम लगेंगे। नागरिक ऑनलाइन अपने इंतकाल की स्थिति देख सकेंगे और उसकी प्रति डाउनलोड व प्रिंट भी कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने 29 सितंबर 2025 को बाबैन (कुरुक्षेत्र) से पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 1.0 की शुरुआत की थी। आठ माह के संचालन और प्राप्त सुझावों के आधार पर अब इसका 2.0 संस्करण लागू किया गया है।
नई प्रणाली में आवेदन फॉर्म को सरल बनाया गया है तथा प्रथम और द्वितीय पक्ष की आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है। कंपनियों और एनआरआई के लिए अधिकृत व्यक्ति नियुक्त करने की सुविधा दी गई है। डीड को नागरिक स्वयं, डीड राइटर, अधिवक्ता या हेल्पडेस्क के माध्यम से भर सकेंगे।
अनावश्यक औपचारिकताएं कम होंगी
इसके अलावा पूर्ण डिजिटल सिग्नेचर और बायोमेट्रिक प्रक्रिया, ऑनलाइन स्टे सत्यापन, अतिरिक्त दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन व अपॉइंटमेंट को तत्काल श्रेणी में बदलने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। नई प्रणाली में आरसी-1 और आरसी-2 प्रक्रियाओं को एकीकृत कर दिया गया है जिससे अनावश्यक औपचारिकताएं कम होंगी। साथ ही रजिस्ट्री में शामिल प्रत्येक पक्षकार की फोटो से पहचान सुनिश्चित की जाएगी जिससे फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगेगी।