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Sirsa News: ड्रोन उड़ा... उम्मीदें धराशायी
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ड्रोन दीदी ड्रोन के साथ खेतों में। फ़ाइल फोटो
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खास खबर
- जिले में कई ड्रोन दीदी एक एकड़ में भी नहीं करा पाईं नैनो यूरिया का छिड़काव - सैंपल सिस्टम भी विकसित नहीं कर पा रहा कृषि विभाग
सुनील बैनीवाल
सिरसा। कृषि क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तह शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराकर खेतों में नैनो यूरिया के छिड़काव को बढ़ावा देना था लेकिन जमीनी स्तर पर हालात उलट है। इस साल कई ड्रोन दीदी एक एकड़ में भी यह कार्य नहीं कर पाई।
जिले में इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं आठ महिलाओं का चयन कर उन्हें ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद कृभकों ने इन महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराया और कृषि विभागने एक-एक हजार एकड़ में नैनो यूरिया के छिड़काव का लक्ष्य दिया। इस तरह सभी को आठ हजार एकड़ में छिड़काव करना था। इन महिलाओं ने फील्ड में जाकर किसानों से संपर्क कर 6678.67 एकड़ में नैनो यूरिया के छिड़काव के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया। कृषि विभाग के मुताबिक सभी ड्रोन दीदी ने 3448.19 एकड़ में छिड़काव की रिपोर्ट दी। सत्यापन कराया तो पता चला कि महज 2339.64 एकड़ में ही नैनो यूरिया छिड़काव हुआ है। कई ड्रोन दीदी तो दिए गए लक्ष्य की तुलना में एक एकड़ में भी छिड़काव नहीं कर सकीं। संवाद
किसानों का भरोसा नहीं बन पाया
ड्रोन से यूरिया छिड़काव के प्रति कृषि विभाग किसानों को भरोसे में नहीं ले पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब भी पारंपरिक तरीकों को अधिक भरोसेमंद मानते हैं। इस कारण ड्रोन के माध्यम से छिड़काव की मांग नहीं बन पा रही है। परिणामस्वरूप, ड्रोन दीदियों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा।
देर से जागे विभागीय अधिकारी
कृषि विभाग के अधिकारियों ने जब नैनो यूरिया छिड़काव संबंधी रिपोर्ट ली तो हालात बदतर थे। इसके बाद विभागीय अधिकारियों से कहा गया कि ड्रोन दीदी के साथ जाकर किसानों को जागरूक करें। कृषि अधिकारी फील्ड में उतरे तब तक गेहूं में यूरिया छिड़काव की मांग ही खत्म हो गई और सरसों में जरूरी नहीं थी।
प्रभावशाली डेमो सिस्टम नहीं ला पा रहीं ड्रोन दीदी
सही मायने में ड्रोन से नैनो यूरिया छिड़काव और इसके बाद फसल पर उसके परिणाम का प्रभावी सैंपल या डेमो सिस्टम विकसित नहीं किया जा सका है। जब तक यह सिस्टम नहीं लाया जाएगा तब तक किसानों को नई तकनीक पर विश्वास नहीं हो सकेगा। समय रहते प्रदर्शन और प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत की जाती तो स्थिति कुछ बेहतर हो सकती थी।
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ड्रोन से छिड़काव का आंकड़ा
विमला कुमारी
पंजीकृत क्षेत्र - 3016.22 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 1204.83 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 1167.14 एकड़
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सकीला
पंजीकृत क्षेत्र - 1192.86 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 1164.23 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 209.37 एकड़
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अनुष्का
पंजीकृत क्षेत्र - 165.80 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 1.00 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 1.00 एकड़
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कविता रानी
पंजीकृत क्षेत्र - 5.99 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 0 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 0 एकड़
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शिमला देवी
पंजीकृत क्षेत्र - 152.51 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र- 4.92 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 4.92 एकड़
