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Drug Addiction: नशामुक्ति के दावों के बीच दम तोड़ती जिंदगियां, कई गांव नशामुक्त भी घोषित, लेकिन एक केंद्र नहीं
कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, सिरसा
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 17 Feb 2026 01:19 PM IST
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सार
हरियाणा में नशामुक्ति के दावों के बीच जिंदगियां दम तोड़ रही हैं। सिरसा की रानियां विधानसभा क्षेत्र में 110 से ज्यादा गांव-ढाढियां हैं। कई गांव नशामुक्त भी घोषित हो गए हैं, लेकिन यहां एक भी नशामुक्ति केंद्र नहीं है।
Haryana Drug
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
हरियाणा के गांवों और ढाणियों तक नशे का जहर ऐसे फैल रहा है जैसे किसी ने चुपचाप पूरी पीढ़ी की रगों में धीमा जहर घोल दिया हो। सरकार और प्रशासन कागजों में हजारों गांवों को नशामुक्त घोषित कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रानियां हलके जैसे सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में एक भी नशामुक्ति केंद्र मौजूद नहीं है।
इस विधानसभा क्षेत्र की 87 पंचायतों और 110 से अधिक गांवों-ढाणियों में लाखों लोग रहते हैं लेकिन यहां नशे से जूझते युवाओं के इलाज पर सरकार का ध्यान नहीं है। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट में ऐसी स्थिति सामने आने के बाद सवाल यह है कि अगर नशामुक्ति का दावा सच है तो फिर श्मशानों में चिताएं क्यों बढ़ रही हैं?
क्या घोषणाएं ही इलाज हैं या फिर संवेदनाओं से परे एक पूरी पीढ़ी को आंकड़ों में समेट देने की तैयारी है? यह स्थिती तब है जब रानियां में कई गांव नशामुक्त घोषित हैं और यहां इसकी घोषणा करने वाले बोर्ड भी लगे हैं।
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इस विधानसभा क्षेत्र की 87 पंचायतों और 110 से अधिक गांवों-ढाणियों में लाखों लोग रहते हैं लेकिन यहां नशे से जूझते युवाओं के इलाज पर सरकार का ध्यान नहीं है। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट में ऐसी स्थिति सामने आने के बाद सवाल यह है कि अगर नशामुक्ति का दावा सच है तो फिर श्मशानों में चिताएं क्यों बढ़ रही हैं?
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क्या घोषणाएं ही इलाज हैं या फिर संवेदनाओं से परे एक पूरी पीढ़ी को आंकड़ों में समेट देने की तैयारी है? यह स्थिती तब है जब रानियां में कई गांव नशामुक्त घोषित हैं और यहां इसकी घोषणा करने वाले बोर्ड भी लगे हैं।
राजस्थान में इलाज कराने को मजबूर
रानियां के गांव ओटू, ढाणी प्रताप और अन्य गांवों के लोगों ने कई खुलासे किए। ओटू निवासी सुनील कुमार ने बताया कि पूरे रानियां में एक भी नशामुक्ति केंद्र नहीं है। नशे से पीछा छुड़ाने का इलाज करवाने सिरसा जाएं या फिर राजस्थान। पूर्व सरपंच होशियार सिंह ने बताया कि ज्यादातर ग्रामीण राजस्थान के हनुमानगढ़ या मारवाड़ी स्थित नशामुक्ति केंद्रों में इलाज करवाने जाते हैं।
रानियां के गांव ओटू, ढाणी प्रताप और अन्य गांवों के लोगों ने कई खुलासे किए। ओटू निवासी सुनील कुमार ने बताया कि पूरे रानियां में एक भी नशामुक्ति केंद्र नहीं है। नशे से पीछा छुड़ाने का इलाज करवाने सिरसा जाएं या फिर राजस्थान। पूर्व सरपंच होशियार सिंह ने बताया कि ज्यादातर ग्रामीण राजस्थान के हनुमानगढ़ या मारवाड़ी स्थित नशामुक्ति केंद्रों में इलाज करवाने जाते हैं।
कुछ ग्रामीण आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों का इलाज करवाने नशामुक्ति केंद्र जाते ही नहीं। वो भाग्य और भगवान के भरोसे होकर अपने बच्चों की निगरानी करते हैं लेकिन आखिर में उन्हें नशे के जहर से मौत नसीब होती है।
