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Sirsa News: किशोरावस्था में ही युवाओं को नशा खींच रहा अपनी ओर

संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Wed, 14 Jan 2026 01:23 AM IST
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Drug addiction is attracting young people in their teenage years.
 सिविल अस्पताल का डी एडिक्शन सेंटर 
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सिरसा। जिले में नशे के मामले बढ़ रहे हैं। वहीं, नशा छोड़ने वालों की तादाद भी बढ़ती जा रही है। इसमें किशोर अवस्था से लेकर शादीशुदा जोड़े तक शामिल हैं। अलग-अलग कारणों से नशे की लत में आ गए थे। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे ज्यादा किशोर अवस्था से युवाओं को नशे की लत पड़ रही है। दोस्तों के साथ ग्रुप में आकर मुख्य रूप से युवा नशे के आदी बन रहे हैं।
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नागरिक अस्पताल सिरसा के ओएसटी यानी ओपीओईडी सप्सीटयूट थेरेपी के आंकड़े इसी हकीकत को बयां करते हैं। इस थेरेपी के माध्यम से युवाओं की काउंसलिंग कर परिवार के सहयोग से उन्हें मुख्यधारा में लाने का काम किया जा रहा हैं। इस काम में बढ़े स्तर पर सफलता भी मिल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में शुरुआत के समय 36 लोग नशा छोड़ने के लिए आए थे और दिसंबर 2025 तक यह आंकड़ा 1125 तक पहुंच चुका हैं।
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कैसे जुड़े नशे से बाद में छोड़ा
बेगू रोड के युवा ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह ई-रिक्शा चलाता है। शादीशुदा और आज बेहद खुश है। पत्नी ने हर हाल में मेरा साथ दिया। एक वक्त आ गया था कि उसे सभी ने कहा था कि ये नहीं नशे को छोड़गा। उसने अपने घरवालों की बात नहीं सुनी। उसके साथ का ही परिणाम है कि आपके सामने यहां पर दवा ले रहा हूं और दो साल से किसी भी तरह से दूर हूं। उसने बताया कि पांच साल पहले वह नशे की लत में पड़ गया था। उसकी शुरुआत दोस्तों के साथ ग्रुप में ही हुई थी। उसके बाद उसकी शादी भी हो गई। चिट्टा या हेरोइन आसानी से मिल जाती थी। पैसा की व्यवस्था नहीं होती थी तो इसे बेचने भी लग गए। तीन-चार यार दोस्त इकट्ठा होते थे और पैसा लेकर दिल्ली चले जाते थे। वहां काले लोग होते थे वो गोलियां देते थे। 300 से 500 ग्राम लेकर आते थे। यहां आकर बेचते थे और खुद भी नशा करते थे। उसने बताया कि गोलियां में बड़े स्तर पर केमिकल ही होता था।
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पत्नी ने हौसला दिया कि छोड़ दो सब ठीक हो जाएगा
युवक ने बताया कि उसकी पत्नी ने उसे हौसला दिया कि इसे छोड़ दो तो सब ठीक हो जाएगा। उसके कहने पर उसने नशा छोड़ने की शुरुआत की। ओएसटी सेंटर में आकर बूफ्रो दवा ली। धीरे-धीरे सब नॉर्मल होता गया। एक वक्त था जब गली से गुजरता था तो लोग घरों के अंदर चले जाते थे और कहते थे नशेड़ी आ गया। बच्चों से बात करना मना था। अब वही लोग मुस्कुराकर बात करतें हैं और मुझे भी घिन्न आती है कि मैं ऐसा हो गया था। आज अपना काम करता हूं, अच्छा कमा लेता हूं।
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अब नहीं लगता अच्छा नशा करना
युवक के साथ आए दोस्त ने बताया कि उम्र कम थी और जोश में इस आदत में पड़ गए। दो सालों से इससे दूरी बनाए हुए हैं और अब अच्छा नहीं लगता है। परिवार के लोगों ने साथ दिया तो आज यहां तक पहुंच गए। वरना, दूसरों की तरह जिंदगी खत्म हो गई होती। कई दोस्त जो नशा करते हैं, आज भी कहते हैं, लेकिन हम नहीं करते।
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स्कूलों के आसपास बनाते है माहौल
नशा छोड़ने वालों की काउंसिलिंग करने वाले मेडिकल ऑफिसर डॉ. राजकुमार ने बताया कि किशोरों को मुख्य रूप से टारगेट किया जाता था। युवाओं ने बताया कि दसवीं के बाद जब वे स्कूलों में दोस्तों के साथ ग्रुप में रहने लगे तो स्कूल के बाहर चाय व अन्य दुकानों पर बैठते थे। वहां अलग-अलग उम्र के लोग आते थे। धीरे-धीरे एक या दो लोगों से दोस्ती होने लगी। पहले सिगरेट की आदत लगी, उसके बाद धीरे-धीरे अन्य प्रकार को नशा उनके साथ करने लगे। इसी प्रकार कब चिट्टे का नशा करने लगे पता ही नहीं चला, इतना ही नहीं, उनके लिए बेचने का काम भी किया। ताकि खुद के नशे की पूर्ति कर सके।
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मानसिक तनाव के कारण भी नशा को चुना
काउंसलर की माने तो मानसिक तनाव को कम करने के लिए कुछ लोगों ने नशे की आदत डाल ली। उसमें हर वर्ग व उम्र के लोग शामिल थे। इतना ही नहीं, सरकारी और गैर सरकारी नौकरी पेशा लोग भी इस आदत का शिकार बन गए। खासतौर पर वह लोग जिन्हें 10 से 16 घंटे तक की नौकरी करनी पड़ती थीं। वहीं, लेबर वर्ग को मुख्य रूप से टारगेट नशा करने वाले बनाते हैं। शुरुआत, गोलियाें से करते हैं और धीरे-धीरे वे चिट्टे पर चले जाते हैं।


यह है प्रक्रिया
नशे की तलब न लगे इसलिए बूफ्रो नामक दवा दी जाती है। परिवार के सहयोग से दवा लेने वाले को समझाया जाता है और मुख्य धारा में लाया जाता है। धीरे-धीरे मात्रा घटाकर नशे की लत को कम किया जाता है। कोई छोड़ने चाहे तो 6 माह से 1 साल तक छोड़ देता है। इतना ही नहीं, इन सभी की मॉनिटरिंग भी विशेष रूप से की जाती है।
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परिवार का सहयोग जरूरी
काउंसिलिंग करने वाले मेडिकल ऑफिसर डॉ. राजकुमार ने बताया कि नशे की लत को छोड़ने में परिवार का अहम रोल होता है। यदि परिवार साथ देता है तो नशा छूट सकता है। कई ऐसे केस हैं जहां पति-पत्नी दोनों नशा करते हैं और दोनों दवा लेने के लिए आते हैं। वह छोड़ने चाहते हैं। इसके अलावा कइयों के माता पिता लेकर आते हैं और उनका सहयोग करते हैं। परिवार का सहयोग ही नशे को खत्म करने में मुख्य भूमिका निभाती है।
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