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कविता
पंजीकृत क्षेत्र - 1.00 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र- 0 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 0 एकड़
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प्रियंका नेहरा
पंजीकृत क्षेत्र - 2142.78 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र- 1073.21 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 957.21 एकड़
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दीपेश चौधरी
पंजीकृत क्षेत्र - 1.51 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 0 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित- 0 एकड़
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नैनो यूरिया के छिड़काव के लिए ड्रोन सिस्टम को बेहतर तरीके से लागू करने में ड्रोन दीदी ज्यादा कामयाब नहीं हुई हैं। इसके पीछे किसानों का इस तकनीक पर भरोसा न करना और ड्रोन में कई बार आने वाली बैटरी संबंधी दिक्कतें बड़ी वजह हैं। स्वयं सहायता समूह को और ज्यादा मेहनत कर किसानों के साथ जुड़ना होगा तब जाकर यह तकनीक कामयाब होगी। -डॉ. सुखदेव सिंह कंबोज, उप निदेशक कृषि विभाग
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क्या है ड्रोन दीदी योजना
ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वर्ष 2023-24 से यह योजना शुरू की गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं का चयन कर पहले ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद सब्सिडी पर ड्रोन दिया जाता है। इसके बाद किसानों से संपर्क कर उनके खेतों में ड्रोन के जरिए कीटनाशक व उर्वरक का छिड़काव करती हैं।
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योजना का उद्देश्य
- महिलाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भरता बनाना।
- खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाना।
- किसानों की लागत कम और पैदावार बढ़ाना।
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कैसे करें आवेदन
स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाएं ड्रोन दीदी बनने के लिए आवेदन कर सकती हैं। इसके लिए सबसे पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ना होगा। इसके बाद ब्लॉक विकास कार्यालय या जिला ग्रामीण विकास एजेंसी से संपर्क करना होगा। आवश्यक पात्रताएं जांचने के बाद यहीं से स्वयं सहायता समूह का चयन होता है। इसके बाद चयनित महिलाओं को ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है।
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- जिले में कई ड्रोन दीदी एक एकड़ में भी नहीं करा पाईं नैनो यूरिया का छिड़काव - सैंपल सिस्टम भी विकसित नहीं कर पा रहा कृषि विभाग
सुनील बैनीवाल
सिरसा। कृषि क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तह शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराकर खेतों में नैनो यूरिया के छिड़काव को बढ़ावा देना था लेकिन जमीनी स्तर पर हालात उलट है। इस साल कई ड्रोन दीदी एक एकड़ में भी यह कार्य नहीं कर पाई।
जिले में इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं आठ महिलाओं का चयन कर उन्हें ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद कृभकों ने इन महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराया और कृषि विभागने एक-एक हजार एकड़ में नैनो यूरिया के छिड़काव का लक्ष्य दिया। इस तरह सभी को आठ हजार एकड़ में छिड़काव करना था। इन महिलाओं ने फील्ड में जाकर किसानों से संपर्क कर 6678.67 एकड़ में नैनो यूरिया के छिड़काव के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया। कृषि विभाग के मुताबिक सभी ड्रोन दीदी ने 3448.19 एकड़ में छिड़काव की रिपोर्ट दी। सत्यापन कराया तो पता चला कि महज 2339.64 एकड़ में ही नैनो यूरिया छिड़काव हुआ है। कई ड्रोन दीदी तो दिए गए लक्ष्य की तुलना में एक एकड़ में भी छिड़काव नहीं कर सकीं। संवाद
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किसानों का भरोसा नहीं बन पाया