कर्ज, बीमारी और चिंता में डूब रहे ग्रामीण
ग्रामीण बूटा सिंह ने बताया कि रानियां में उपचार नहीं होने और राजस्थान में इलाज करवाने की मजबूरी के कारण कई ग्रामीण कर्ज में डूब चुके हैं। इसी तरह नशे की लत में फंसने के कारण युवा दूसरी जानलेवा बीमारियों के भी शिकार हो रहे हैं।
ग्रामीण बूटा सिंह ने बताया कि रानियां में उपचार नहीं होने और राजस्थान में इलाज करवाने की मजबूरी के कारण कई ग्रामीण कर्ज में डूब चुके हैं। इसी तरह नशे की लत में फंसने के कारण युवा दूसरी जानलेवा बीमारियों के भी शिकार हो रहे हैं।
अपने बच्चों को नशे की लत में फंसकर तिल-तिल मरता देख बुजुर्ग माता-पिता चिंता में डूबे हैं। उन्होंने कहा कि नशे के कारण गांव और ग्रामीणों की दुर्दशा व भयावह स्थिति सिर्फ यहां रहने वाले ही समझ सकते हैं।
मार्च 2025 तक 3,825 गांव नशामुक्त घोषित
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पुलिस ने सरपंचों के साथ मिलकर एक जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक कुल 3,406 गांवों और 809 वार्डों को नशामुक्त घोषित किया था। मार्च 2025 तक ऐसे गांवों की संख्या 3,825 हो गई थी। इनमें सिरसा जिले के 164 गांव और 11 वार्ड भी शामिल थे। इसके बाद पुलिस की तरफ से नशामुक्त गांवों का आंकड़ा जारी ही नहीं किया गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पुलिस ने सरपंचों के साथ मिलकर एक जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक कुल 3,406 गांवों और 809 वार्डों को नशामुक्त घोषित किया था। मार्च 2025 तक ऐसे गांवों की संख्या 3,825 हो गई थी। इनमें सिरसा जिले के 164 गांव और 11 वार्ड भी शामिल थे। इसके बाद पुलिस की तरफ से नशामुक्त गांवों का आंकड़ा जारी ही नहीं किया गया।
विधायक बोले- नशामुक्ति केंद्र के लिए सरकार से लगातार लगा रहे गुहार
विधायक अर्जुन चौटाला ने रानियां हलके में नशे व नशामुक्ति केंद्रों के सवाल पर कहा कि उनके हलके की काफी युवा आबादी नशे की चपेट में आ चुकी है। इस पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने के लिए सख्त नियमों के तहत एक्शन के साथ-साथ जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की लगातार मांग सरकार से कर रहा हूं। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में नशे का मुद्दा उठाकर भयावह स्थिति को बताते हुए एक 100 बेड के नशामुक्ति केंद्र की मांग भी करेंगे। सरकार का रानियां ही नहीं बल्कि पूरे सिरसा जिले में सौतेला व्यवहार सामने आ चुका है।
विधायक अर्जुन चौटाला ने रानियां हलके में नशे व नशामुक्ति केंद्रों के सवाल पर कहा कि उनके हलके की काफी युवा आबादी नशे की चपेट में आ चुकी है। इस पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने के लिए सख्त नियमों के तहत एक्शन के साथ-साथ जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की लगातार मांग सरकार से कर रहा हूं। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में नशे का मुद्दा उठाकर भयावह स्थिति को बताते हुए एक 100 बेड के नशामुक्ति केंद्र की मांग भी करेंगे। सरकार का रानियां ही नहीं बल्कि पूरे सिरसा जिले में सौतेला व्यवहार सामने आ चुका है।
सिरसा जिले के बड़ी तादाद में युवा पूरी तरह से चिट्टे की जकड़ में फंस चुके हैं और नशे की ओवरडोज से मौत के मुंह में जा रहे हैं। हमने कई बार चिट्टे के बढ़ते नशे के खिलाफ प्रदर्शन भी किए लेकिन न प्रशासन जगा और न सरकार। हमारी पार्टी के लोगों ने कई चिट्टा बेचने वालों को पकड़वाया लेकिन सरकारी संरक्षण होने के कारण पुलिस द्वारा छोड़ दिए गए। पुलिस से छूटने के बाद वही तस्कर गांवों में जाकर धड़ल्ले से दोबारा चिट्टा बेचने लगे।