ड्रोन से यूरिया छिड़काव के प्रति कृषि विभाग किसानों को भरोसे में नहीं ले पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब भी पारंपरिक तरीकों को अधिक भरोसेमंद मानते हैं। इस कारण ड्रोन के माध्यम से छिड़काव की मांग नहीं बन पा रही है। परिणामस्वरूप, ड्रोन दीदियों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा।
देर से जागे विभागीय अधिकारी
कृषि विभाग के अधिकारियों ने जब नैनो यूरिया छिड़काव संबंधी रिपोर्ट ली तो हालात बदतर थे। इसके बाद विभागीय अधिकारियों से कहा गया कि ड्रोन दीदी के साथ जाकर किसानों को जागरूक करें। कृषि अधिकारी फील्ड में उतरे तब तक गेहूं में यूरिया छिड़काव की मांग ही खत्म हो गई और सरसों में जरूरी नहीं थी।
प्रभावशाली डेमो सिस्टम नहीं ला पा रहीं ड्रोन दीदी
सही मायने में ड्रोन से नैनो यूरिया छिड़काव और इसके बाद फसल पर उसके परिणाम का प्रभावी सैंपल या डेमो सिस्टम विकसित नहीं किया जा सका है। जब तक यह सिस्टम नहीं लाया जाएगा तब तक किसानों को नई तकनीक पर विश्वास नहीं हो सकेगा। समय रहते प्रदर्शन और प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत की जाती तो स्थिति कुछ बेहतर हो सकती थी।
ड्रोन से छिड़काव का आंकड़ा
विमला कुमारी
पंजीकृत क्षेत्र - 3016.22 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 1204.83 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 1167.14 एकड़
सकीला
पंजीकृत क्षेत्र - 1192.86 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 1164.23 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 209.37 एकड़
अनुष्का
पंजीकृत क्षेत्र - 165.80 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 1.00 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 1.00 एकड़
कविता रानी
पंजीकृत क्षेत्र - 5.99 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 0 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 0 एकड़
शिमला देवी
पंजीकृत क्षेत्र - 152.51 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र- 4.92 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 4.92 एकड़
कविता
पंजीकृत क्षेत्र - 1.00 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र- 0 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 0 एकड़
प्रियंका नेहरा
पंजीकृत क्षेत्र - 2142.78 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र- 1073.21 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित - 957.21 एकड़
दीपेश चौधरी
पंजीकृत क्षेत्र - 1.51 एकड़
स्वीकृत क्षेत्र - 0 एकड़
कृषि विभाग द्वारा सत्यापित- 0 एकड़
नैनो यूरिया के छिड़काव के लिए ड्रोन सिस्टम को बेहतर तरीके से लागू करने में ड्रोन दीदी ज्यादा कामयाब नहीं हुई हैं। इसके पीछे किसानों का इस तकनीक पर भरोसा न करना और ड्रोन में कई बार आने वाली बैटरी संबंधी दिक्कतें बड़ी वजह हैं। स्वयं सहायता समूह को और ज्यादा मेहनत कर किसानों के साथ जुड़ना होगा तब जाकर यह तकनीक कामयाब होगी। -डॉ. सुखदेव सिंह कंबोज, उप निदेशक कृषि विभाग
क्या है ड्रोन दीदी योजना
ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वर्ष 2023-24 से यह योजना शुरू की गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं का चयन कर पहले ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद सब्सिडी पर ड्रोन दिया जाता है। इसके बाद किसानों से संपर्क कर उनके खेतों में ड्रोन के जरिए कीटनाशक व उर्वरक का छिड़काव करती हैं।
योजना का उद्देश्य
- महिलाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भरता बनाना।
- खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाना।
- किसानों की लागत कम और पैदावार बढ़ाना।
कैसे करें आवेदन
स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाएं ड्रोन दीदी बनने के लिए आवेदन कर सकती हैं। इसके लिए सबसे पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ना होगा। इसके बाद ब्लॉक विकास कार्यालय या जिला ग्रामीण विकास एजेंसी से संपर्क करना होगा। आवश्यक पात्रताएं जांचने के बाद यहीं से स्वयं सहायता समूह का चयन होता है। इसके बाद चयनित महिलाओं को ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है।